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मजदूरी से मिशन तक: राजमणि यादव ने गरीब बच्चों के लिए खोला शिक्षा का द्वार


आज़मगढ़।

रिपोर्ट: वीर सिंह


📍 आज़मगढ़ | संवाददाता: आज़मगढ़ जनपद से एक प्रेरणादायक पहल सामने आई है, जो शिक्षा के बढ़ते व्यवसायीकरण के बीच एक सकारात्मक मिसाल बन रही है। कभी ईंट भट्ठों पर मजदूरी करने वाले राजमणि यादव आज सैकड़ों गरीब बच्चों के भविष्य को संवारने में जुटे हैं।

दुर्वासा धाम के समीप वनहर मयचक गजड़ी गांव में स्थापित ‘देवरती शिक्षण संस्थान’ आज क्षेत्र के गरीब और जरूरतमंद बच्चों के लिए उम्मीद का केंद्र बन चुका है। यहां करीब 400 बच्चों को निशुल्क शिक्षा दी जा रही है, जिससे अभिभावकों को बड़ी राहत मिली है।

संस्थान के संस्थापक राजमणि यादव का बचपन अभावों में बीता। कम उम्र में मां का निधन हो गया और आर्थिक तंगी के चलते उन्हें ईंट भट्ठों पर मजदूरी करनी पड़ी। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने शिक्षा नहीं छोड़ी और आगे चलकर लखनऊ में अपना व्यवसाय खड़ा किया।

आर्थिक रूप से सक्षम होने के बाद उन्होंने अपने गांव लौटकर समाज को कुछ लौटाने का निर्णय लिया। मां की स्मृति में उन्होंने अपना मकान और जमीन दान कर ‘देवरती शिक्षण संस्थान’ की स्थापना कराई। यहां आधुनिक सुविधाओं के साथ बच्चों को निःशुल्क शिक्षा दी जा रही है और जल्द ही सीबीएसई पैटर्न लागू करने की तैयारी है।

राजमणि यादव का कहना है कि उनका उद्देश्य गांव के बच्चों को बेहतर अवसर देना है, ताकि उन्हें वैसी कठिनाइयों का सामना न करना पड़े, जैसा उन्होंने किया। उनका सपना है कि गांव से भी आईएएस और आईपीएस अधिकारी निकलें।

संस्थान में पढ़ने वाले बच्चे भी इस पहल से उत्साहित हैं। छात्रा दीपिका गुप्ता ने बताया कि यहां मुफ्त शिक्षा मिल रही है और वह आगे चलकर आईपीएस बनना चाहती हैं। वहीं वैष्णवी मौर्य ने आईएएस बनने का लक्ष्य बताया।

संस्थान की शिक्षिका रागिनी राजभर के अनुसार, यहां गरीब बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने का प्रयास किया जा रहा है। सीबीएसई बोर्ड की तैयारी जारी है और बच्चों को समय-समय पर भोजन, फल और मिठाइयां भी उपलब्ध कराई जाती हैं।

राजमणि यादव की यह पहल न केवल शिक्षा के क्षेत्र में नई दिशा दे रही है, बल्कि यह भी साबित कर रही है कि दृढ़ संकल्प और सामाजिक सोच के साथ एक व्यक्ति पूरे समाज में बदलाव ला सकता है।

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