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शिब्ली डे:- शिब्ली नोमानी के अधूरे ख्वाब को पूरा करने का दिन- मिर्ज़ा मुराद बेग


आज़मगढ़।

रिपोर्ट: वीर सिंह

आज़मगढ़: जनपद के शिब्ली नेशनल इण्टर कालेज में सहायक अध्यापक मिर्ज़ा मुराद बेग ने शिब्ली डे के अवसर पर कहा कि- अल्लामह शिब्ली नोमनी (3 जून 1857 - 18 नवंबर 1914) ब्रिटिश राज के दौरान भारतीय उपमहाद्वीप के एक इस्लामी विद्वान थे। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के बिंदवाल गाँव में हुआ था।1883 में आजमगढ़ में शिब्ली नेशनल कॉलेज और दारुल मुसानिफिन की स्थापना के लिए मशहूर हैं। नोमानी अरबी, फारसी, तुर्की और उर्दू के एक महान दानिश्वर थे। वे कवि भी थे।
उन्होंने पैगंबर मुहम्मद के जीवन पर बहुत सारी किताबें लिखी।शिब्ली नेशनल कालेज के संस्थापक की यौमे विलादत हर वर्ष 18 नवंबर शिब्ली डे के रूप में मनाया जाता है।अल्लामा शिब्ली नोमानी मिल्लते इस्लामिया और औरतों की शिक्षा के प्रति फिक्रमंद रहते थे।वे इतने बड़े शिक्षाविद थे कि उनके जैसी शख्सियत का पाया जाना मुश्किल है। मजहब के लिहाज से उनकी जैसी सोच किसी की नहीं थी। उन्होंने अपना पूरा जीवन देश की सेवा और शिक्षा के प्रति समर्पित कर दिया था।आज उनके अधूरे ख्वाब को पूरा करने का दिन है।जिस तरह से अल्लामा शिब्ली नोमानी के दिल में कौम की मिल्लत, शिक्षा के प्रति तड़प थी वह तड़प हम सभी को पैदा करनी होगी तभी हम उनके ख्वाबों को पूरा कर सकते है। 

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