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मिशन शक्ति के अन्तर्गत एनएचएम की तरवां इकाई में पहले से महिलाएं सशक्त।

आज़मगढ़।

रिपोर्ट: वीर सिंह

योजनाओं के क्रियान्वयन से लेकर लाभार्थी के भुगतान तक में अच्छे तालमेल के चलते योजनाओं के क्रियान्वयन में मिले अच्छे परिणाम।

आजमगढ़ 22 अक्टूबर-- नवरात्रि में जहां योगी सरकार मिशन शक्ति अभियान के तहत महिलाओं को हर क्षेत्र में सशक्त बनाने पर पूरा जोर लगा रही है, वहीं प्रभारी जिलाधिकारी भी महिलाओं को हर क्षेत्र में सशक्त बनाने की कोशिश में लगे हैं। वहीं इन प्रयासों के पहले से ही कुछ जगह ऐसी हैं जहां पर ज्यादातर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां महिलाओं के हाथ में हैं। उनके बीच तालमेल के चलते योजनाओं का क्रियान्वयन आसानी से हो जा रहा है। आज तक अधिकारियों को किसी बात पर शिकायत करने का मौका नहीं मिला और अधिकारियों के मांगने पर जरूरी सूचनाएं समय से मिल गईं और काम भी पारदर्शी तरीके से हुआ। जिलाधिकारी महिलाओं के इस तरह से अच्छा परिणाम देने की प्रशंसा करते हैं।
नेशनल हेल्थ मिशन की तरवां इकाई के तीनों महत्वपूर्ण पदों पर महिलाएं ही काबिज हैं। ब्लाक कार्यक्रम प्रबंधक (बीपीएम) पद पर नीलम कुमारी, ब्लाक सामुदायिक प्रक्रिया प्रबंधक (बीसीपीएम) पद पर संजू विश्वकर्मा और ब्लाक अकाउंट मैनेजर(बीएएम) पद पर अनीता कुमारी तैनात हैं। नीलम ब्लाक में जितने भी कार्यक्रम होते हैं उनका प्रबंधन करती हैं जबकि योजनाओं के क्रियान्वयन में बीसीपीएम संजू विश्वकर्मा मुख्य भूमिका निभाती हैं। संजू ही आशा कार्यकर्ताओं की नोडल अधिकारी हैं। वहीं आशा कार्यकर्ताओं का पेमेंट करतीं हैं। उन्हें सहयोग करती हैं। टीकाकरण तथा अन्य कार्यों की जमीनी हकीकत देखने के लिए मौका मुआयना करती हैं। तीनों महिलाओं के बीच अच्छे तालमेल के चलते इस बार नेशनल डिवार्मिंग डे (एनडीडी) पर आशा कार्यकर्ताओं ने 83 हजार 586 के सापेक्ष 82 हजार 256 एक से 19 साल तक के बच्चों को दवा खिलाई और 98.40 प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त किया। यही हाल बाल स्वास्थ्य पोषण माह का भी रहा जिसमें नौ माह से पांच साल तक के 24 हजार 535 बच्चों की जगह पर 17 हजार 236 बच्चों को विटामिन-ए की खुराक दी और 70.24 प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया गया। कोविड-19 के सर्वे का कार्य पांच जुलाई से अभी तक लगातार चल रहा है। इस दौरान आशा कार्यकर्ताओं ने प्रति दिन 25 घरों का सर्वे कर दो लाख 20 हजार 635 की आबादी कवर की और 6210 लोगों के कोविड की सैम्पलिंग की। सभी घर कवर किए जाने के बाद भी कई घरों में एक बार से अधिक जाना पड़ा क्योंकि कोरोना होने का संदेह रहा। एक से 15 अक्टूबर तक चले दस्तक अभियान और एक से 31 अक्टूबर के बीच चले संचारी रोग अभियान के दौरान 34200 घरों को कवर किया गया। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत जिले में 4575 गर्भवती महिलाओं के सापेक्ष 3868 को योजना का लाभ पहुंचाकर 84.24 प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया गया।
वहीं अकाउंट का काम देखने वाली अनीता की सक्रियता से यहां कार्यरत 187 आशा कार्यकर्ताओं का भुगतान हर महीने समय से हो जाता है। कोविड-19 के चलते बंद रही नसबंदी योजना सितंबर में फिर से चालू हो गई। इसके तहत 95 महिलाएं 20 सितंबर तक नसबंदी करा चुकीं थीं जिनमें से 65 का भुगतान हो चुका था जबकि बाकी का भी शीघ्र हो जाएगा। इस वर्ष अभी तक जननी सुरक्षा योजना में 1455 महिलाओं के प्रसव हुए। इनमें से 1265 लाभार्थियों को प्रति लाभार्थी 1400 रुपए का भुगतान कर दिया गया।
इस मामले में नेशनल हेल्थ मिशन के जिला सामुदायिक प्रक्रिया प्रबंधक (डीसीपीएम) विपिन बिहारी पाठक तरवां ब्लाक के स्टाफ को बहुत ही अनुशासित स्टाफ और समय से रिपोर्टिंग करने वाला कहते हैं। वह कहते हैं कि अन्य ब्लाकों की अपेक्षा यहां योजनाओं के क्रियान्वयन में ज्यादा गुणवत्ता रहती है। वहां की अकाउंट मैनेजर की अकाउंट के संबंध में अच्छी पकड़ है जिससे भुगतान व अन्य मामलों में दिक्कत नहीं आती है। बीपीएम कुशल प्रबंधक हैं और बीसीपीएम के तालमेल के साथ काम करने से बहुत अच्छे परिणाम दे रही हैं।
तरवां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के प्रभारी चिकित्साधिकारी (एमओआईसी) डा. देवेंद्र सिंह कहते हैं कि बीपीएमयू में कार्यरत तीनों महिलाएं समय से कार्य पूरा करती हैं। कोरोना के चलते हुए लाकडाउन के दौरान भी इन्होंने हमें बहुत सहयोग किया। बाकी जगहों पर तो लोग नहीं आ रहे थे लेकिन ये लोग फोन के माध्यम से घर से भी समय से काम पूरा कर लेतीं थीं। फील्ड में मानीटरिंग करने, समीक्षा करने सहित सारे कार्य इनके अपडेट रहे।

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