तबरेज डेस्क। चाइल्ड केयर क्लिनिक, सिधारी के शिशु व बाल रोग विशेषज्ञ डॉ डी डी सिंह ने अनौपचारिक बातचीत में बताया कि स्वर्णप्राशन एक आयुर्वेदिक रोग प्रतिरोधक बल वर्धक उपाय है, जिसमें बालकों को शुद्ध स्वर्ण भस्म, गो घृत, शुद्ध मधु तथा ब्राम्ही, शंखपुष्पी आदि औषधियों के मिश्रण को चटाया जाता है। यह एक प्रकार की आयुर्वेदिक इम्यूनाइजेशन विधि है। जन्म से लेकर 16 साल तक के बच्चों के लिए अत्यंत लाभदायक है।
यह बच्चों के पाचन तंत्र को मजबूत करता है, मेधा, बुद्धि, स्मृति, एकाग्रचित्तता का विकास करता है। सर्दी, जुकाम आदि वायरल रोगों से बचाता है। सुनने, देखने और बोलने संबंधित क्रियाओं का विकास करता है। सुदृढ अस्थि व मांसपेशियों के विकास में सहायक होता है। शारिरिक व मानसिक विकास में मदद करता है।
सही मात्रा और औषध से बना हुआ सुवर्णप्राशन अगर किसी भी बालक को छह मास तक नियमित रूप से दिया जाये तो वह "श्रुतधर" मतलब कि एक बार सुना हुआ उसको याद रह जाता है । अगर हम इसको आज के परिप्रेक्ष्य में देखें तो उसकी याददास्त अवश्य ही बढती है। और स्वस्थ और तेजस्वी भारत के निर्माण में यह संस्कार हमारे लिये एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात है। इसके लिये 16 साल तक की उम्र के किसी बालक को कभी भी शुरु करवा सकते है। और कम से कम छ महिने तक इसका सेवन करवाना चाहिये। डॉ डी डी सिंह ने बताया कि आगामी 31 अक्टूबर, बुधवार को चाइल्ड केयर क्लिनिक, सिधारी पर स्वर्णप्राशन की शुरुआत की जाएगी।
रिपोर्ट: वीर सिंह