आज़मगढ़।
रिपोर्ट: वीर सिंह
आज़मगढ़: भारत को आजाद कराने के लिए ब्रिटिश हुकूमत के छक्के छुड़ाने वाले आजाद हिन्द फौज के संस्थापक नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की जयंती सगड़ी तहसील के लाटघाट आसपुर में क्रांति दिवस के रूप में श्रद्धापूर्वक मनाई गई।
इस मौके पर उनके चित्र पर माल्यार्पण कर उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला गया तथा उनके आदर्शों को आत्मसात करने पर बल दिया गया।
इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि- वे विश्व के महान क्रांतिकारियों में से एकमात्र जननेता थे। ब्रिटिश साम्राज्यवाद की गुलामी से देश को मुक्त करना, नयी समाजवादी क्रांति को पूरा करने का लक्ष्य था।
सुभाष पंथी रामनगीना सिंह पटेल ने कहा कि- नेता जी सुभाष चन्द्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को उड़ीसा के कटक में एक सम्पन्न बंगाली परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम जानकी नाथ बोस तथा मां का नाम प्रभावती था। 1921 में भारत की बढ़ती राजनीतिक गतिविधियों का समाचार पाकर बोस ने सिविल सर्विस की अपनी उम्मीदवारी छोड़कर भारत वापस लौट आए और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ जुड़ गए।
आजाद हिंद सरकार को पूर्वी एशिया के 11 राष्ट्रों ने मान्यता दिया था आजाद हिंद की स्थाई मान्यता विश्व विख्यात है। सुभाष चंद्र बोस जैसे क्रांतिकारी हम सबों के लिए हमेशा आदर्श हैं। इनके कार्यों से हम सभी को प्रेरणा लेनी चाहिए।
इस दौरान- मौके पर शिवबचन मास्टर, डॉ अखिलेश, बालचन्द, शैलेश सिंह, दीपांकर, सुभाष भारती, भजुराम सिंह, सीताराम यादव, जयराम सिंह आदि लोग मौजूद रहे।
कार्यक्रम के अंत में कार्यक्रम संयोजक सुभाष पंथी रामनगीना सिंह पटेल ने आए हुए सभी आगंतुकों का आभार जताया।



