आज़मगढ़।
रिपोर्ट: वीर सिंह
आज़मगढ़: जनपद की साहित्यिक पहिचान और स्त्री विमर्श लेखिका डॉ0 गीता सिंह को उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान लखनऊ द्वारा उनके साहित्यिक अवदान पर 'मदन मोहन मालवीय विश्वविद्यालय स्तरीय सम्मान 'मिला है।इस सम्मान में इन्हें 100000/-(एक लाख रुपये)की राशि पुरस्कार स्वरूप दी जाएगी।
ज्ञातव्य है कि डॉ0 गीता सिंह वर्तमान में डी0ए0वी0पी0जी0 कालेज,आजमगढ़ में एसोसिएट प्रोफेसर एवं अध्यक्ष स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग के पद को कार्यरत हैं।
इन्हें उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट साहित्यिक योगदान से उत्तर प्रदेश शासन द्वारा 2017 में "शिक्षक श्री"सम्मान मिल चुका है जो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उच्च शिक्षा मंत्री डॉ0 दिनेश शर्मा द्वारा दिया गया। भारतीय डाक विभाग द्वारा आयोजित "प्रिय बापू आप अमर हैं"पत्र लेखन प्रतियोगिता में राष्ट्रीय स्तर पर द्वितीय पुरस्कार प्राप्त हो चुका है। महत्त्वपूर्ण आलोचना पुस्तक'प्रसाद साहित्य में स्त्री चेतना'को डॉ0रामविलास शर्मा पुरस्कार प्राप्त हो चुका है। इनकी कुल 19 पुस्तकें प्रकाशित हैं। अब तक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 06 दर्जन से ज्यादा शोध-पत्र विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं/शोध जर्नल/पुस्तक में प्रकाशित हो चुके हैं। 07 पुस्तकें केन्द्रीय विश्वविद्यालय के दूरस्थ शिक्षा पाठ्यक्रम में और 03 पुस्तकें राज्य स्तरीय विश्वविद्यालय पाठ्यक्रम में अनुमोदित हैं। इनके सम्पादन में आजमगढ़ से निकल रही'अखिल गीत शोध दृष्टि'अंतरराष्ट्रीय शोध अद्धवार्षिक जर्नल का अब तक 15 अंक प्रकाशित हो चुका है। यह शोध जर्नल भारत के 23 राज्य और विश्व के चार देशों कनाडा, नेपाल, मॉरिशस, जापान तक अपने लेखकीय प्रसार के साथ भारत का नेतृत्व कर रहा है। प्रधान सम्पादन में 'शोध अमृत'अंतरर्राष्ट्रीय शोध पत्रिका का 06 अंक भी प्रकाशित हैं। महाविद्यालय स्तर की 06 पत्रिकाओं का भी सम्पादन किया है। 01 अंतरराष्ट्रीय और 04 राष्ट्रीय साहित्यिक संगोष्ठी का संयोजन भी किया है।
इन संगोष्ठियों में डॉ0ओम प्रकाश सिंह (जे0एन0यू0 नई दिल्ली),प्रोफेसर अमरनाथ (कोलकाता),प्रोफेसर नरेश मिश्र(हरियाणा),प्रोफेसर परशुराम पाल(लखनऊ)प्रोफेसर पूनम सिन्हा(बिहार),प्रोफेसर त्रिभुवन नाथ शुक्ला,प्रोफेसर आशारानी(मध्यप्रदेश),डॉ0 भानु प्रताप सिंह (उत्तराखंड),प्रोफेसर नीरज खरे,प्रोफेसर प्रभाकर सिंह (बी0एच0यू0)आदि विद्वानों का आगमन हुआ है।
इनके शोध निर्देशन में 09 शोध छात्रों को पी0एच-डी0 की उपाधि मिल चुकी है और 03 शोध छात्रों ने अपना शोध प्रबंध जमा किया है।वर्तमान में 04 शोध छात्र शोध के लिये पंजीकृत हैं।आकाशवाणी से इनके अनेक वार्ता एवं परिचर्चा प्रसारित हो चुके है।
