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ऊँचेगाँव रुहियावा जिला फैजाबाद में इमाम हुसैन की शहादत का वाक्या-का किया गया बयान।

फैजाबाद

हजरत इमाम हुसैन ने दसवी मोहर्रम की सुबह जंग से जाने से पहले अपनी बहन जैनब रजि0 से फरमाया

_" ऐ मेरी प्यारी बहन जैनब जो हक तुमने अदा किया दुनिया उसका जवाब ना दे सकेगी ! “ ऐ मेरी बहन किस मुंह से तेरा शुक्रिया अदा करू “?

तूने अपनी ज़िन्दगी भर की कमाई अपने लख्ते-जिगर औनो मोहम्मद को कर्बला में कुर्बान कर दिया !

इस वक्त कोई ऐसा नही जिसे तुम्हारा सरपरस्त बनाऊ ! 

जैनब !! अल्लाह ही तुम सबका बेहतर वारिस होगा ! हाय मेरी बहन !

इसी तरह आली मुकाम ने अपनी बीवी शहर बानो से भी दिल को चिर देने वाली तकरीर की ! 

इसके बाद इमाम हुसैन ने प्यारे नबी का अमामा सर पे बांधा , आपके वालिद हजरत अली रज़ी0 की तलवार कमर में लगाईं और बीवी फातिमा रज़ी0 के हाथों से सिली हुई रिदा कमर में बाँधी और घोड़े पे सवार होकर जंग के मैदान में पहुंचे !

तीन दिन से प्यासे हुसैन ने जिन्होंने कर्बला के मैदान में पिछले तीन दिनों में अपने सारे जानिसार , अपने सारे अहले खानदान , बच्चो और भतीजे , भानजो , भाइयों की लाश मुबारक ढ़ोते-ढ़ोते गुजारा अब दिने इस्लाम की खातिर अपनी शहादत के लिए दुश्मनों से भीड़ पड़े !

दुश्माने इस्लाम को गाजर मुली की तरह काटते-पिटते जब शाम होने आई तो यजीद की सेना में खलबली मच गई !

यजिद के सिपहसलार अमर साद ने बुलंद आवाज़ से कहा की एक हजार दीनार उस शख्स के वास्ते जो हुसैन का सर तन से जुदा करे !

अब क्या था ? इनाम के लालच में हर तरफ से नेजे ( भाले ) और तलवारें चमक उठी ! अम्र साद ने समझा की अली का शेर भूखा –प्यासा है उसे मालुम ना था की शेर के पंजे में खुदा के शेर की ताकत है ! तलवारें टूटी , बरछे गिरे हालत ये हो गई की जो दुश्मन क़त्ल करने की गरज से आगे बड़ा वही गिरकर खत्म हो गया !

कर्बला के मैदान के गरम शौले हुसैन की तलवार से बरसते शोलों को सजदा करने लगे ! 

अम्र साद घबरा उठा ! 

अचानक इमाम हुसैन का घोड़ा जिस पर वो सवार थे फरात नदी की तरफ बिजली की रफ़्तार से दौड़ पडा ! फरात नदी के बिच में सवार सहित उतर पडा ! घोड़े ने जैसे ही पानी की तरफ मुंह लगना चाहा उसकी निगाहें इमाम हुसैन के प्यासे रुख पर जाकर ठहर गई ! प्यासे घोड़े ने देखा मालिक से पहले में कैसे पानी पी सकता हूँ घोड़ा खामोश हो गया ! 

आली मुकाम ने चाहा की पानी पिए , चुल्लू भरा मगर खेमें में बैठे प्यासे बच्चों की सूरत आँखों के सामने दौड़ पड़ी उनकी प्यास ने मुंह में पानी ना जाने दिया ! 

