Breaking News

राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस मना गर्भवती की करें खास देखभाल, जच्चा-बच्चा रहेंगे खुशहाल-सीएमओ

आज़मगढ़।

रिपोर्ट: वीर सिंह

आजमगढ़ – 11 अप्रैल 2022: जिले में सोमवार को  “राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस”  मनाया गया। इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ आई. एन. तिवारी ने कहा कि मातृत्व स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने पर सरकार व स्वास्थ्य विभाग का पूरा जोर है। इसके तहत हर जरूरी बिन्दुओं का खास ख्याल रखते हुए जच्चा-बच्चा को सुरक्षित बनाने की हरसंभव कोशिश की जा रही है ताकि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को न्यूनतम स्तर पर लाया जा सके। समुदाय में इस बारे में पर्याप्त जागरूकता लाने और इसके लिए मौजूद हर सुविधाओं का लाभ उठाने के बारे में जागरूकता के लिए ही हर साल 11 अप्रैल को सुरक्षित मातृत्व दिवस मनाया जाता है |
सीएमओ डॉ. आई. एन. तिवारी ने कहा कि गर्भवती के स्वास्थ्य की देखभाल और प्रसव संबंधी जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से कस्तूरबा गांधी जयंती (11 अप्रैल) को हर साल राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस के रूप में मनाया जाता है |  जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है ताकि गर्भवती  के पोषण पर सही ध्यान दिये जाने की जानकारी दी जा सकें |  उन्होंने कहा कि मातृ- शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए सरकार कई योजनाए  चला रही है  जिनमें प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएएमए) भी शामिल है| इसके तहत लाभार्थियों को हर महीने की नौ तारीख को प्रसव पूर्व देखभाल हेतु नि:शुल्क चिकित्सकीय सेवा, जांच व दवाओं सहित अन्य सुविधा  प्रदान किए जाते है | किसी माह कि नौ तारीख को रविवार या राजकीय अवकाश होने की स्थिति में अगले कार्य दिवस पर कार्यक्रम आयोजित किया जाता है | इन योजनाओं से न  केवल गर्भवती में जागरूकता आयी है | बल्कि उनकी उचित देखभाल व पोषण संबधित जरूरतों को लेकर भी परिवार के सदस्य संवेदनशील हुए है| जिस वजह से जिले में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी आई है | उन्होने बताया कि प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है| जिसके अन्तर्गत प्रथम बार गर्भवती होने वाली महिलाओं को उचित खान पान एवं पोषण हेतु पांच  हजार रूपये की धनराशि तीन किश्तों में दी जाती है। इस योजना से अधिक से अधिक पात्र लाभार्थियों को लाभान्वित किये जाने एवं उनको योजना के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से मातृ वंदना सप्ताह मनाया जाता है,  ताकि प्रथम बार गर्भधारण करने वाली महिलाएं भारत सरकार की ओर से गर्भावस्था के दौरान मिलने वाली पांच  हजार रूपये की धनराशि का लाभ प्राप्त कर सके। 
जिला महिला चिकित्सालय की मुख्य अधीक्षिका व स्त्रीरोग विशेषज्ञ डॉ. मंजुला सिंह ने  बताया कि सुरक्षित  एवं प्रसव पश्चात जच्चा बच्चा स्वस्थ रहें | जिसके लिए गर्भाधान की संभावना का पता चलते ही,गर्भवती को प्रसव पूर्व देखभाल के लिए पहली बार स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर नाम दर्ज कराना चाहिए| ताकि नियमित जांच व उच्च जोखिम युक्त गर्भवस्था से चिन्हित लाभार्थी को प्रसव पूर्व जाँच (एएनसी) कर मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लायी जा सकती है। उन्होंने कहा कि गर्भाधान की प्रथम तिमाही अथवा 12 सप्ताह से पहले स्वास्थ्य केन्द्र पर जाना चाहिए, ताकि गर्भवती को स्वास्थ्य की जानकारी व नियमित चिकित्सा जांच व पोषण संबधित जानकारी मिल सके  | गर्भावस्था के दौरान उचित देखभाल के साथ ही गर्भवती को दिनभर में कम से कम 5 बार भोजन करना चाहिए, जिसमें तीन बार मुख्य भोजन और दो बार पौष्टिक नाश्ता होना चाहिए | प्रतिदिन के आहार में  पौष्टिक भोजन शामिल करना चाहिए। गहरे रंग की हरी पत्तेदार सब्जी, विटामिन सी युक्त खाद्य पदार्थ, साबूत दालें और फलियां, अनाज जैसे बाजरा ज्वार रागी और दूध या दूध से बानी चीज़ें अवश्य ही खानी चाहिए | 
डॉ. मंजुला सिंह ने बताया कि आयरन की कमी से महिला को थकान, चक्कर,समय से पहले प्रसव और जटिल प्रसव की संभावना बढ़ जाती है| आयरन की कमी गर्भ में पल रहे बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास में बाधक बन सकती है | आयरन की कमी को पूरा करने के लिए आयरन युक्त भोजन के साथ प्रतिदिन आयरन की गोली खाने की जरूरत होती है। दूसरी और तीसरी तिमाही में प्रतिदिन एक आयरन (आईएफए) टैबलेट का सेवन करें। इसे बच्चे के जन्म के छह महीने बाद तक जारी रखें| सभी गर्भवती यहां तक कि जिन्हें एनीमिया नहीं है उन्हें भी रोजाना लाल आयरन टैबलेट का सेवन करना चाहिए | लाल आयरन की गोलियां न केवल एनीमिया को कम करती हैं बल्कि भ्रूण के मस्तिष्क के विकास के लिए भी फायदेमंद होती हैं | उन्होंने कहा कि छह माह तक के शिशु के लिए स्तनपान तथा छह माह से दो वर्ष तक की आय़ु के बच्चों के लिए स्तनपान के साथ-साथ पूरक आहार की महत्ता, खून की कमी से होने वाली परेशानियों तथा इससे बचाव के बारे भी जागरूक किया जा रहा है|

और नया पुराने