श्रावस्ती।
श्रावस्ती ब्यूरो प्रदीप गुप्ता की रिपोर्ट-
श्रावस्ती। भिनगा के होलिका मन्दिर स्थल पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के द्वारा गुरू दक्षिणा का कार्यक्रम सम्पन्न हुआ जिसमें अपना बौद्धिक देते हुए नगर संघ चालक एवं सरस्वती शिशु मन्दिर के प्रबन्धक राम निवास गुप्त ने संघ के विषय में बताते हुए कहा कि सन् 1925 में विजयदशमी के दिन नागपुर में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की स्थापना डा0 हेडगेेवार ने की थी। उसके बाद संघ नागपुर से पूरे महाराष्ट्र प्रांत मे तथा अन्य प्रांतो मे जनपदो में पहुच गया। संघ अपने हिन्दू समाज को संगठित करने का कार्य कर रहा है। सन् 1925 मे यह भारत देश अंग्रेजो के अधिकार मे था उस समय जहां हिन्दू समाज मे बिखराव, स्वार्थपरता और लोलुब्ता के कारण सारा हिन्दू समाज बिखरा था उस समय यहां बहादुर शाह जफर का शासन था उसे अंग्रेजो ने कैद कर रखा था।संगठन की स्थापना तथा संघ को आगे बढाने का कार्य पूज्यनीय डा0 साहब ने किया उन्होने कि स्वतंत्रता के बाद भी कही यह देश पुनः परितंत्र न हो जाये यही सोचकर उन्होने संघ की स्थापना की। आज राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ सम्पूर्ण भारत में एक बडे वटवृक्ष के रूप मे फैला है। डा0 साहब ने सोचा कि इस संघ का नेतृत्व मेरे न रहने पर कौन करेगा। उन्होने सोचा कि व्यक्ति में विकार आ सकता है। व्यक्ति की मृत्यु हो सकती है। इसलिए उन्होने भारत मे आदि काल से चले आ रहे परमपूज्य भगवाध्वज को अपना गुरू माना। ध्वज का रंग केसरिया होता है अग्नि की लव भी केसरिया रंग की होती है जो शुद्ध होती है जो त्याग का प्रतीक है। उन्होने कहा कि आज 70 वर्षो बाद भी राम जन्म भूमि अयोध्या, कृष्ण जन्म भूमि मथुरा तथा भगवान भोलेनाथ का पावन स्थल बाबा विश्व नाथ मन्दिर को आज तक हम मुक्त नही करा पायें। हमें हिन्दू समाज को जगाने तथा हिन्दू संस्कृति की रक्षा करने के लिए कृतसंकल्प होना चाहिए। हम हिन्दू समाज को संगठित करें और हिन्दू धर्म की रक्षा करे। आज हिन्दू मठ मन्दिरो की दशा बहुत दयनीय है आज अपने देश के लोग ही अपना विरोध कर रहे है। हमारे बीच आस्तीन के सांप रहते है। उनसे सावधान रह कर देश की रक्षा करने का संकल्प लेना चाहिये। हम अपना दैनिक जीवन परिवार के कार्यो में लगाये रखते है। हम धर्म और समाज के प्रति समर्पित हो हम अपने दयित्वो को भूल गये है देश समाज और धर्म के प्रति किया गया कार्य अमरत्व प्रदान करता है। हम अपना कुछ धन समाज और देश के हित मे खर्च करे। गुरू दक्षिणा कार्यक्रम से पूर्व परम पूज्य भगवाध्वज लगाया गया। डा0 हेडगेवार तथा गुरू जी का चित्र लगाया गया। कार्यक्रम मे उपस्थित सभी स्वयं सेवको ने क्रमशः भगवाध्वज तथा गुरू जी के चित्र पर पुष्पार्चन तथा नमन करते हुए अपनी गुरू दक्षिणा दी। तत्पश्चात् कार्यक्रम का समापन पर संघ के गीत नमो वत्सले मात्रभूमे त्वदर्थे से कार्यक्रम का समापन हुआ।
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ब्यूरो श्रावस्ती