Breaking News

कुष्ठ उन्मूलन के लिए जागरूकता अभियान 13 फरवरी तक हाथ मिलायें।

आज़मगढ़।

रिपोर्ट: वीर सिंह

कुष्ठ मिटायें प्रभावित व्यक्तियों से न करें भेदभाव

आइए कुष्ठ से लड़े और कुष्ठ को इतिहास बनाएं- सीएमओ 

आजमगढ़- 30 जनवरी 2023: जिले में सोमवार को राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम के तहत स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान की शुरुआत हुई । यह अभियान 13 फरवरी तक चलेगा । महात्मा गांधी जी की पुण्यतिथि पर सोमवार को जिला कुष्ठ कार्यालय में विभाग के सभी कर्मचारियों ने श्रद्धांजलि अर्पित कर शपथ ली । मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ आई एन तिवारी ने कहा कि कुष्ठ रोगियों को खोजकर उनका इलाज उपलब्ध कराने और कुष्ठ रोग से मुक्त कराने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे| प्रभावित व्यक्तियों से भेदभाव को समाप्त करने एवं उनको समाज की मुख्य धारा में लाने के लिए पूर्ण योगदान करेंगे| उन्होंने सभी को आगे आकर  कुष्ठ से लड़ने  और कुष्ठरोग को इतिहास बनाने का आह्वान किया |
जिला कुष्ठ रोग अधिकारी डॉ सीपी गुप्ता ने बताया कि यह रोग माइकोबैक्टीरियम लैप्री नामक जीवाणु से होता है और रोग साथ खाने, उठने या बैठने से नहीं फैलता है| यह न आनुवांशिक एवं छुआछूत रोग है और न ही यह लाइजा बीमारी है| बल्कि समय से जांच और उपचार कराने से दिव्यांगता से भी बचा जा सकता है| इस दौरान जो मरीज पहले से इलाज पर है या ठीक हो चुके है उनकी जांच एवं लक्षण वाले मरीजों की पहचान करने के लिए आशा,आशा संगिनी घर-घर जाकर सर्वेक्षण करेंगी| इसके लिए विभाग ने ग्रामीण व शहरी क्षेत्र के लिए 4136 टीमें तैयार की हैं । इसमें घर के हर सदस्य की जांच भी की जायेगी| जांच में लक्षण पाये गए रोगियों को तत्काल उपचार पर रखा जाएगा| नियमित रूप से पीबी (पासी बैसलरी) के लिए कम से कम 6 से 9 माह और एमबी ( मल्टी बैसलरी) रोगी के लिए 12 से 18 माह तक इलाज किया जाता है|  कुष्ठ रोगियों को पैर सही रखने के लिए एमसीआर चप्पल तथा हाथ-पैर की देखभाल के लिए सेफ्टी किट, काटन, पट्टी, बी कामप्लेक्स, कैल्शियम की गोलियां दी जाती है|
जिला कुष्ठ रोग पर्यवेक्षक अधिकारी रामचंद्र चौहान ने बताया कि वर्तमान में  जिले में 172 कुष्ठ रोगियों का उपचार चल रहा है जिसमें से 74 पीबी (पासी बैसलरी) एवं 98 एमबी (मल्टी बैसलरी) रोगी हैं| इस वर्ष अब तक 54 पी.बी. और 100 एम.बी. रोगी ठीक हो चुके हैं|
उन्होंने बताया कि कुष्ठ की बीमारी हवा में मौजूद बैक्टीरिया  के माध्यम से फैलती है| खांसने, छींकने से माइक्रो बैक्टीरियम लेप्री जीवाणु मनुष्य के शरीर में प्रतिरोधक क्षमता कम होने पर हवा में मौजूद बैक्टीरिया के साथ सक्रिय कर खुद को विकसित कर लेता है जिससे वह भी संक्रमित हो जाता है| इसलिए जन समुदाय को जागरूक किया जा रहा है कि घर के आस-पास कोई व्यक्ति जिसको हाथ पैर एवं शरीर के अन्य भागों पर चमडी़ तांबे कलर व सुन्नपन होना, नसों में झनझनाहट या मोटापन हो तो ऐसी स्थिति में बिना देरी किए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए| अगर कुष्ठ रोग का पता शुरुआती चरण में चलता है, तो रोग पर विजय पाना संभव हो होता है|
लक्षण - हाथ-पैर की उंगलियां टेढ़ी-मेढ़ी हो सकती हैं| मांसपेशियां में कमजोरी आ सकती है| शरीर पर हल्के तांबे के रंग जैसे चकत्ते हो जाना, शरीर का कोई भी दाग धब्बा जिस पर सुन्नपन हो जाना, उसमें खुजली न हो, पसीना न आता हो, सुई लगने पर दर्द महसूस न होना, हथेली अथवा पैर के तलवे में भी सुन्नपन हो तो कुष्ठ की जांच अवश्य कराएं|
बचाव - कुष्ठ रोग से बचाव के लिए हाथ पैर पर सुन्न होने पर जलने, चोट घाव से बचें। कुष्ठ रोग को फैलने से रोकने व निदान के लिए जल्द से जल्द डॉक्टर की निगरानी में रहकर पूर्ण इलाज करना चाहिए|

और नया पुराने