झाँसी।
मऊरानीपुर झाँसी। नगर व क्षेत्र का अति प्राचीन बड़ी माता मंदिर मुहल्ला पुरानी मऊ में स्थित है।मंदिर से लाखो लोगो की श्रद्धा जुड़ी हुई है।जब भी किसी के घर मे कोई शुभ कार्य होता है तो लोग सबसे पहले अपना माथा टेकने इस मंदिर में आते है।कहते है कि इस मंदिर में विराजमान माता की सुबह की पहली पूजा कोई देवता करने आते है चेत की नवदुर्गा एव क्वार की नव दुर्गा में यहां एक विशाल मेला लगता है।
इस मंदिर के लिए पुरानी निवासी जमीदार ठाकुर ने मेन दरवाजे पर लगभग तीस वर्ष पूर्व एक विशाल गेट बनवाने के साथ साथ मंदिर के नाम जमीन दान में दी।मंदिर का नव निर्माण व नो खण्ड का निर्माण नगर वाशियो द्वारा एक एक रुपये प्रतिदिन चंदा देकर कराया गया।जिसमें विशेष योगदान व श्रम दान रमेश चऊदा ने दिया उन्होंने अपनी देखरेख में मंदिर के नो खण्ड व मंदिर में टाइल्स मार्वल सहित कई कार्य कराए।लेकिन कुछ लोगो के विरोध के चलते उन्होंने मंदिर की देख रेख करना छोड़ दिया।उसके बाद मंदिर निर्माण की जिम्मेदारी नगर के कुछ लोगो ने ली।चंदा भी हुआ लेकिन मंदिर के निर्माण के नाम पर एक ईंट भी नही लगाई गई।मंदिर की संस्था का रजिस्ट्रेशन भी है।तथा मंदिर के नाम बैंक में लाखों रुपये जमा है।जिसके लगभग एक दर्जन संरक्षक है।लेकिन उनमें कुछ की मृत्यु हो चुकी है तथा कुछ लोग अभी भी जीवित है।जिनकी देखरेख में बैंक का पैसा जमा है।लेकिन वर्षो बाद भी वह पैसा मंदिर के लिए निकाला जा रहा है।कई बार लोगो ने वह पैसा निकालकर मंदिर निर्माण में लगाने के लिए कहा लेकिन नियति के चलते उस पैसे को निकाला नही जा रहा है।मंदिर की जो इस समय सीमित है उनके सदस्यों के पास भी चंदे का लाखो रुपये वर्षो से रखा हुआ है।लेकिन वह पैसा वो अपने निजी व्यवसाय में लगाये हुए।अगर वह लाखो रुपये बैंक में जमा होता तो आज दूना व तिगुना हो जाता है।मंदिर में एक दान पेटिका भी रखी हुई है।जो प्रत्येक नव दुर्गा के बाद समिति के सदस्यों द्वारा खोला जाता है।जिसमे लाखो रुपये चढ़ोत्तरी निकलती है।जिसको सिमिति के सदस्य ले जाते है।यह शिलशिला वर्षो से चला आ रहा है कि चंदे व दान पेटिका का पैसा सिमिति के लोग उठा के ले तो जाते है।लेकिन मंदिर के नाम पर वर्षो से एक रुपये कही नही लगाया गया।यहां तक कि बड़ी माता मंदिर में तीन तीन पंडा है जिनकी क्रमश नव दुर्गाओं में ड्यूटी लगती है।उन्हें जो लोग दक्षिणा में जो पैसे दे जाते है उन्ही में से मंदिर की साफ सफाई व अन्य कार्य करवाने पड़ते है।सिमिति के लोग उन्हें कोई मदद नही करते।यहां तक प्रति नव दुर्गा में श्रद्धालु चावल दान करते उस चावल को इकट्ठा किया जाता है।लेकिन जो लोग कन्या भोज के लिए चावल दान कर जाते है।उसे भी सिमिति के लोग बेच देते है।समिति के सदस्य नव दुर्गा में या तो मेले में दुकान लगाए लोगो से मंदिर के नाम पर रसीद काटकर पैसा लेते हुए दिखाई देते है या फिर दान पेटिका को खुलने के समय दिखाई देते है।बाकि नो दिन मंदिर में क्या परेसानी है उससे उन्हें कोई लेना देना नही है।मंदिर के प्रसाद के लिए एक दुकान से सिमिति द्वारा मिष्ठान उपलब्ध कराया जाता था लेकिन वो भी वर्षो से बन्द करा दिया गया।मंदिर के नाम जमीदार द्वारा दान दी गई खेती की जमीन को संरक्षको ने बेच दिया लेकिन वह पैसा कहा गया इसका कोई लेखा जोखा नही है।लोगो ने यह भी बताया कि मंदिर नाम पर जमीन खरीदने के लिए पैसा दिया गया लेकिन जमीन की रजिस्ट्री आज तक नही कराई गई।और पैसा लेने के बाद भी भू स्वामी ने वह जमीन किसी दूसरे को बेच दी।समिति के एक सदस्य ने बताया इन सब की शिकायत जिलाधिकारी से जिसकी जांच पुलिस ने की लेकिन असरदार लोग होने के कारण जांच नही की।नगर वाशियो ने एक हस्ताक्षर युक्त पत्र उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री एव जिलाधिकारी को भेजकर मंदिर के नाम पर इकठ्ठा किया गया पैसा व ठाकुर जी के नाम खेती की जमीन को बेचे जाने के बाद आये पैसा आखिर मंदिर के किस मद में खर्च किया गया तथा जमा पैसा किस किस के पास कितना जमा है।उसकी निष्पक्ष जांच कराकर उस पैसों को सरकारी देखरेख में अधूरे पड़े मन्दिर निर्माण को कराए जाने की मांग के साथ साथ सिमिति के रजिस्ट्रेशन में 16 सदस्यों में कुछ सदस्यों की मृत्यु हो जाने पर उनके स्थान पर नए सदस्यों को जोड़ने की मांग की।
रिपोर्ट: अखिलेश राज झाँसी