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ज्ञान और विद्वान के व्यक्तित्व की गूँज और गंध सदियों तक कायम रहती हैं।

लेख।

 लेख: ज्ञानी और विद्वान के व्यक्तित्व की गूँज और गंध सदियों तक कायम रहती हैं।  संगमरमर जटित कितना भी आलीशान महल बना लीजिये दसवीं पिढि तक आते-आते वह महल खंडहर में तब्दील हो जाता है। महज  जिन्दा रह जाता हैं उन मेहनतकश हाँथो का हुनर, कौशल, कारीगरी करिश्मा,  जिन मेहनत कश हाथों ने महल बनाया है। कितनी भी मंहगी लक्जरी मजबूत गाडी खरीद लिजिए या महंगे शौक सुविधा के औजार खरीद लिजिए किसी न किसी दिन वह नमक के भाव में कबाड खाने में बिक जाता हैं। परन्तु त्याग तपस्या साधना और शोध से जो विचार, दर्शन, ज्ञान-विज्ञान साहित्य और कलाओं का जन्म होता हैं वह सदियों तक  ज्ञान पिपासुओ के मानसिक अंतरिक्ष तैरता रहता हैं। हमारे ॠषियो मुनियों  तथा सत्यसाधको ने अपनी तपस्या और साधना से उपनिषदों के रूप में जो ज्ञान और दर्शन उद्गमित और उद्घाटित किया वह उपनिषदों का दार्शनिक, तार्किक और बौद्धिक ज्ञान  आज भी भारतीय समाज को  मार्गदर्शित कर रहा है। आज से ढाई हजार साल पहले महात्मा बुद्ध ने सारनाथ में पंचशील का जो विचार दिया था उस विचार से आज सम्पूर्ण दुनिया लाभान्वित हो हो रही हैं। आर्यभट्ट, चरक, सुश्रुत, वराहमिहिर, सर आइजक न्यूटन, आर्कमिडीज, कोपरनिकस, केपलर और आइनस्टाइन ने अपनी साधना और शोध से जो विचार दिया वह अजर अमर है। विज्ञान का कोई भी विद्यार्थी जब भी विज्ञान की किताबे पढेगा तो किसी न किसी किताब के पन्नो में ऐ सत्य के साधक और उपासक  जिन्दा नजर आयेंगे।

 नहिं ज्ञानेन सदृश्य पवित्र महिं विद्यते। 

लेखक: मनोज कुमार सिंह प्रवक्ता 
बापू स्मारक इंटर काॅलेज दरगाह मऊ।

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