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तिरंगे में लिपटा सैनिक का पार्थिव शरीर पहुंचा घर, मचा कोहराम।

आज़मगढ़।

रिपोर्ट: वीर सिंह

12 जुलाई को गश्त के दौरान हृदय गति रुकने से हुई थी मौत।

शहीद सैनिक को राजकीय सम्मान के साथ गार्ड आफ आनर दिया गया।।

वर्तमान समय में नायब सूबेदार के पद पर कार्यरत थे।

आज़मगढ़: सगड़ी तहसील क्षेत्र के गोपईपुर शेखमौली गांव निवासी शहीद का पार्थिव शरीर बृहस्पतिवार को दिन मे 12:00 बजे असम राइफल्स के जवान तिरंगे में लिपटा लेकर घर पहुंचे तो पूरा हुजूम उमड़ पड़ा। आसपास के गांव के लोग व परिजनों ने सैकड़ों की संख्या में नम आंखों से विदाई दी।
 नायब तहसीलदार मयंक मिश्रा इमलिया चौकी इंचार्ज भगत सिंह , महाप्रधान जनार्दन राव अर्जुन कुमार , रामवृक्ष गौतम, प्रधान प्रतिनिधि राजेंद्र यादव ने शहीद के पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर कर श्रद्धांजलि दी। 
गोपईपुर गांव निवासी बहादुर राम 58 वर्ष पुत्र दलसिंगार राम  असम राइफल- 44 सेना में 15 मई वर्ष 1985 में मेडिकल क्षेत्र में फार्मासिस्ट के रूप में भर्ती हुए  तब से देश की सेवा में अनवरत
तैनात रहे वर्तमान समय में तिम्मालौंग जनपद के मणिपुर में असम राइफल की टुकड़ी के साथ 12 जुलाई  सोमवार को 2:00 बजे हृदय गति रुकने से उनकी मौत हो गई। 
असम राइफल के तिरंगे में शरीर को लपेटकर उनके पार्थिव शरीर को असम राइफल के एक दर्जन जवान लेकर उनके गृह जनपद आजमगढ़ के गोपईपुर  गांव में सुबह 11:00 बजे पहुंचे जहां  नायब तहसीलदार सगड़ी मयंक मिश्रा ने राजकीय सम्मान के साथ पुष्प चक्र अर्पित किया‌। इस दौरान सैकड़ों की संख्या में स्थानीय गांव के लोग मौजूद रहे जो नम आंखों से शहीद के पार्थिव शव यात्रा में सम्मिलित हुए और भावभीनी श्रद्धांजलि दी। घर से जब सैनिक बहादुर राम की शव यात्रा निकल रही थी तब बहादुर राम अमर रहे अमर रहे के नारे लग रहे थे। असम राइफल के जवान  पार्थिव शरीर को लेकर उनके परिजनों के साथ दोहरीघाट स्थित मुक्तिधाम पर पहुंच कर अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान मऊ जिले के दोहरीघाट स्थित मुक्ति धाम पर सैनिकों द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। सैनिक के बड़े पुत्र दीपक राम ने मुखाग्नि दी। शहीद के पास दो पुत्र और दो पुत्रियां हैं पूर्व में उनकी पत्नी मंजुला की मौत सन 2015 में हो चुकी है अप्रैल माह में वे अपने पुत्र दीपक की शादी में सम्मिलित होने के लिए घर पर आए हुए थे। जून में छुट्टी समाप्त होने के पश्चात पुनः अपने तैनाती स्थल पर चले गए।
अभी उनके छोटे पुत्र राहुल का विवाह नहीं हुआ है । उनकी दो पुत्रियां रंजना, अंजू, दीपक, राहुल, का रो-रोकर बुरा हाल रहा। 
वही ग्राम प्रतिनिधि राजेंद्र यादव,  जिला पंचायत सदस्य जनार्दन राव, अर्जुन कुमार रामवृक्ष गौतम पूर्व बीडीसी आशीष कुमार सहित जनप्रतिनिधि व सैकड़ों की संख्या में  ग्रामीण पुरुष , महिलाएं मौजूद रहे । वही सैनी की एक झलक पाने के लिए लोग बेताब रहे।

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