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झोला छाप पशु डाक्टरों से क्षेत्र में मर रहे है, दुधारू पशु।

आज़मगढ़।

अधिकार सीमा के बाहर जा कर, कर रहे है इलाज।

कौन करेगा पशु पालकों की क्षति पूर्ति ?

सम्बंधित विभाग मौन क्यों ?

सरकार द्वारा, "पशु धन प्रसारण" के अंतर्गत चलायी जा रही योजना में, कुछ प्राइवेट कंपनियों को भी पशु धन प्रसारण को बढ़ावा देने के निमित्व, अनुमोदन पत्र दिया गया है। इस योजना के अंतर्गत, बेरोजगार युवाओं को पशुओं को ऋतू काल में, उसे गर्भाधान के लिए उन्नत प्रकार का वीर्य अनुप्रेवेश कराने का प्रशिक्षण दिया जाता है। सरकार द्वारा अनुमोदित इन दवा विक्रेता कम्पनीयों द्वारा जिन युवकों को  प्रशिक्षण दिया गया, उन्हें केवल इतना ही अधिकार है कि- वे उपयुक्त समय में पशुओं को कृत्तिम रूप से गर्भाधान करें। परंतु- ग्रामीण भोले भाले पशु पालकों को, इन उत्प्रेरकों ने धोखे में रख कर, स्यंम को, पशु चिकित्सक बता कर, उनके पशुओं की चिकित्सा भी करते है। योग्यता न होने के कारण, वे रोगों का सटीक diagnosis करने में चूकते तो है ही, साथ ही अनाप सनाप दर्जनों प्रकार की सूचीवेध कर, वह ढेर सारी खाने की दवा दे कर पशुओं को शारीरिक रूपसे नुकसान पहुंचाते है, और पशु पालकों का आर्थिक रूप से शोषण करते है। इनके गलत चिकित्सा की चपेट में कभी कभी पशुओं का गर्भपात हो जाया करता है और साइड इफेक्ट के चलते अन्य अनचाहे बीमारियो का शिकार हो जाते है ,कभी कभी पशुओं की जान भी चली जाती है। इन अयोग्य चिकित्सकों के गलत चिकित्सा के कारण पशु पालको के 30% पशु अकाल में ही जान गवाते हैं, परन्तु ये पशुपालक  उक्त डॉक्टरों के द्वारा गलत चिकित्सा को समझ नहीं पाते और अपनी तकदीर को कोसते रहते हैं।
जहाँ इन झोलाछाप डॉक्टरों ने अपने निज कर्तव्य सीमा का अतिक्रमण कर, पशु चिकित्साधिकारी के समान पशुओं के सभी रोगों की चिकित्सा कर रहे है, वहीँ- इन झोला छाप अवैध अपरिपक्क पशु चिकित्सको के अलावा, किसी भी प्रकार के प्रशिक्षण से इतर अनेक सड़क छाप चिकित्सक भी इस बहती गंगा में हाथ धोते हुए, अवैध रूप से पशु चिकित्सा कर, पशु पालकों का शोषण कर रहे है। संप्रति एक झोला छाप डॉक्टर की गलत चिकित्सा केकारण एक पाड़ी की मौत हो गयी और भैस भी मरते मरते बची, जिसका इलाज चल रहा है। 

कुछ दिन पहले जीयनपुर थाना क्षेत्र में झोलाछाप चिकित्सक की गलत चिकित्सा से छह माह की गर्भवती भैस का गर्भपात हो गया। गर्भस्थ पाड़ी की भी मृत्यु हो गयी।
पशु पालक रामदरश सिंह पुत्र कोमल सिंह ग्राम हरैया (बलुआ ), जिसकी  6 महीने की गर्भवती भैंस बीमार पड़ने पर एक झोलाछाप चिकित्सक को बुलाया गया था, जिसने भैंस को 5 - 6 इंजेक्शन लगाए जिसके उपरांत भैंस को 10 मिनट में ही गर्भपात हो गया जब उसका निरीक्षण किया गया तो पता चला पाड़ी मृत पैदा हुई है। जिस पर पशुपालक रामदरश सिंह के परिवार के लोग आक्रोश में आ गए स्थिति को भांप कर उक्त झोलाछाप चिकित्सक अपनी दो पहिया वाहन छोड़ कर किसी बहाने से गावँ की गली से फरार हो गया। काफी देर तक जब चिक्तिसक वापस नही आया तो परिजनों ने अपने को ठगा महसूस किया और चिकित्सक की योग्यता पर संदेह करने लगे। इस पर पशुस्वामी ने स्थानीय थाना जीयनपुर में चिकित्सक के विरुद्ध तहरीर दी।

 उधर उक्त कथित चिकित्सक भी अपनी बाइक छिनने का आरोप लगाते हुए पशुस्वामी के खिलाफ तहरीर दी।

देश भर में फैले हुए इस प्रकार के अनाधिकृत चिकित्सकों के खिलाफ सरकार मौन क्यों है? हजारों पशुओं की मृत्यु के कारण में क्या सरकार की लापरवाही जिम्मेदार नहीं है ? कैसे मुक्ति मिलेगी इन चिकित्सकों से और कौन देगा इनको क्षतिपूर्ति का मुआवजा? अब समय आ गया कि - इन धूर्त कथित चिकित्सकों की पहचान कराया जाए ताकि पशुपालक इनके असली और नकली चेहरे में प्रभेद कर सकें।

आर्टिकल राइटर - डॉ तपन कुमार पांडेय

ब्यूरो आज़मगढ़

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