चंदौली।
रिपोर्ट: ओ पी श्रीवास्तव,
चंदौली कोरोना संक्रमण के बढ़ते वैश्विक आंकड़े के मद्देनजर पूरा देश लाकडाउन कर दिया गया है। सरकार के मन्तव्य और अपील के तहत कुछेक अराजक तत्वों को छोड़कर पूरा देश इस वैश्विक महामारी से निजात पाने को 21 अप्रैल तक सोशल डिस्टेन्स को फॉलोअप करते हुए घरों में खुद को महफूज कर रखा है। लेकिन वर्तमान त्रासदी ने एक ओर कामगारों पर विशेष कहर ढाया है। विभिन्न कल- कारखानों के बंद पड़ जाने से दैनिक मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करने वाले इन मजदूरों का जीना मुहाल है। अर्थव्यवस्था की करारी मार खाते ये मजदूर अपना अस्थायी आशियाना छोड़कर अपने स्थायी घर की तरफ कुच करने को विवश हैं। यही इस लाकडाउन कि सबसे कमजोर कड़ी साबित हुई। सरकार को चाहिए था कि जब देश को लाकडाउन किया तब इन मजदूरों की विभीषिका पर पूर्व में ही विचार कर लें, लेकिन हुआ नहीं। इसी खामियाजा निकला कि लाकडाउन के सातवें दिन तक बदस्तूर मजदूरों का बड़ा जत्था दिल्ली, बंगाल, सहित बड़े महानगरों से पैदल एवं अन्य साधनों की सहायता से अपने गंतव्य तक पहुचने को निकल पड़े।
इतिहास के पन्ने खगालने पर पता चलता है कि जब भी इस कदर की विभीषिका का सामना सरकार को करना पड़ा है देश में जनसहयोग को जनसैलाब उमड़ पड़ा है। कोरोना वैश्विक महामारी के संक्रमण की फ़िक्र किए बिना संकट की इस घड़ी में असहाय मजदूरों की मदद को जनसमर्थन उफान पर है। जनसमर्थन की इसी कड़ी में वाराणसी के डाफी टोल पर एनएचएआई की कार्यदायी संस्था के कर्मचारियों ने कॉरिडोर एवं सेफ्टी मैनेजर बृजेश चौबे के नेतृत्व में कई किलोमीटर पैदल यात्रा कर अपने गंतव्य को जा रहे करीब एक हजार मजदूरों को खाने-पीने की सुविधा उपलब्ध कराते हुए उनको स्थानीय प्रशासन की मदद से गंतव्य तक पहुंचाने में मदद कर रही है। इस बाबत टेलीफोनिक वार्ता में बृजेश चौबे ने बताया कि कहते हैं सार्थक सोच, नेक प्रयासों से मिशाल बन जाय करती है। हमारी टीम लगातार हाइवे पर मजदूरों की सेवा को आवश्यक सोशल डिस्टेन्स एवं सुरक्षा के मानदंड का उपयोग कर ऐसे मजदूरों की सेवा को ततपर है।
ये जनसहयोग का सैलाब यही तक सीमित न रहा बनारस की गलियों से गुजरता हुआ जनपद चंदौली के यूपी-बिहार बॉर्डर के बिहार सीमा से सटे खजुरा गांव तक जा पहुंचा। शासन से प्राप्त निर्देशों के आधार पर कैमूर प्रशासन सहित आलाधिकारियों की टीम कैम्प लगाकर प्रतिदिन पैदल यात्रा कर रहे हजारों मजदूरों की पुख्ता जांच सम्पन्न कराकर उनके खाने-पीने की सुविधा उपलब्ध कराते हुए बसों के माध्यम से उन्हें उनके गंतव्य स्थान तक पहुंचाने की मुहिम में जुट गई है।
आपको बता दें कि नेशनल हाईवे-2 पर बनारस होते हुए चंदौली के रास्ते प्रतिदिन हजारों मजदूरों का जत्था भूखा-प्यासा अपने गंतव्यों की तरफ कूच कर रहा है। प्रदेश सरकार द्वारा प्राप्त निर्देशो के आधार पर चंदौली प्रशासन भी इन मजदूरों को खाने-पीने की सुविधा उपलब्ध कराने की मुहिम में तटस्थ खड़ा है।
सच है कि इस त्रासदी में सोशल डिस्टेन्स को फॉलोअप करते हुए जनसहयोग को जनसैलाब का उमड़ पाना आवश्यक है। सारा कार्य अगर सरकारी मिशनरी ही करें तो हमारे दायित्वों का क्या होगा, बस ध्यान रहे कि सुरक्षा कवच न टूटे।