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निजामाबाद में दो आरोपियों से दो तमंचे और कारतूस बरामद, पुलिस ने किया गिरफ्तार


आज़मगढ़।

रिपोर्ट: वीर सिंह

आजमगढ़। अपराध एवं अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत निजामाबाद थाना पुलिस ने दो संदिग्ध आरोपियों को गिरफ्तार करने का दावा किया है। पुलिस के अनुसार, दोनों के कब्जे से दो अवैध तमंचे और दो जिंदा कारतूस .315 बोर बरामद किए गए हैं। पुलिस ने दोनों के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर न्यायालय में पेश किया।

पुलिस के मुताबिक, 11 सितंबर 2026 की रात उपनिरीक्षक चित्रांशु मिश्रा पुलिस टीम के साथ थाना क्षेत्र में गश्त और संदिग्ध व्यक्तियों एवं वाहनों की चेकिंग कर रहे थे। इसी दौरान फरिहा चौक पर मुखबिर से सूचना मिली कि मुहम्मदपुर की ओर से दो संदिग्ध व्यक्ति आ रहे हैं और उनके पास अवैध असलहा है।

सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने मुहम्मदपुर नहर पुलिया के पास घेराबंदी की। पुलिस के अनुसार, मौके से दोनों संदिग्धों को पकड़ लिया गया। पूछताछ में उनकी पहचान शाकिब पुत्र फारुक, निवासी बखरा, थाना सरायमीर, आजमगढ़, उम्र करीब 28 वर्ष और आमिर पुत्र कईम, निवासी बक्सपुर, थाना बरदह, आजमगढ़, उम्र करीब 32 वर्ष के रूप में हुई।

पुलिस का कहना है कि तलाशी के दौरान दोनों के कब्जे से एक-एक अवैध तमंचा और एक-एक जिंदा कारतूस बरामद हुआ। बरामदगी के आधार पर थाना निजामाबाद में मु0अ0सं0 227/2026, धारा 3/25 आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। इसके बाद दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया।

पहले से दर्ज हैं कई मुकदमे

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार शाकिब के खिलाफ सरायमीर थाने में गोवध निवारण अधिनियम, आर्म्स एक्ट और गैंगस्टर एक्ट समेत विभिन्न धाराओं में सात मुकदमे दर्ज हैं।

वहीं आमिर के खिलाफ आजमगढ़ के मेहनगर, गंभीरपुर, सरायमीर, बरदह तथा प्रयागराज कमिश्नरेट के नवाबगंज थाने में चोरी, बरामदगी, धोखाधड़ी, कूटरचना, आर्म्स एक्ट समेत विभिन्न धाराओं में सात मुकदमे दर्ज होने की जानकारी पुलिस ने दी है।

बरामदगी

  • 02 अवैध तमंचे .315 बोर
  • 02 जिंदा कारतूस .315 बोर

गिरफ्तारी करने वाली पुलिस टीम में उपनिरीक्षक चित्रांशु मिश्रा, कांस्टेबल मुरारी जायसवाल, कांस्टेबल संजीव शर्मा, रिजर्व कांस्टेबल अभिषेक पाण्डेय और रिजर्व कांस्टेबल विपिन कुशवाहा शामिल रहे।

नोट: आपराधिक इतिहास और आरोप पुलिस अभिलेखों के आधार पर हैं। इन मामलों में अंतिम दोषसिद्धि न्यायालय के निर्णय पर निर्भर करेगी।

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