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भारत के बढ़ते अंतरराष्ट्रीय कद का प्रत्यक्ष प्रमाण है जी 20 शिखर सम्मेलन।


लेख।

लेख: पूरी दुनिया की भौगोलिक परिदृश्य में अगर अपने सामाजिक विचार को रूढ़ीबद्ध तरीके से किसी ने संचालित किया है तो वह एकमात्र देश भारत है। वसुधैव कुटुंबकम की विचारधारा पर सतत मनन करता हुआ आगे बढ़ रहा है हमारा भारत।
समलैंगिक प्राथमिकता हो, पर्यावरण बचाने की रूपरेखा हो या अंतरराष्ट्रीय बढ़ रहे आतंकवाद के खतरे को विश्व पटल पर उजागर करना हो, इसमें पूरी तरीके से मुखर रहा है भारत। 
      अभी जल्द ही रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध उपरांत भी भारत गुटनिरपेक्ष की भूमिका निभाकर यह बताया कि युद्ध किसी भी विवाद का हल नहीं है अपितु इससे केवल सर्वनाश ही हुआ है।
         हमारी पांच हजार साल पुरानी सभ्यताओं ने यही सिखाया की युद्ध मर्यादाओं के खिलाफ है, सामाजिक बंधन एवं सामाजिक कुरीतियों को हटाना ही सबसे बड़ा युद्ध है क्यों ना इसी युद्ध को स्वीकार कर आगे बढ़ा जाए।भारत में पहले भी बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन हुए हैं, लेकिन जी-20 शिखर सम्मेलन के रूप में यह पहली बार है, जब समस्त विश्व की निगाहें भारत की ओर होंगी। इस सम्मेलन में बड़ी आर्थिकी वाले देश भारत की अध्यक्षता में क्या फैसला लेते हैं, इसकी दिलचस्पी विश्व को इसलिए अधिक होगी, क्योंकि इस समय दुनिया तमाम आर्थिक समस्याओं से घिरी है। विभिन्न देशों की खेमेबाजी ने इन समस्याओं को और बढ़ा दिया है। हर राष्ट्र की अपनी एक अलग विचारधारा होती है परंतु सभी देशों को यह बात निर्गत रूप से पता है कि भारत ही एक ऐसा गुटनिरपेक्ष देश है जिसके समक्ष एकत्रित होकर विश्व के सारे देश  G20 को माध्यम बनाकर पर्यावरण, विकास एवं इस पृथ्वी के लिए कुछ दिशा और दशा को तय कर सकते हैं।भारत सहमति की कोई राह निकाल सकता है, इसकी आशा इसलिए भी है, क्योंकि वह अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर दृढ़ है और किसी गुट का हिस्सा बनने को तैयार नहीं। यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर जिस तरह अडिग रहा, उसके कायल वे देश भी हैं, जो यह चाहते थे कि भारतीय नेतृत्व उनके पाले में खड़ा हो और उनके सुर में सुर मिलाए।भारत ने जी-20 शिखर सम्मेलन को सफल बनाने के लिए अपने कूटनीतिक कौशल का जैसा परिचय दिया है, वैसा इसके पहले शायद ही इस समूह की अध्यक्षता करने वाले किसी देश ने दिया हो। भारत की अध्यक्षता में जी-20 समूह के प्रतिनिधियों की अभी तक जो तमाम बैठकें हुईं, उनमें कहीं अधिक विविधता देखने को मिली। इन बैठकों में हर उस विषय पर गहन चर्चा हुई, जो विश्व समुदाय को प्रभावित करते हैं।

भारत ने न केवल सतत एवं समावेशी विकास को प्राथमिकता दी, बल्कि लैंगिक समानता जैसे विषयों को भी महत्व दिया। इसके साथ ही उसने इस पर भी बल दिया कि डिजिटल क्रांति का लाभ विश्व के निर्धन-वंचित लोगों को भी मिलना चाहिए। मोदी सरकार ने देश के अनेक हिस्सों में जी-20 के विभिन्न समूहों की बैठकें आयोजित कर विश्व को देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और विविधता से भी परिचित कराया।

स्पष्ट है कि इससे भारत के प्रति विश्व की धारणा बदलेगी। वास्तव में ऐसा होने भी लगा है, क्योंकि दुनिया के कई बड़े और कहीं अधिक उन्नत देश इससे चकित हैं कि भारत ने तकनीक का किस तरह बड़े पैमाने पर उपयोग कर अपने लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने के साथ उनके जीवन को सुगम बनाया है। आज विश्व के बड़े राष्ट्र भारत को इसलिए भी महत्व दे रहे हैं, क्योंकि वह सबसे तेज गति से बढ़ती अर्थव्यवस्था वाला देश है। जी-20 शिखर सम्मेलन का निष्कर्ष कुछ भी हो, यह तय है कि भारत का अंतरराष्ट्रीय कद एवं उसकी महत्ता और अधिक बढ़ने वाली है।
       दुनिया में बढ़ते आतंकवाद का खतरा हो, आर्थिक नीतियों पर चर्चा हो, पर्यावरण के परिपेक्ष में पृथ्वी की सुरक्षा हो या मानव संसाधन से मानव विकास हो के विचार को भारत ने  समय-समय पर विश्व पटल पर रखा है। मानव कल्याण की बात हो या जनकल्याण योजना की बातें हो भारत ने उसे युद्ध और विस्तारवाद की नीतियों से सदैव आगे रखा है। G20 शिखर सम्मेलन भारत की बढ़ती संप्रभुता एकता और अखंडता का प्रत्यक्ष प्रमाण है। 
               आज जरूरत है विश्व को विस्तारवादी नीति से ऊपर उठकर जनकल्याण और भू कल्याण के बारे में सोचना, और जब-जब संकटों का दौड़ बढ़ा है इतिहास गवाह है कि भारत ने दुनिया को रास्ता दिखाया है। विज्ञान एवं तकनीकी में आज दुनिया भर में भारत का परचम लहरा रहा है दुनिया की निगाहें भारतीय तकनीक पर टिकी हुई है क्योंकि हमारी सबसे पुरानी सभ्यताओं ने सिद्ध किया है कि हमने कभी भी जनकल्याण के अलावा किसी भी वस्तु या विचार को सर्वोपरि नहीं माना है। दुनिया में फैलते आतंकवाद के खतरे से निपटने के लिए भी विज्ञान और तकनीकी का बढ़ना अति आवश्यक है, शायद यही राष्ट्र निर्माण की परिकल्पना को सिद्ध करता है। G20 शिखर सम्मेलन भारत के बढ़ते हुए स्वरूप का एक फलता फूलता उदाहरण है। 
    जब जब दुनिया में कहीं आर्थिक बदहाली का दौर बढ़ा है तब तक दुनिया ने भारत को एक ऐसे राष्ट्र के रूप में पाया है जो सदैव उनके साथ खड़ा रहा है, आर्थिक बदहाली से लेकर भुखमरी एवं किसी प्राकृतिक आपदा में भी भारत मुखर होकर उन राष्ट्रों की मदद किया है शायद इसी का प्रमाण है कि आज भारत में जी-20 शिखर सम्मेलन का आयोजन हो रहा है।

लेखक: आलोक प्रताप सिंह 
विचारक एवं विश्लेषक।

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