आज़मगढ़।
रिपोर्ट: गौरव सिंह राठौर
आजमगढ़ 22 सितम्बर-- माननीय राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली व माननीय उ0प्र0 राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ एवं माननीय जनपद न्यायाधीश/ अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण आजमगढ़ के निर्देशों के अनुपालन में आज नवनियुक्त पराविधिक स्वयं सेवकों के एक दिवसीय प्रशिक्षण जनपद न्यायालय, आजमगढ़ के हाल ऑफ जस्टिस सभागार में किया गया।
कार्यक्रम का प्रारम्भ श्री जितेन्द्र कुमार सिंह मा0 जनपद न्यायाधीश, श्री अशोक कुमार-VII प्रधान न्यायाधीश पारिवारिक न्यायालय एवं उपस्थित सम्मानित न्यायिक अधिकारीगण एवं गणमान्य व्यक्तियों द्वारा दीप प्रज्जवलित कर किया गया। कार्यक्रम का संचालन श्री अभिनय सिंह, प्रधान मजिस्ट्रेट किशोर न्याय बोर्ड द्वारा किया गया।
माननीय जनपद न्यायाधीश जितेन्द्र कुमार सिंह ने बताया कि पीएलवी का कार्य समाज के उस वर्ग के लिए बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है, जो न्याय से वंचित है व निचले पायदान पर है। ऐसा व्यक्ति जो कार्यालयों में, थानों में न्यायालयों में जाते हुए भी घबराता है, उसके प्रार्थना पत्र को लिखने में या उसकी अन्य प्रकार से विधिक सहायता करने में पीएलवी को लगाया जाता है। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण का शुरुआत से ही लक्ष्य रहा है कि कानूनी रूप से वंचित व्यक्ति को न्यायालय के दरवाजे तक बिना रोक-टोक के पहुँचाया जायें। इसी बात को ध्यान में रखते हुये वर्ष 2009 से प्राधिकरण द्वारा पैरालीगल वालंटियर नाम की एक स्कीम शुरू की गयी, जिसके अन्तर्गत समाज के विभिन्न क्षेत्रों से आये लोगों का चयन करके उन्हें प्रशिक्षण दिया जाता है।
श्री सौरभ सक्सेना अपर जिला जज फास्ट ट्रैक कोर्ट नं0-02 ने बताया कि पैरालीगल वालंटियर का मतलब यह है कि एक ऐसा व्यक्ति जिसे कानून का बुनियादी ज्ञान तो है लेकिन वह पूर्ण रूप से वकील नहीं है। इनका मुख्य काम समाज और न्याय संस्थाओं के बीच की दूरी को कम करना है। श्री अशोक कुमार सिंह-IX सिविल जज सीडि ने अपने वक्तव्य में कहा कि पीएलवी का कार्य गरीब एवं न्याय से वंचित लोगों को न्यायालय तक पहुँचाना है।
सुश्री अनीता अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट आजमगढ़ ने पीएलवी प्रशिक्षण के सत्र के दौरान उपस्थित पराविधिक स्वयं सेवकों को उनके कर्तव्यों के बाबत जानकारी देते हुये यह बताया कि उन्हें किस तरह से कार्य करना है, काम करने के लिए उन्हें जिन स्थितियों का सामना करना होगा, उन स्थितियों के बारे में बताया गया।
श्री देवेन्द्र प्रताप सिंह सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने पीएलवी प्रशिक्षण के सत्र के दौरान उपस्थित पराविधिक स्वयं सेवकों को उनके कर्तव्यों के बाबत जानकारी देते हुये यह बताया कि उन्हें किस तरह से कार्य करना है। श्री अभिनय सिंह प्रधान मजिस्ट्रेट ने किशोर के अधिकारों व उनसे सम्बन्धित कानून के बारे में बताया।
प्रशिक्षण कार्यशाला के इस मौके पर श्री उमाशंकर त्रिपाठी तहसीलदार सदर, श्री विकास कटियार जेलर जिला कारागार, श्री महेन्द्र प्रसाद गुप्ता ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी, श्री अखिलानन्द पाण्डेय वरिष्ठ अधिवक्ता एवं कार्यक्रम में उपस्थित अन्य गणमान्य व्यक्तियों में पीएलवी को उनके कार्यों एवं अधिकारों के प्रति जागरूक किया।