शादी का झांसा, ब्लैकमेलिंग और धमकी जैसे गंभीर आरोपों वाला केस खारिज, अदालत बोली– जांच में नहीं मिली कोई खामी
आजमगढ़। नगर पंचायत जीयनपुर के पूर्व चेयरमैन हरिशंकर यादव पर लगे गंभीर आरोप आखिरकार अदालत की कसौटी पर टिक नहीं सके। आजमगढ़ के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने अपराध संख्या 632/2025 को खारिज करते हुए हरिशंकर यादव और उनके भाई कृपाशंकर यादव को सभी आरोपों से बरी कर दिया।
यह मामला उस समय सुर्खियों में आया था जब एक महिला ने शादी का झांसा देकर शारीरिक शोषण, वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने और जान से मारने की धमकी जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, कहानी का रुख बदलता गया।
सुनवाई के दौरान महिला ने अदालत में शपथ-पत्र दाखिल कर साफ कहा कि पूरा विवाद पैसों के लेन-देन का था। उनके मुताबिक उन्होंने कृपाशंकर यादव को एक लाख रुपये दिए थे, जो बाद में प्रशासनिक सहयोग से वापस मिल गए। महिला ने अदालत में स्पष्ट कहा कि अब उनका कोई विवाद नहीं है और वह किसी तरह की कार्रवाई नहीं चाहतीं।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सत्यवीर सिंह ने 17 फरवरी 2026 को सुनवाई के दौरान कहा कि विवेचना नियमानुसार हुई है और उसमें कोई त्रुटि नहीं पाई गई। वादिनी भी अंतिम रिपोर्ट से संतुष्ट हैं, इसलिए प्रार्थना-पत्र स्वीकार करते हुए मुकदमा निस्तारित कर दिया गया।
आरोपों के पीछे सियासी साया?
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि यह पूरा मामला जीयनपुर की राजनीति में सक्रिय हरिशंकर यादव की बढ़ती पकड़ को कमजोर करने की कोशिश भी माना जा रहा था। आरोपों के चलते उनकी छवि को चोट पहुंचाने का प्रयास हुआ, लेकिन अदालत के फैसले ने पूरे मामले की दिशा ही बदल दी।
फैसले के बाद हरिशंकर यादव ने कहा,
“सच्चाई को देर लग सकती है, लेकिन वह सामने जरूर आती है। मैंने हमेशा जनता की सेवा की है और आगे भी करता रहूंगा।”
समर्थकों में खुशी
अदालत का फैसला आते ही जीयनपुर क्षेत्र में उनके समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। कई लोगों ने इसे “सत्य की जीत” बताते हुए कहा कि अब पूर्व चेयरमैन पूरी तरह बेफिक्र होकर फिर से जनसेवा और विकास कार्यों में जुट सकेंगे।
एक चर्चित मुकदमे का अंत… और अदालत का साफ संदेश — आरोप चाहे कितने भी बड़े हों, फैसला सबूत से ही होता है।