आजमगढ़
कवरेज डेस्क: सगड़ी तहसील के मालटारी बाजार में स्थित श्री गांधी पीजी कॉलेज के सभागार में सृष्टि थियेटर संस्थान द्वारा 12 अक्टूबर को विद्यालय के संस्थापक स्वर्गीय कुबेर मिश्रा की स्मृति में मुंशी प्रेमचंद की लिखित पूस की एक रात नामक एकांकी नाटक का मंचन किया गया। नाटक के मुख्य कलाकार सत्येंद्र यादव ने अपने कला के प्रदर्शन से दर्शकों का मन मोह लिया और बीच बीच में अपने अभिनय पर दर्शकों की तालियां बटोरता रहा इस मौके पर कांग्रेस पार्टी की महिला सेल से आजमगढ़ जिले से आई शबिहाअंसारी ने कहा कि नाटक एक समाज का आईना होता है जब किसी को कोई भाषा नहीं समझ में आती है दुख दर्द तकलीफ या लोगों की परिस्थितियां नहीं समझ में आती है तो समाज को हकीकत से चित परिचित कराने के लिए नाटक के जरिए समझाया जाता है। उन्होंने कहा कि नाटक ओ विधा है जिसके माध्यम से कठिन से कठिन बातों को सरल से सरल तरीके से लोगों को समझाया और बताया जाता है।
मुंशी प्रेमचंद पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि यह एक ऐसे लेखक थे जिन्होंने जातिवाद भेदभाव से दूर हटकर समाज के सामने हर पल सच्ची तस्वीर प्रस्तुत करने का काम किया महिलाओं पर बोलते हुए कहा कि महिलाओं को शिक्षित होना चाहिए उनको भी अपने हक और होकूक के बारे में समझना चाहिए जहां तक रहा सवाल पर्दा का तो बेशक इस्लाम पर्दे की बात करता है क्यों की पर्दा महिला और पुरुस दोनों को बुराइयों से रोकता है। ख़ास तौर से औरतों को अपना किरदार याद रखना चाहिए।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ओम प्रकाश राय ने कहा कि आज जरूरत है समाज को जगाने के लिए आज जरूरत है सोए हुए समाज को उनके हक के बारे में उन्हें बताने और समझाने की जिसके लिए एक मात्र सहारा है नाटक । नुक्कड़ नाटक या थिएटर नाटक के माध्यम से महिला पुरुष सबको बिना विद्यालय चलाएं बिना पढ़ाई किये ही समझाया और बताया जा सकता है उन्होंने कहा कि शैलेंद्र कुमार इसी विद्यालय का छात्र है जो समाज के अन्य समस्या को और चित्रण को अपने दिमाग में पिरोता रहा और बचपन से ही समाज को नाटक के माध्यम से कुछ न कुछ देने और समझाने का काम करता रहा आगे चलकर ये छात्र जरूर इस कॉलेज और क्षेत्र का नाम रोशन करेगा इस मौके पर विद्यालय के प्रचार ने कहा कि यह नाटक विद्यालय के संस्थापक स्वर्गीय श्री कुबेर मिश्रा जी की स्मृति में किया गया है कुबेर मिश्रा जी इस क्षेत्र के शिच्छा के जनक थे जिन्होंने अपने जीवन काल में बड़ी से बड़ी कठिनाइयों को आसान से आसान तरीके से दूर किया।
उन्होंने कहा कि मिश्रा जी हमेशा नकल के विरोधी थे नकल की विरोध के लिए यानी नकल रोकने के लिए उन्होंने मुकदमा भी लड़ा और विजयी भी हुए । कार्यक्रम के अंत में ओम प्रकाश राय ने आगंतुकों का और विद्यालय परिवार का तथा दर्शकों का आभार प्रकट किया।
रिपोर्ट: वीर सिंह