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लेख- अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पूरे विश्व में प्रतिवर्ष 11 अक्टूबर को मनाया उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस विशेष दिन को मनाए जाने का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें समाज में सम्मान और सुरक्षा का एहसास कराना है। बताते चलें कि, इस विशेष दिन को सर्वप्रथम एक निजी संस्था के द्वारा मनाए जाने का क्रम शुरू किया गया था। इसकी बढ़ती लोकप्रियता के साथ धीरे-धीरे इसे पूरे विश्व में सम्मान मिलने लगा अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के मौके पर विश्व के 50 से अधिक देशों में बालिकाओं को सम्मान और आत्म निर्भर बनाने की विभिन्न प्रकार की विशेष मुहिम चलाई जाती है।
राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाने का उद्देश्य भारत की लड़कियों को सहायता और अवसर प्रदान करना है। इसका उद्देश्य बालिकाओं के अधिकारों के बारे में जागरूकता को बढ़ावा देना और बालिका शिक्षा के महत्व और उनके स्वास्थ्य और पोषण के बारे में जागरूकता को बढ़ाना है। कन्या भ्रूण हत्या और लैंगिक असमानता से लेकर यौन शोषण तक सभी मुद्दों पर बालिकाओं और लोगों को जागरूक करना है। लड़कियों को असमानताओं, बालिका अधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य और लैंगिक भेदभाव का आज भी सामना करना पड़ता है, ऐसे में बेटियों को जागरूक करने के लिए हर साल राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है। ताकि वह अपने अधिकारों को जाने और उनका सदुपयोग करे
पूरे विश्व में भले की वर्तमान समय में लड़कियों के जन्म और उनके काम करने को लेकर आधुनिकता बड़ी है मगर वर्तमान समय में भी बहुत समाज में लड़कियों को वह सम्मानित दर्जा नहीं मिल पाया है जिसकी वह हकदार है।
भारतीय समाज में स्त्री को पुरुष के समान का दर्जा नहीं दिया जा रहा है। आधुनिकता की इस चकाचौंध में शिशु रूप की आजादी महिलाओं को दी गई है। विड़बना है कि, आज भी महिलाओं को समाज में वह वास्तविक बराबरी का दर्जा नहीं मिल सका है। इस विषय पर चिंता व्यक्त करते हुए एक निजी संस्था के द्वारा “क्योंकि मैं लड़की हूं” मुहिम की शुरुआत साल 2008 में शुरू की गई।
धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस का असर लोगों पर दिख रहा है और स्त्री को समाज में सम्मान और एक नया दर्जा देने का प्रयास किया जा रहा है।
लेखिका: सरस्वती शिल्पी सिंह
सुधा अमृतम वेलफेयर सोसाइटी