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पत्रकारों पर दर्ज फर्जी मुकदमा वापस लेने की मांग को लेकर उपजिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन।

आज़मगढ़।

रिपोर्ट: वीर सिंह

आज़मगढ़: माध्यमिक शिक्षा परिषद की इंटरमीडिएट अंग्रेजी का प्रश्नपत्र लीक होने के मामले में तीन पत्रकारों को जेल भेजने पर पत्रकारों में आक्रोश ब्याप्त है।
 सगड़ी ग्रामीण पत्रकार संगठन ने उपजिलाधिकारी सगड़ी गौरव कुमार आईएएस को राज्यपाल को ज्ञापन भेजकर बलिया जिले के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को निलंबित करने व उन पर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की। इसके अलावा साथियों की रिहाई तक आंदोलन को चलाने का एलान किया।
धरना सभा मे ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन के पत्रकारों ने बलिया जिला प्रशासन पर केंद्र निर्धारण में  वसूली का आरोप लगाते हुए कहा कि वित्तविहीन विद्यालयों को संसाधन विहीन होते हुए भी परीक्षा केंद्र बनाया गया। पर्चे लीक होने की जड़ में यह बात है। इस मामले में प्रबंधकों और अध्यापकों, पत्रकारों को तो जिम्मेदार ठहराया जा रहा है, लेकिन स्टैटिक मजिस्ट्रेट के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है। केंद्र निर्धारण में जो भी अधिकारी शामिल हैं, उनकी संपत्ति की जांच की जाए।

ग्रामीण पत्रकार  के जगन्नाथ पाण्डेय ने कहा कि पत्रकारों को जेल भेजना लोकतंत्र की भावना से खिलवाड़ है। इसको पत्रकार बर्दाश्त नहीं करें। जिलाधिकारी ने साजिशन व्हाट्सएप पर प्रश्नपत्र मंगवाकर मुकदमा कायम करना सरासर गलत है। गिरफ्तार तीनों साथियों अजीत ओझा, दिग्विजय सिंह और मनोज गुप्ता की अविलंब रिहाई होनी चाहिए। नकल उजागर करने वाले पत्रकारों को जेल भेजना अनुचित है। पेपर लीक मामले में पत्रकारों की गिरफ्तारी का चौतरफा विरोध तेज हो गया है।  पत्रकार का काम खबरो को उजागर करना है। यूपी में पत्रकारों की दशा दिन पर दिन दयनीय होती जा रही है। पत्रकारों की गिरफ्तारी मीडिया पर लगाम लगाने की कोशिश है। प्रशासन की कार्रवाई को दुर्भावनापूर्ण बताते हुए गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मामले में हस्तक्षेप की मांग की। कहा कि पत्रकारों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है।
इस दौरान मौके पर जीत बहादुर लाल श्रीवास्तव, जगन्नाथ पांडेय, रामजनम सिंह पटेल, आदर्श श्रीवास्तव, वीर सिंह, गौरव सिंह राठौर आदि लोग मौजूद रहे।

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