Breaking News

वायु हमारी जिन्दगी का अत्यन्त आवश्यक तत्व: डॉ० मसरूर मिर्जा

दिल्ली।

डॉ० मसरूर मिर्जा

स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारी।

वायु हमारी जिन्दगी का अत्यन्त आवश्यक तत्व है। वायु कुछ गैसों का और नमी का मिश्रण है। इसमें कुछ अक्रिय (inert) पदार्थ भी हैं।
हम विश्व के किसी भी हिस्से में ‘शुद्ध वायु’ नहीं प्राप्त कर सकते। जब हम सांस लेते हैं तो आक्सीजन के साथ-साथ कुछ अन्य गैसें और पदार्थ हमारे श्वशन तंत्र में प्रवेश करते हैं 18 वी शताब्दी में वाष्प इंडियन के खोज के बाद से ही औद्योगिक क्रांति की शुरुआत हुई और इसके साथ साथ वायु प्रदूषण का एक नया युग प्रारंभ हुआ। इस दौरान मोटर वाहनों का प्रयोग आवागमन के लिए प्रारंभ हुआ और इसके साथ-साथ इन में बेतहाशा वृद्धि हुई । वर्तमान में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लू.एच.ओ.) के अनुसार ‘वायु प्रदूषण एक एैसी स्थिति है जिसके अन्तर्गत बाह्य वातावरण में मनुष्य तथा उसके पर्यावरण को हानि पहुचाने वाले तत्व सघन रूप से एकत्रित हो जाते हैं।‘ दूसरे शब्दों में वायु के सामान्य संगठन में मात्रात्मक या गुणातात्मक परिवर्तन, जो जीवन या जीवनोपयोगी अजैविक संघटकों पर दुष्प्रभाव डालता है, वायु प्रदूषण कहलाता है।
वायु प्रदूषण विश्व की राजनैतिक समस्याओं  एवं  उनके सीमाओं से परे हैं। मानवीय क्रिया कलापों द्वारा उत्पन्न प्रदूषण में विद्युत गृह (विशेषतः कोयले पर आधारित), अम्लीय वर्षा, मोटरवाहन, कीटनाशक, जंगल की आग, कृषि कार्यों द्वारा उत्पन्न कचरा, सिगरेट का धुआं, रसोई का धुआं आदि मुख्य कारण हैं। वायु प्रदूषण का मनुष्य व जीव जंतुओं पर बहुत ही बुरा प्रभाव पड़ रहा है
वायु  प्रदूषण के निम्न कारक: 
1- सल्फर डाई आक्साइड (SO2) 
2- नाइट्रोजन आक्साइड (NO) 
3- कार्बन मोनो आक्साइड (CO) 
4- सालिड पार्टिकुलेट मैटेरियल
5- लौह कण
6- ओजोन (O3) 
7- कार्बन डाई आक्साइड (CO2) 
8- हाइड्रोकार्बन्स
9- मीथेन
10- विकिरण
11- कुछ धातुयें
वह प्रदूषण के कारणों में से सल्फर डाइऑक्साइड का स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ता है इस पर चर्चा करेंगेl 
यह एक रंगहीन क्रियाशील गैस है। यह कोयले या ईंधन के जलने पर निकलती है। सामान्य तौर पर सल्फर डाइऑक्साइड की सर्वाधिक मात्रा बड़े औद्योगिक संयंत्रों के पास मिलती है। इसके प्रमुख स्रोत ऊर्जा संयंत्र, रिफाइनरीज, औद्योगिक भट्टियाँ हैं।

(वायु प्रदूषण और पार्टिकुलेट मैटर (कड़ प्रदूषण))
पार्टिकुलेट मैटर दो प्रकार के होते हैं पार्टिकुलेट मैटर 2.5 माइक्रोमीटर और पार्टिकुलेट मैटर 10.0 माइक्रोमीटर इन कणों को इनके व्यास के आधार पर विभाजित किया जाता है
पीएम 2.5 और pm10 मौजूद इतने छोटे कण होते हैं जो आपके स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाते हैं जब इनका अस्तर वायु में बढ़ जाता है तो सांस के द्वारा यह फेफड़ों में पहुंचते हैं जिनसे सांस लेने में दिक्कत होती है जब यह आंखों में जाते हैं तो आंखों में जलन होती है पार्टिकुलेट मैटर वातावरण में मौजूद तरल पदार्थों के साथ मिलकर उनका एक मिश्रण बनाती हैं जिनको नग्न आंखों से नहीं देखा जा सकता तो इतने छोटे होते हैं कि उनसे इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप की सहायता से देखा जा सकता है पार्टिकुलेट मैटर का प्राइमरी स्रोत ऑटोमोबाइल्स का उत्सर्जन धूल और खाना पकाने का धुआं शामिल है और इनका सेकेंडरी स्रोत द्वितीय स्रोत जो है सल्फर डाइऑक्साइड नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसी रासायनिक कैसे हैं यह कड़ा में मिश्रित हो जाते हैं और इन को प्रदूषित करते हैं इनके अलावा जंगल की आग लकड़ी जलने वाले स्टोर एयर कल्चर भरने उद्योग का धुआं निर्माण कार्य से धूल वायु आदेश का स्रोत है जो कि हमारे स्वास्थ्य को बहुत प्रभावित करती हैं सांस लेने के दौरान यह हमारे फेफड़े में चले जाते हैं जिससे खांसी अस्थमा के दौरे पड़ सकते हैं हाई ब्लड प्रेशर उच्च रक्तचाप दिल का दौरा स्ट्रोक की बीमारी गंभीर बीमारियों का खतरा बन जाता है हवा में पार्टिकुलेट मैटर 2.5 की मात्रा 60 माइक्रोग्राम क्यूबिक मीटर होनी चाहिए एवं पार्टिकुलेट मैटर 10 की मात्रा 100 माइक्रोग्राम क्यूबिक मीटर होनी चाहिए।

ब्यूरो।
और नया पुराने