आज़मगढ़।
रिपोर्ट: गौरव सिंह राठौर
महाकुम्भ का अमृत तत्त्व विषय पर विद्वानों ने किया उद्बोधन।
प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के तत्वाधान में उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान, लखनऊ द्वारा एक भव्य और समर्पित व्याख्यान गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस गोष्ठी का मुख्य विषय था 'महाकुंभ का अमृत तत्त्व', जिसमें विद्वानों ने महाकुंभ के महत्व, उसकी वैदिक परंपराओं और वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला। कार्यक्रम के दौरान सैकड़ों की संख्या में श्रोतागण उपस्थित रहे, जिनमें विश्वविद्यालय के संस्कृत के शोध छात्र, प्रोफेसर, और इलाहाबाद विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग से संबंधित तमाम लोग शामिल थे। इस गोष्ठी ने सभी उपस्थित लोगों को महाकुंभ और उसकी सांस्कृतिक एवं धार्मिक गहरी समझ को नए दृष्टिकोण से देखने का अवसर प्रदान किया। सभी ने इस आयोजन से एक अमूल्य सीख हासिल की, जिसके माध्यम से वे अपनी संस्कृति और सभ्यता को और बारीकी से समझने का प्रयास करेंगे।
कार्यक्रम की शुरुआत में मुख्य वक्ता, प्रो. मनोज कुमार मिश्र आचार्य, जिन्होंने 'महाकुंभ' को केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि एक गहन और विज्ञान से जुड़े सांस्कृतिक अनुभव के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने महाकुंभ के स्थानों की पवित्रता, कल्पवास की महिमा और कुंभ के आयोजन के वैज्ञानिक तत्त्वों पर विस्तार से चर्चा की। इसके साथ ही उन्होंने महाकुंभ के ऐतिहासिक महत्व और उसकी प्राचीन परंपराओं को आधुनिक संदर्भों में जोड़ते हुए समझाया।
विशिष्ट वक्ता डॉ. निरुपमा त्रिपाठी ने महाकुंभ के सन्दर्भ में इस भव्य आयोजन के सांस्कृतिक योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने महाकुंभ के आयोजन में शिक्षा और संस्कृत के योगदान को विशेष रूप से महत्व दिया। वक्ताओं में डॉ. आनन्दानन्द त्रिपाठी, डॉ. प्रमा द्विवेदी और डॉ. एकात्मदेव ने भी महाकुंभ के विविध पहलुओं पर अपने विचार साझा किए और उसे एक दिव्य ज्ञान के स्रोत के रूप में प्रस्तुत किया। डॉ. संत प्रकाश तिवारी, जो इस कार्यक्रम के संयोजक थे, ने अपने उद्बोधन में महाकुंभ की अमूल्यता और उसकी धार्मिक और सांस्कृतिक भूमिका को विस्तार से बताया। उन्होंने महाकुंभ के वेदों और पुराणों में वर्णित महत्व पर प्रकाश डाला और विशेष रूप से माता सीता और भारत द्वारा मां गंगा से मांगा गया आशीर्वाद विषय पर भी चर्चा की। डॉ. तिवारी ने बताया कि कुंभ एक दिव्य आशीर्वाद के रूप में, मानवता के लिए शुद्धता और समृद्धि का प्रतीक है।
कार्यक्रम के सह-संयोजक डॉ. ललित कुमार ने इस कार्यक्रम की सफलता पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि यह आयोजन केवल संस्कृत और वेदों के अध्ययन के लिए एक अवसर नहीं, बल्कि समाज को एकता, शांति और ज्ञान की ओर अग्रसर करने का एक माध्यम है।इस गोष्ठी ने महाकुंभ के अमृत तत्त्व को समझने का एक अभूतपूर्व मौका प्रदान किया और विद्वानों ने इस अवसर का लाभ उठाते हुए महाकुंभ के विज्ञान, संस्कृति और धार्मिक पहलुओं को परिभाषित किया। सभी उपस्थित लोगों ने इस आयोजन से अपनी संस्कृति, सभ्यता और धर्म के प्रति गहरी समझ प्राप्त की, जो उन्हें भविष्य में न केवल अध्ययन के लिए बल्कि जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में मार्गदर्शन करने में मदद करेगी।