आज़मगढ़।
रिपोर्ट: गौरव सिंह राठौर
आज़मगढ़:सगड़ी तहसील क्षेत्र में यदि कुम्हारों की बात करें तो उनके स्थिति काफी दयनीय है नवरात्रि के चलते मिट्टी के बर्तनों के बिक्री में काफी इजाफा हुआ है लेकिन उनका कहना है कि मेहनत के मुताबिक बर्तनों के दाम ना मिलने से उनके लिए तमाम मुश्किलों पैदा कर रहा है मिट्टी के बर्तनों को पकाने के लिए अच्छे खासे ईंधन की जरूरत होती है जो इस आमदनी से खरीद पाना संभव नहीं रह गया है
आपको बता दे कि मिट्टी से कलाकृति और बर्तन बनाने वाले कुम्हारों की स्थिति दयनीय हो गई है. महज दाल रोटी कमाने में ही एड़ी चोटी का जोर लग रहा है. कुम्हार यानी मिट्टी का राजा आज दाने-दाने को मोहताज है. वह बमुश्किल अपना परिवार चला पाता है. मिट्टी खरीदने से लेकर उसके बर्तन बनाने और साज-सज्जा में लगे खर्च और मेहनत के एवज में इन कुम्हारों को बस परिवार चलाने भर का ही फायदा मिलता है।
आपको बता दे कि मिट्टी से कलाकृति और बर्तन बनाने वाले कुम्हारों की स्थिति दयनीय हो गई है. महज दाल रोटी कमाने में ही एड़ी चोटी का जोर लग रहा है. कुम्हार यानी मिट्टी का राजा आज दाने-दाने को मोहताज है. वह बमुश्किल अपना परिवार चला पाता है. मिट्टी खरीदने से लेकर उसके बर्तन बनाने और साज-सज्जा में लगे खर्च और मेहनत के एवज में इन कुम्हारों को बस परिवार चलाने भर का ही फायदा मिलता है।