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जनपद में अवैधरूप से चल रहे हैं नर्सिंगहोम, शासन प्रशासन मौन।

मऊ।

बगैर पंजीकृत अस्पतालों का लंबा मकड.जाल।

मऊ। प्रदेश में सत्ता बदली, सरकार बदली, निजाम बदल गये। सुबे में एक बडे बहुमत से आयी भारतीय जनता पार्टी की योगी सरकार प्रदेश में भ्रष्टाचार
मुक्त सरकार करने के चाहे लाख कोशिशें, कवायदे कर लें लेकिन आज भी सरकार बनने के लगभग तीन महीने बाद भी प्रदेश के किसी भी क्षेत्र में कहीं कोई बदलाव नजर नहीं आ रहा हैं। हर तरफ पूर्व सरकार के भाति ही लूट मची है, चहुओर भ्रष्टाचार है जनता त्राहि-त्राहि कर रही है। शासन के दिशा निर्देशों पर
मिट्टी पलीता लगाते हुए प्रशासनिक अमलों ने चुप्पी साध रखी है। ऐसे में एक बारगी लोगों का विश्वास योगी सरकार से डिगने लगा है। अब हम बात करते हैं जनपद में स्वास्थ्य विभाग के मकड.जाल में चल रहे बगैर पंजीकृत दर्जनों नर्सिंग होम जो भ्रष्टाचार के मुख्य केन्द्र बने हुये हैं। इनके संचालन में विभागीय अधिकारी व कर्मचारी मेहरबान नजर आते हैं। जिनके संरक्षण में
ये भ्रष्टाचार के केन्द्र अस्पताल बखुबी संचालित किये जा रहे हैं।
सुत्रों के अनुसार भ्रष्टाचार के चलते स्वास्थ्य विभाग में दर्जनों
नर्सिंग होम वगैर पंजीकृत हैं या पंजीकृत होने के बाद भी विभिन्न कारणों से नवीनीकरण नहीं हो पा रहे हैं या पूर्णतया मनकविहीन रूप में खुलेआम संचालित किये जा रहे हैं। जो आमजन मानस के जीवन से लगातार खेलवाड. कर
उनका आर्थिक मानसिक व दैहिक शोषण कर रहे हैं। जिनकी संख्या सैकड़ो केआंकडों से ऊपर जा रही है। चर्चा यह भी है कि ये अवैधरूप से संचालित होने वाले नर्सिंग होम जिनसे संबंधित विभागों के अधिकारी, कर्मचारियों द्वारा एक मोटी रकम वसूली जाती है। जिसका बंदरबाट आला अधिकारियों तक किये जाते
है। ऐसे में भला इन जनहित से जुड़े मामलों पर ये बंदरबाटी अधिकारी भला क्या संज्ञान लेगें। जनपद में ऐसा ही कुछ हाल इस विभागं के कृपा से चलने वालें डाइग्नोस्टिक सेंटर व पैथोलाजी का भी है। जहाँ कागजों में तो
रेडियोलाजिस्ट व एलटी रखा जाता है पर मौके पर बहुतायत ऐसा नहीं होता जहाँ अप्रशिक्षित लोगों द्वारा जांच के नाम पर मोटी रकम वसूली जाती है। वहीं इन डाइग्नोस्टिक सेंटर पर गैर कानूनी रूप से भ्रुण लिंग की जांच भी की
जाती है।इन्हीं डाइग्नोस्टिक सेंटरों से जांच में आयी भ्रुण लिंग के
रिपोर्ट पर ही  जनपद के कई अवैध अस्पतालों में गर्भपात तक कराकर इसके एवज में भी मोटी रकम वसूली जाती है और यह धंधा बदस्तूर जारी है। जो कि पुर्णतया गैर कानूनी है। अब इतना सब कुछ जानने के बाद जब हम इसकी चर्चा आम लोगों में करते है। तो उनका सवाल आता है कि क्या जनपद में इतने सारे अवैध कारनामें सरेआम बीच बाजारों में
किये जाते हैं तो क्या इसमें बिना आला अधिकारियों के मिली भगत के ही संभव हैं..?
अब यदि हम बात करें कि इनकी मिली भगत नहीं हैं तब फिर आज तक ऐसे रसूखदार भ्रष्टाचारी लोगों पर विभागीय कार्यवाही क्यों नहीं की जाती है?ये बहुत  सारे यक्ष प्रश्न है जो स्वास्थ्य विभाग और जनपद के प्रशासनिक विभाग की पोल खोल देने के लिए काफी है ।

रिपोर्ट-  बिपिन दुबे
ब्यूरो मऊ

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