आज़मगढ़।
रिपोर्ट: गौरव सिंह राठौर
लेख: जब हम अपनी माटी की विभूतिओ को भूलने लगते हैं तो हमारे माटी का सुनहरा इतिहास मृतप्राय होने लगता है । जिसके फलस्वरूप इतिहास कला संस्कृति और साहित्य पर दूसरे लोगों का प्रभाव बढने लगता है। साहित्य और कला की उर्वरा धरती आजमगढ़ के महान साहित्यकार अयोध्या सिंह उपाध्याय ने नन्हे मुन्ने बच्चो के जागरण का एक अमर जागरण गीत लिखा है। इस गीत में एक माँ अपने कोमल हाथों और एहसासो के साथ अपने कलेजे के टुकड़े को जगाती हैं। इस अमर जागरण गीत में जागृति के भाव के साथ साथ वात्सल्य रस अपनी पराकाष्ठा पर पहुंच जाता हैं। बाल मन को जगाने के लिए अयोध्या सिंह उपाध्याय ने बडे सहज सरल शब्दों का प्रयोग किया है। आजमगढ़ सहित सम्पूर्ण हिन्दी हृदय क्षेत्र की छोटी कक्षाओं की पुस्तको में पढाया जाता रहा हैं।
यह जागरण गीत आज भी प्रासंगिक हैं जिसको आजमगढ़ सहित हिन्दी हृदय क्षेत्र की छोटी कक्षाओं में जरूर पढाया जाना चाहिए। आजमगढ़ के लोगों को अपने महान साहित्यकार अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध पर और उनके इस अमर जागरण गीत पर गर्व करना चाहिए।
यह जागरण गीत आज भी प्रासंगिक हैं जिसको आजमगढ़ सहित हिन्दी हृदय क्षेत्र की छोटी कक्षाओं में जरूर पढाया जाना चाहिए। आजमगढ़ के लोगों को अपने महान साहित्यकार अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध पर और उनके इस अमर जागरण गीत पर गर्व करना चाहिए।