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एससी एसटी कानून के विरोध में लालगंज में विरोध व धरना प्रदर्शन।

आज़मगढ़।

लालगंज/आजमगढ़। एससी एसटी कानून के विरोध में लालगंज में विरोध व धरना प्रदर्शन किया गया तथा दुकानों को बंद कराने का प्रयास किया गया। इस अवसर पर लालगंज बाजार में कुछ स्थानों पर दुकान बंद कराने में नोकझोंक भी हुई किंतु चौकी इंचार्ज अनिरुद्ध सिंह के हस्तक्षेप से मामला शांत हो गया। 21 मार्च 2018 को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज मामलों में तत्काल गिरफ्तारी पर रोक लगा दी गई थी तथा कोर्ट ने एससी एसटी एक्ट के व्यापक दुरुपयोग होने की बात स्वीकार की थी।

 एससी एसटी की पुनः समीक्षा करने की बात कही थी। 2 अप्रैल को दलित संगठनों ने भारत बंद का आह्वान किया इस दौरान देश स्तर पर हिंसक प्रदर्शन हुए जिसमें कई निर्दोष लोगों की मृत्यु हुई। करोड़ों की संपत्ति जलाकर स्वाहा कर दी गई। दलित संगठनों के दबाव में आकर केंद्र सरकार ने एससी एसटी एक्ट को अपने पुराने स्वरूप में ही पेश कर दिया। एससी एसटी एक्ट संशोधन विधेयक 2018 के जरिए मूल कानून में 18 ए जोड़ी गई जिसके द्वारा पुराने कानून को बहाल कर दिया गया है। इस में एससी-एसटी केस दर्ज होते ही अविलंब गिरफ्तारी का प्रावधान है। जांच इंस्पेक्टर स्तर का अधिकारी करेगा। जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल संबंधी शिकायत पर अभिलंब मामला दर्ज होगा तथा एससी एसटी केस की सुनवाई स्पेशल कोर्ट में होगी इसी के विरोध में राष्ट्रीय स्तर की बंदी के साथ लालगंज में भी बंदी का पूर्णरूपेण असर देखा गया। इस अवसर पर विभिन्न प्रकार के नारे लगाए गए। 78 प्रतिशत आबादी के विरुद्ध दमनात्मक काला कानून एससी एसटी एक्ट को पास करने के विरोध में सभी ने सरकार की आलोचना की तथा विभिन्न प्रकार के नारे लगाए गए। अंत में एक ज्ञापन महामहिम राष्ट्रपति को संबोधित तहसीलदार अनिल कुमार पाठक के माध्यम से योगेंद्र राय ने सौंपा। इस अवसर पर समर बहादुर सिंह एडवोकेट, नागेंद्र सिंह, विनय शंकर राय, योगेंद्र राय, अनिल राज, अवनीश राय बंटी, डॉक्टर अनिल राय, राणा प्रताप सिंह एडवोकेट, डॉक्टर जेपीएन तिवारी, संतोष कुमार सिंह, श्यामा सिंह, अशोक अस्थाना, कैलाश सिंह एडवोकेट, प्रसिद्धि नारायण सिंह आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। इसी के साथ अधिवक्ता संघ ने भी संसद द्वारा संविधान में अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम को कठोर किए जाने वाले कानून की घोर निंदा करते हुए इसे वापस लिए जाने की मांग की। इससे पूर्व तहसील का का चक्रमण किया गया।

रिपोर्ट: ब्यूरो

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