आज़मगढ़।
रिपोर्ट: वीर सिंह
आजमगढ़ 09 दिसम्बर-- 09 दिसम्बर 2021 को मिशन शक्ति के अन्तर्गत कार्यस्थल पर महिलाओं का लैंगिक उत्पीड़न अधिनियम 2013 को लागू करने के 08 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में लखनऊ स्थित संस्था एसोसिएशन फार एड्वोकेशी एण्ड लीगल एनीशिएटिव (आली) के निदेशक सुश्री रेनू मिश्रा द्वारा कार्यस्थल पर महिलाओं का लैंगिक उत्पीड़न अधिनियम 2013 के प्राविधानों के सम्बन्ध में मेगा जागरूकता कार्यक्रम को प्रोजेक्टर के माध्यम से जूम ऐप के द्वारा कलेक्ट्रेट सभागार में अपर जिलाधिकारी वि0/रा0 आजाद भगत सिंह की उपस्थिति में आयोजित किया गया।
निदेशक महिला कल्याण, उ0प्र0 लखनऊ मनोज कुमार राय ने बताया कि कार्यस्थल पर महिलाओं के लैंगिक उत्पीड़न से संबंधित मेगा जागरूकता कार्यक्रम महिलाओं का लैंगिक उत्पीड़न अधिनियम 2013 के 08 वर्ष पूर्ण होने पर मनाया जा रहा है। उन्होने कहा कि कोई भी कानून अपने लक्ष्य पर तभी पहुॅच सकता है, जब समाज के सभी लोग कानून के प्रति जागरूक हो जायें। उन्होने समस्त विभागों से कहा कि अपने-अपने कार्यालयों में महिलाओं के लैंगिक उत्पीड़न को रोकने के लिए कमेटी का गठन कर लिया जाय और कमेटी के माध्यम से लैंगिक उत्पीड़न के माध्यम से जो भी शिकायतें प्राप्त हों, उसे प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण करायें।
आली संस्था की अपूर्वा ने बताया कि महिलाओं के लिए कानून की जानकारी होना समाज के लिए परिवर्तन है। कानून की सही जानकारी होनी चाहिए। उन्होने बताया कि जिन-जिन कार्यस्थलों पर महिलाओं द्वारा कार्य किया जाता है, उन्हें कार्यस्थल माना जाता है, चाहे महिलाएं कार्यालय में कार्य करें या फिल्ड में बाहर जाकर कार्य करें, कार्य के समय में वह स्थान कार्यस्थल ही माना जायेगा। इसी के साथ ही कार्यस्थल पर महिलाओं का लैंगिक उत्पीड़न से संबंधित पीपीटी के माध्यम से विस्तार से बताया गया। उन्होने बताया कि विशाखा, जागोरी, काली आदि संस्थाओं ने सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न का मुद्दा उठाया, सुप्रीम कोर्ट ने मामले का गम्भीरता से लिया और इस मामले में 1997 में दिशा निर्देश तय किये, जिन्हें विशाखा गाइडलाइन कहा जाता है। विशाखा गाइडलाइन के अन्तर्गत यौन उत्पीड़न को परिभाषित किया गया। कामकाजी महिला के प्रति सरकार और नियोक्ता की जिम्मेदारी तय की गयी, यौन उत्पीड़न के रोकथाम के लिए उचित उपाय बताये गये एवं ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए प्रत्येक कार्यस्थल पर समिति बनाने की बात कही गयी।
उन्होने बताया कि विभागों में दो तरह की समितियॉ गठित की जाती है, जिसमें आन्तरिक समिति व स्थानीय समिति शामिल हैं। आन्तरिक समितियॉ उन कार्यालयों में गठित की जानी चाहिए, जिसमें कर्मचारियों की संख्या 10 या उससे अधिक हो, आंतरिक शिकायत समिति में मुख्य 04 सदस्य होने चाहिए, इसमें अध्यक्ष, कार्यस्थल के क्रम में कम से कम 02 कर्मचारी और गैर सरकारी संस्थाएं, समिति में 50 प्रतिशत महिलाएं होनी चाहिए एवं समिति के प्रत्येक सदस्यों का कार्यकाल 03 साल का होगा। उन्होने बताया कि उन विभागों में स्थानीय समिति का गठन किया जाना चाहिए, जिसमें कर्मचारियों की संख्या 10 से कम हो। स्थानीय समिति में मुख्यत 5 सदस्य होने चाहिए।
उन्होने बताया कि महिलाओं का लैंगिक उत्पीड़न अधिनियम 2013 के अन्तर्गत कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न से पीड़ित महिलाओं के लिए शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया, सुलह समझौते जॉच प्रक्रिया, शिकायतकर्ता को राहत प्रदान किये गये हैं। उन्होने बताया कि नियोक्ता को कार्यस्थल पर कार्य करने लायक सुरक्षित वातावरण प्रदान करना, जिसमें उन सब लोगों से सुरक्षा जो उस कार्यस्थल पर आ रहे हैं। कार्यालय में नोटिस बोर्ड पर आंतरिक शिकायत समिति का नाम, पता व दण्डात्मक प्रावधानों को लिखा जाना चाहिए।
जिला प्रोबेशन अधिकारी ने सभी से अपील किया कि महिलाओं का लैंगिक उत्पीड़न अधिनियम 2013 के सम्बन्ध में सभी को जागरूक करें।
इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक ट्रैफिक सुधीर जायसवाल, जिला समाज कल्याण अधिकारी मोती लाल, जिला प्रोबेशन अधिकारी बीएल यादव, जिला पंचायत राज अधिकारी लालजी दूबे, उपायुक्त उद्योग प्रवीण कुमार मौर्य, जिला समाज कल्याण अधिकारी (विकास) विनोद सिंह, महिला कल्याण अधिकारी प्रीति उपाध्याय, डीसी अन्नू सिंह, वन स्टाफ सेन्टर मैनेजर सरिता पाल, अन्य संबंधित जिला स्तरीय अधिकारी सहित महिला कल्याण विभाग की पिंकी सिंह, शिवाली त्रिपाठी, ममता यादव आदि उपस्थित रहे।