Breaking News

पूर्वांचल के साहित्यिक-सांस्कृतिक अवदान पर अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी, पुस्तक का लोकार्पण


आज़मगढ़।

रिपोर्ट: वीर सिंह

आजमगढ़। महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय, आजमगढ़ के न्यू सेमिनार हॉल में हिंदी विभाग की प्रवक्ता डॉ. निधि सिंह के संयोजन में “पूर्वांचल का साहित्यिक और सांस्कृतिक अवदान (आजमगढ़ के विशेष संदर्भ में)” विषय पर एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य आयोजन हुआ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने की। संगोष्ठी का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके बाद मंचस्थ अतिथियों को स्मृति चिन्ह और अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने कहा कि “हिंदी आज विश्व की तीसरी बड़ी भाषा है और ऐसे आयोजनों से हिंदी जल्द ही दूसरे स्थान पर पहुंचेगी।”
डॉ. मीरा सिंह ने पूर्वांचल के लोकगीतों की वैश्विक पहचान पर चर्चा की। डॉ. शिव कुमार निगम ने कहा कि पूर्वांचल का साहित्य हिंदी को समृद्ध करता है। प्रो. दीपक प्रकाश त्यागी ने हरिऔध, मलयज, राहुल सांकृत्यायन जैसे साहित्यकारों के योगदान का उल्लेख किया। प्रो. प्रभाकर सिंह ने भोजपुरी साहित्य की उपलब्धियों को रेखांकित किया, वहीं प्रो. प्रत्यूष दुबे ने कैफ़ी आज़मी जैसे रचनाकारों के महत्व पर जोर दिया।

संगोष्ठी दो सत्रों में—ऑनलाइन और ऑफलाइन—आयोजित हुई।
इस अवसर पर डॉ. निधि सिंह के संपादन में “पूर्वांचल का साहित्यिक और सांस्कृतिक अवदान” विषयक पुस्तक का लोकार्पण भी हुआ। 272 पृष्ठों की इस पुस्तक में देश-विदेश के 42 विद्वानों के शोधपत्र शामिल हैं। पुस्तक का प्रकाशन महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय ने किया है और मुद्रण द पर्पल पेपर, नई दिल्ली द्वारा हुआ।

पुस्तक पर चर्चा करते हुए संकायाध्यक्ष प्रो. देवेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि “डॉ. निधि ने अल्प समय में साहित्य को समृद्ध करने वाला महत्वपूर्ण कार्य किया है। सचमुच, वे साहित्य की निधि हैं।”
प्रो. गीता सिंह ने कैफ़ी आज़मी, शिबली नोमानी और हरिऔध का उल्लेख करते हुए कहा कि इस पुस्तक से आजमगढ़ और पूर्वांचल का साहित्य और समृद्ध होगा। प्रो. अखिलेश चंद्र ने भी इस उपलब्धि को अनूठा उदाहरण बताया।


संगोष्ठी के पहले सत्र का संचालन डॉ. निधि सिंह और दूसरे सत्र का संचालन सुश्री वैशाली सिंह ने किया। स्वागत भाषण सुश्री मनीषा सिंह ने दिया और आभार डॉ. हिमांशु राय ने प्रकट किया।
इस दौरान सर्वश्रेष्ठ शोध पत्र प्रस्तुति के लिए डॉ. बालचंद्र प्रसाद, शिवांगी सिंह, कंचलनलता, पल्लवी पांडेय, गरिमा पांडेय और सुषमा पांडेय को सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम को सफल बनाने में आयोजन समिति के डॉ. प्रियंका सिंह, सूर्य प्रकाश अग्रहरि, शुभम राय, वैशाली सिंह और हिमांशु शेखर की सक्रिय भूमिका रही। विभिन्न समितियों ने भी विश्वविद्यालय स्तर पर योगदान दिया।

अंत में डॉ. निधि सिंह ने सभी अतिथियों, प्राध्यापकों, शोधार्थियों, छात्रों और मीडिया कर्मियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

और नया पुराने