आज़मगढ़।
रिपोर्ट: वीर सिंह
आज़मगढ़: अखिल भारतीय प्रगतिशील छात्र मंच(AIPSF) इकाई आजमगढ़ के द्वारा मौजूदा स्वास्थ्य-पोषण-शिक्षा-रोजगार व्यवस्था में मौलिक सुधार के संबंध में विभिन्न मांगो से संबंधित 10 सूत्रीय मांगपत्र का ज्ञापन राष्ट्रपति महोदय को जिलाधिकारी आजमगढ़ के द्वारा भेजा।
अंबेडकर पार्क से छात्रों ने जुलूस निकालते हुए अपनी मांगों से संबंधित जोरदार नारें लगाए गए।छात्र एकता जिंदाबाद, इंकलाब जिंदाबाद, निजीकरण मुर्दाबाद, शिक्षा-स्वास्थ्य सहित सभी सार्वजनिक उपक्रमों को बेचना बंद करो, स्वास्थ्य और शिक्षा को निजी हाथों में बेचना बंद करो, शिक्षा-स्वास्थ्य का राष्ट्रीयकरण करो, सार्वजनिक वितरण प्रणाली को मजबूत करो,सबको पोषणयुक्त निःशुल्क भोजन की गारंटी लो, देश के सभी गांवों-मोहल्लों में सभी संसाधन युक्त एक मिनी हॉस्पिटल का निर्माण करो, जिला अस्पतालों में OT और OPD की 24 घन्टे व्यवस्था करो,सभी अस्पतालों में ICU, वेंटिलेटर की समुचित व्यवस्था करो, आबादी के मानक के अनुसार प्रशिक्षित डॉक्टरों और विशेषज्ञों की नियुक्ति करो,सबको शिक्षा सबको काम-वरना होगी नींद हराम, रोजगार को मौलिक अधिकार का दर्जा दो, सभी बेरोजगारों को काम दो, काम न मिलने तक 20 हजार रुपये मासिक जीवन निर्वाह भत्ता दो,सभी लंबित परीक्षाओ को कराते हुए उनके परिणाम जारी करो, सभी कॉलेजों-विश्विद्यालयों में ऑफलाइन क्लासेज संचालित करो,महंगाई पर रोक लगाओ आदि नारे लगाते हुए अपने मांगपत्र को सौंपा गया।
छात्र प्रतिनिधि प्रशांत ने मीडिया को बताया कि पिछले डेढ़ साल से भारत के सभी नागरिकगण कोरोना और सड़ियल स्वास्थ्य व्यवस्था के निजीकरण के चलते भयानक मंजर और जख्मो में जीने को मजबूर हैं।देश मे कई दशकों से किये जा रहे स्वास्थ्य व्यवस्था के निजीकरण के कारण सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को बदहाल बना दिया गया था जिसे इस कोरोना संक्रमण ने पर्दाफाश कर जगजाहिर बना दिया कि हमारे देश के आम जनता को ऑक्सीजन, बेड, वेंटिलेटर, एम्बुलेंस, ICU, सभी रोगों की जांच जैसी न्यूनतम सुविधाएं भी मयस्सर नहीं हो पाई है।जिस वजह से हमारे लाखों अपने सहनागरिकों को असामयिक कृत्रिम मौत हो गयी।हर एक व्यक्ति का कोई न कोई उनसे बिछड़ गया।कई छात्र अनाथ हो गए हैं।इन मौतों को हाइकोर्ट तक ने नरसंहार कहा।इस नरसंहार के बाद श्मशान, कब्रिस्तान तक के दर्दीले तस्वीरों ने पूरी इंसानी सभ्यता को झकझोर कर रख दिया था।नदियों में बहती लाशों और किनारे रेत में दबी लाशों के दर्दनाक मंजर ने पूरी दुनियां में भारत की छवि को शर्मशार किया।
संदीप ने कहा कि इस नरसंहार को स्वास्थ्य प्रदाता मुनाफाखोर निजी कंपनियों,अस्पतालों ने तो कई गुना बढ़ाया।अगर समय रहते जाँच, इलाज, उचित संसाधन और सबको पोषणयुक्त भोजन मिला होता तो इतनी ज्यादा संख्या में हमारे अपनों की अभूतपूर्व मौत नहीं हुई होती।इन मौतों की जिम्मेदार मौजूदा स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, रोजगार व्यवस्था ही है, इसलिए इसमे मौलिक सुधार अनिवार्य है।
अनिकेत ने कहा कि सरकार को मुनाफाखोर निजी कंपनियों के हाथों देश के सार्वजनिक संसाधनो को बेचने की पूरी प्रकिया पर तत्काल रोक लगाना होगा, सबको पोषणयुक्त भोजन, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार देने की गारंटी लेना होगा।जायज और लोकतांत्रिक मांगों पर उठ रही आवाज को दबाने की तानाशाही पर रोक लगाना होगा।छात्रों बेरोजगारों के शांतिपूर्ण आंदोलनों के दमन बंद करना होगा।
मांगो पर समुचित कार्यवाही न होने पर आम जनता के साथ छात्र-बेरोजगार मिलकर अपने गम और गुस्से का इजहार करने को मजबूर होंगे।जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की ही होगी।
ज्ञापन देने वालों में प्रशान्त, अवधेश, अनिकेत, संदीप,विजय, श्रेय, उत्तम, आशीष, अभिषेक, उमेश, राहुल आदि लोग उपस्थित रहें।

