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राजू श्रीवास्तव हँसाने वाला कलाकार सबको रुलाकर चला गया-प्रोफेसर अखिलेश चन्द्र


आज़मगढ़।

लेख: सत्य प्रकाश श्रीवास्तव उर्फ राजू श्रीवास्तव का जन्म 25 दिसम्बर 1963 को कानपुर (उत्तर प्रदेश) में हुआ।आपके पिता का नाम रमेश चन्द्र श्रीवास्तव और माता का नाम सरस्वती श्रीवास्तव है।आपकी पत्नी का नाम शिखा श्रीवास्तव और सुपुत्र का नाम आयुष्मान श्रीवास्तव और सुपत्री का नाम सुश्रु अंतरा श्रीवास्तव है।
राजू श्रीवास्तव होना कोई आसान बात नहीं।राजू श्रीवास्तव ने अपनी प्रतिभा का लोहा हर फील्ड में दिखाया।स्टैण्डअप कॉमेडी, अभिनेता,राजनीति,सामाजिकता हर जगह उन्होंने अपनी पहिचान बनाई।राजू श्रीवास्तव जी को सिर्फ कॉमेडियन कह देना उनकी प्रतिभा के लिये उचित नहीं है।वो एक मुक्कमल व्यक्तित्व के धनी व्यक्ति थे।
जब भारतीय समाज में टी वी का चलन बढ़ रहा था तब  टी वी के पर्दे पर राजू श्रीवास्तव जी उस समय के सुपरस्टार के एक्टिंग की मिमिक्री का दौर लेकर आये।भारतीय दर्शकों ने इस नव प्रयोग को हाथों-हाथ लिया।सुपरस्टार अभिताभ बच्चन की राजू श्रीवास्तव द्वारा की गई उनकी मिमिक्री आज भी मन मस्तिष्क के पटल पर अंकित हैं और ताउम्र रहेगी।
गजोधर भैया की एक्टिंग के तो सब कायल हैं ही। आपने गजोधर भैया की एक्टिंग पर्दे पर इस तरह की कि भारतीय लोग गजोधर भैया में अपनी छवि ढूढ़ते थें।
एक कलाकार जब दूसरे कलाकार की एक्टिंग की मिमिक्री कर उसमें रोजगार की तलाश करता है तो यह बड़े कलाकार होने का भी सबूत है क्योंकि आप अपनी एक्टिंग तो अपने  तरीके से करतें हैं और दूसरे कलाकार की एक्टिंग बिल्कुल हूबहू उसकी तरह करना कम से कम मैं तो इसे बेहतरीन मानता हूँ।
राजू श्रीवास्तव ने मिमिक्री का एक नया रोजगार सृजित किया।आज हजारों कलाकार इस विधा से अपना और अपने परिवार का भरण पोषण कर रहें हैं।
भारतीय टी वी उद्योग में राजू श्रीवास्तव ने हर प्लेटफार्म पर अपना शत प्रतिशत योगदान दिया।रजत शर्मा के शो आपकी अदालत में राजू श्रीवास्तव जी का साक्षात्कार हमेशा के लिये मील का पत्थर बना रहेगा।
राजनीति के नेताओं की भी मिमिक्री राजू श्रीवास्तव जी बड़ी शालीनता से व्यंग में अभिनीत करते थे।इस विधा में उनका सर्वाधिक प्रिय करेक्टर हमेशा श्री लालू यादव हुआ करते थे और लोग बड़ी मुहब्बत से उस शो को देखते थे।
राजू श्रीवास्तव जिस तरह जिंदगी में हमेशा हंसाते रहें उसी तरह उन्होंने जिंदगी से जल्दी हार भी नहीं मानी।लगभग 42 दिन आई सी यू में रहकर अंततः आज दिनाँक 21 सितम्बर को वह जिन्दगी की जंग हार गये और सबको हँसाने वाला कलाकार सबको रुलाकर चला गया।
मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि वो इस महान आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और परिवार को दुःख की इस घड़ी में सहन शक्ति प्रदान करें ।

लेखक: प्रोफेसर अखिलेश चन्द्र
श्री गाँधी पी जी कॉलेज, मालटाटरी,
आजमगढ़

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