जालौन।
रिपोर्ट: अरुण कुमार मिश्रा
जालौन: एक ओर केंद्र व राज्य सरकार सबका साथ सबका विकास को प्रतिबद्ध है। वहीं दूसरी ओर प्रधान एवं लेखपाल जनता का शोषण करके सरकार की नकारात्मक छवि प्रस्तुत करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। ऐसा ही नजारा महेवा विकासखंड के ग्राम मंगरौल में देखने को मिल रहा है।
यहां सरकारी योजना के नाम पर केवल खानापूर्ति एवं शोषण किया जा रहा है। मंगरौल गांव के निवासी विनोद सिंह पुत्र माता प्रसाद ने मुख्यमंत्री पोर्टल में ऑनलाइन शिकायत दर्ज करके अवगत कराया कि पिछले वर्ष आई यमुना नदी की भीषण बाढ़ में खेतों की फसल बर्बाद हो गई एवं काफी हानि हुई।
लेखपाल के द्वारा बाढ़ पीड़ित किसानों का ब्यौरा सरकार को मुआवजे के लिए भेजा गया। लेखपाल के चहेते किसानों को मुआवजा मिल चुका है। लेकिन लेखपाल से वैचारिक मतभेद होने के कारण विनोद सिंह मुआवजा नहीं मिला है। किसान सम्मान निधि की एक भी किश्त नहीं मिल पाई है। पिछले वर्ष घर में आगजनी की घटना हो गई थी। क्षेत्रीय लेखपाल द्वारा स्थलीय निरीक्षण किया गया था। जिसमें परिवार के कपड़े, अनाज एवं कीमती सामान भी जल गया था। निरीक्षण करने के बाद मुआवजा दिलाने के नाम पर क्षेत्रीय लेखपाल द्वारा पीड़ित विनोद सिंह से ₹5000 रिश्वत की मांग की गई थी। रुपए ना होने पर प्रार्थी ने असमर्थता दिखाई। तभी से लेखपाल रंजिश मानने लगा था। विनोद सिंह के दरवाजे पर जलभराव की स्थिति है। नाली निर्माण नहीं होने एवं सफाई कर्मी की उपेक्षा एवं अनुपस्थिति होने के कारण सारे गांव में गंदगी का अंबार देखा जा सकता है। गांव के मुख्य रास्तों पर भी तकरीबन 2 फीट कीचड़ जम चुका है एवं पैदल रास्ता निकलना दूभर है। सफाई कर्मियों को प्रधान से सांठगांठ के चलते नियमित मासिक मानदेय प्राप्त हो रहा है। जबकि ग्रामीणों ने सफाईकर्मीयो को सालों से देखा भी नही। प्रधानमंत्री आवास योजना भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है। किसी परिवार में 4 सदस्यों को आवास योजना का लाभ मिल जाता है तो धीरज प्रजापति, देव नारायण प्रजापति, देवेंद्र शर्मा जैसे निर्धन व्यक्ति दर-दर ठोकरें खाने को मजबूर है। गोयलाल पाल एवं प्रमोद पाल जैसे कई लोग हैं जिनके नाम 2002 की बीपीएल सूची में है लेकिन अभी तक आवास नहीं मिल पा रहा है। सरकारी तंत्र से मजबूर यह व्यक्ति अपनी किस्मत को कोस रहे हैं एवं बरसात में पूरी रात जाग जाग कर काट रहे हैं। संपूर्ण ग्राम खुले में शौच मुक्त घोषित होने के बाद भी कई शौचालय की दूसरी किस्त नहीं मिलने से शौचालय अधूरे पड़े हैं। अतबल कुशवाहा, वीरेंद्र सिंह उर्फ डॉक्टर आदि कई नाम हैं। जिनके खाते में दूसरी किस्त का भुगतान नहीं हुआ है। गौ शाला की व्यवस्था भी पूर्ण रूप से भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है। लगभग 170 पंजीकृत गायों में एक भी गाय गौशाला में दिखाई नहीं देती है। जिम्मेदार मलाई खा कर चुपचाप यह देख रहे हैं। संपूर्ण राष्ट्र का पेट भरने वाला अन्नदाता भी सरकारी सुविधा लेने के लिए दर-दर भटक रहा है। किसान सम्मान निधि की किस्त हो या सूखा, बाढ़ मुआवजा की किस्ते गांव का असहाय किसान मुआवजा संबंधी कागजात लिए सरकारी दफ्तरों के धक्के खाने को मजबूर हैं। विधवा एवं वृद्धावस्था पेंशन के लिए भी अल्प शिक्षित ग्रामीण ग्राम प्रतिनिधियों की तरफ कातर दृष्टि से देख रहा है। प्रशासन को बार-बार समाचार एवं शिकायती पत्रों के द्वारा अवगत कराने का प्रयास किया गया है। लेकिन शायद लाचार असहाय गरीब किसानों के भाग्य में ही शोषण लिखा हुआ है।