आज़मगढ़।
रिपोर्ट: शैलेन्द्र शर्मा
आजमगढ़। भारतीय जनता पार्टी नगर इकाई द्वारा अपने कार्यालय पर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महानायक नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125 वीं जयंती मनाई गई।
इस दौरान भाजपाजनों द्वारा नेता जी के चित्र पर पुष्पाजंलि अर्पित कर उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर चर्चा किया गया।
नेता जी को याद करते हुए नगर अध्यक्ष शैलेंद्र अग्रवाल ने बताया कि भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के अग्रणी तथा सबसे बड़े नेता जी सुभाष चन्द्र बोस थे। उन्होंने द्वितीय वियुद्ध के दौरान, अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने के लिये, उन्होंने जापान के सहयोग से आजाद हिन्द फौज का गठन किया और उनके द्वारा दिया गया जय हिंद का नारा भारत का राष्ट्रीय नारा बन गया है। तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आजादी दूंगा का नारा आज भी प्रासंगिक है। कुछ इतिहासकारों का मानना है कि जब नेता जी ने जापान और जर्मनी से सहायता लेने का प्रयास किया था, तो ब्रिटिश सरकार ने अपने गुप्तचरों को 1941 में उन्हें खत्म करने का आदेश दिया था। इतना ही नहीं नेता जी ने 5 जुलाई 1943 को सिंगापुर के टाउन हाल के सामने सुप्रीम कमाण्डर के रूप में सेना को सम्बोधित करते हुए दिल्ली चलो! का नारा दिया। इसके साथ ही 21 अक्टूबर 1943 को सुभाष बोस ने आजाद हिंद फौज के बतौर सर्वोच्च सेनापति स्वतंत्र भारत की अस्थायी सरकार बनायी जिसे जर्मनी, जापान, फिलीपींस, कोरिया, चीन, इटली, मान्चुको और आयरलैंड सहित 11 देशो की सरकारों ने मान्यता दी थी। 1944 को आजाद हिंद फौज ने अंग्रेजों पर दोबारा आक्रमण किया और कुछ भारतीय प्रदेशों को अंग्रेजों से मुक्त भी करा लिया। कोहिमा का युद्ध 4 अप्रैल 1944 से 22 जून 1944 तक लड़ा गया एक भयंकर युद्ध था। इस युद्ध में जापानी सेना को पीछे हटना पड़ा था और यही एक महत्वपूर्ण मोड़ सिद्ध हुआ।