आज़मगढ़।
रिपोर्ट: वीर सिंह
आजमगढ़: जीयनपुर थाना क्षेत्र के बरजला गांगेपुर गांव निवासी अरविन्द राय पर साड़ ने जानलेवा हमला कर दिया। जिससे वह गम्भीर रुप से घायल हो गये। जिन्हे उपचार के लिए एक नीजी हास्पिटल में भर्ती कराया गया है।
शासन प्रशासन द्वारा छुट्टा पशुओं के संरक्षण के लिए गांवों में कई गौशाा का निर्माण किया गया है जहां छुट्ठा पशुओं को रखने का निर्देश भी दिया गया। जिससे कि किसानों को किसी भी प्रकार की हानी इन छुट्ठा पशुओं से न हो सके। जिला प्रशासन के सख्त निर्देश के बाद भी बहुत से छुट्टा प्शु आज भी गांव में भ्रमण करते देखे जा सकते हैं जो किसानों की फसलों को तो बर्वाद कर ही रहे हैं इसके साथ ही वह किसानों के लिए जान का दुश्मन बनें हुए हैं। ऐसा ही एक मामला जीयनपुर कोतवाली क्षेत्र के बरजला का है वहां के निवासी अरविन्द राय 60 वर्ष को साड़ मारकर गम्भीर रुप से घायल कर दिया। स्थानीय लोगों की मदद से उन्हे बचाया गया। परिजनों ने उन्हे उपचार के लिए शहर के एक नीजी अस्पताल में भर्ती कराया जहां वह जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं।
इसके साथ ही कुछ पूर्व उस साड़ ने भिरगू दुबे, रामजनम यादव सहित आधा दर्जन लोगों को मारकर घायल कर दिया है। साड़ के आतंक से ग्रामीण काफी भयभीत हैं और ग्रामीणों का घर से निकलना मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों ने बताया कि सबसे बड़ी समस्या छोटे-छोटे बच्चों की है जो सुबह पढ़ने के लिए विद्यालय जाते हैं। ऐसी स्थिति में यदि साड़ किसी बच्चे पर हमला कर देगा तो उसकी जान भी जा सकती है। इस सम्बंध में ग्रामीणों ने जीयनपुर कोतवाली और एसडीएम सगड़ी को जरिये फोन से सूचना दे दी है लेकिन अभी तक प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गयी। ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन द्वारा साड़ के आतंक से छुटकारा नहीं दिलाया जाता है तो ग्रामीण धरना प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होगें।
इसके साथ ही कुछ पूर्व उस साड़ ने भिरगू दुबे, रामजनम यादव सहित आधा दर्जन लोगों को मारकर घायल कर दिया है। साड़ के आतंक से ग्रामीण काफी भयभीत हैं और ग्रामीणों का घर से निकलना मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों ने बताया कि सबसे बड़ी समस्या छोटे-छोटे बच्चों की है जो सुबह पढ़ने के लिए विद्यालय जाते हैं। ऐसी स्थिति में यदि साड़ किसी बच्चे पर हमला कर देगा तो उसकी जान भी जा सकती है। इस सम्बंध में ग्रामीणों ने जीयनपुर कोतवाली और एसडीएम सगड़ी को जरिये फोन से सूचना दे दी है लेकिन अभी तक प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गयी। ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन द्वारा साड़ के आतंक से छुटकारा नहीं दिलाया जाता है तो ग्रामीण धरना प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होगें।