इधर अम्र साद चीख उठा और शिम्र से कहा जो फरात नदी पे पहरेदार था की हुसैन ने जो अभी तक भूखे-प्यासे थे मुर्दे की तरह कमज़ोर थे उन्होंने जिन्दों को मुर्दा बना दिया है ! अगर उनके हलक में पानी चला गया तो हुसैन के मुर्दा जिस्म में जान दौड़ पड़ेगी जिंदे चीखते –चिल्लाते भागेंगे !

अम्र साद ने शिम्र से हमला करने को कहा !

उमान नामक एक शख्स ने उस वक़्त एक तीर ऐसा मारा जो इमाम हुसैन के हलक में घुसा और तमाम मुंह पानी की बजाये खून से भर गया !

दरूद इमाम पर !! 

इमाम खून की कुल्लियाँ थूकते मैदान में आये ! अम्र साद ने सोचा घाव गहरा है वो इमाम के आगे आ गया इमाम ने फरमाया 

__ “ सामने से गारत हो जा”

ये सुनते ही अम्र साद के होश उड़ गए शिम्र को उसने हमला करने को कहा !शिम्र ने फरेब से आवाज़ लगाई कि  “ भाई की मोहब्बत में जैनब खेमे से बाहर आ गई है “

इमाम का खेमे की तरफ देखना हुआ इतने में ज़रआन नामक यजीदी सेनिक ने इमाम हुसैन के उलटे हाथ पे तलवार का वार किया ये ऐसा वार था की इमाम आली का हाथ कट गया !

इमाम ने इरादा किया की जरआन को जहन्नम रशीद करे लेकिन हाथ काटने से खून के फव्वारे जारी हो गए और कमजोरी की वजह गिर पड़े और सनान बिन अनस ने घायल सय्यद इमाम हुसैन के सीने मुबारक में ऐसा नेजा मारा  की सीने के आरपार हो गया ! 

जुमा का दिन मुहर्रम की दस तारीख चल रही थी ! रसूलल्लाह का नवासा कर्बला की तपती धरती पर चित गिरे हुए है !

सनान के नेजा निकालते ही इमाम हुसैन का कलेजा भी बाहर आ गया !शिम्र उस वक़्त खंजर लेकर आगे बढ़ा तो देखा चेहरे पे मुस्कान बिखरी हुई थी !उसने देखा की अभी भी साँसे चल रही है अगर ज़िंदा हुसैन का सर कलम करूँगा तो यजिद मालामाल कर देगा यही सोचकर शिम्र खंजर हाथ में लिए इमाम हुसैन के पुस्त (पीठ) पे सवार हो गया और सय्यदा के लाल का सर तन से जुदा करके खुली ने इमाम हुसैन का सर नेजे पर बुलंद कर लिया और 

"या हुसैन “ याने हुसैन हाजिर का नारा बुलंद करते हुए अम्र साद के पास पहुंचा !

आपकी बहन बीवी जैनब और शहरबानो रोते-रोते थक चुकी थी ! 

इमाम हुसैन के सर को नेजे पर देखकर चीख मार के लिपटी और बेहोश हो गई ! जब होश आया तो बाहर झाँकने आई की कही सर को देख ले आपने देखा की 

अम्र साद के हुकुम से इमाम हुसैन रजी0 के जिस्म मुबारक पे घोड़े कूद रहे थे ! आप दोनों कलेजा पकड़ कर बैठ गई !

अल्लाह हम सभी को दिने इस्लाम पर चलने की नेक तोफिक अता फरमाए ! इमाम हुसैन ने इस्लाम की हिफाजत की खातिर अपनी गर्दन कटा दी लेकिन याजिद के आगे सर नही झुकाया !

हम उसी के चाहने वाले है कम से कम उनकी शहादत के रोज ऐसा काम ना करे की हमें जन्नत के सरदार के सामने मैदाने हश्र में शर्मिन्दा होना पड़े !

मिन्जानिब सैय्यद दानिश फैजाबादी अन्जुमन अब्बासिया अहले सुन्नत ऊँचेगाँव रुहियावा जिला फैजाबाद यूपी उत्तर प्रदेश

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