आज़मगढ़।
रिपोर्ट: वीर सिंह
आजमगढ़ 26 सितम्बर 2020-- मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डाॅ0 वीके सिंह ने पशुपालक/किसान भाईयों को अवगत कराया है कि खुरपका-मुंहपका बीमारी विषाणुजनित रोग है, जिससे सिर्फ टीकाकरण करवाकर पशुओं को बीमारी से बचाया जा सकता है। एफएमडी बीमारी में संक्रमकता शत प्रतिशत होती है, परन्तु मृत्यु कम होती है एवं आर्थिक नुकसान बहुत ज्यादा होता है।
उन्होने बताया कि इस बीमारी के प्रमुख लक्षणों में बीमारी का प्रारम्भ बीमार पशुओं के सम्पर्क एवं पशुओं के जूठन से होता है जिसमें बुखार बहुत ज्यादा होता है। पशु चारा खाना छोड़ देता है बाद में खुर के बीच में घाव एवं मुँह में छाले पड़ जाते हैं जिससे पशु लम्बे समय तक चारा नहीं खा पाता है, जिसके कारण पशुओं का उत्पादन बहुत कम हो जाता है। दूध पीते बच्चों की मृत्यु शत प्रतिशत होती है, क्योंकि दूध से बच्चों में बीमारी फैलती है तथा बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित नहीं हो पाती है। मादा पशुओं में बीमारी के ठीक होने के बाद बॉझपन की समस्या आती है तथा नर पशुओं में प्रजनन की क्षमता न के बराबर रह जाती है। एफएमडी रोग से ग्रसित पशु का मांस खाने योग्य नहीं रहता है, जिससे मांस का निर्यात प्रभावित होता है, जिसके कारण प्रदेश एवं देश को आर्थिक नुकसान होता है। एफएमडी बीमारी तेजी से बीमार पशुओं के सम्पर्क में आने से फैलती है, जिसके कारण दूसरे प्रदेशों में पशुओं का यातायात बन्द हो जाता है, जिसके कारण आर्थिक नुकसान व्यापारियों को उठाना पड़ता है।
उपरोक्त से स्पष्ट है कि नुकसान से बचने हेतु एफएमडी रोग का टीकाकरण वर्ष में दो बार अवश्य करा दें। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि 26वॉ चरण एफएमडी टीकाकरण अभियान दिनांक 01 अक्टूबर 2020 से प्रारम्भ हो रहा है। यह टीकाकरण पशु पालक के द्वार पर निःशुल्क लगाया जाता है।
