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डॉ0 अखिलेश चन्द्र शिक्षा और साहित्य के है प्रेरणा पुंज।

आज़मगढ़।

कवरेज डेस्क: पथरीले रास्तों पर चलने का आदी हूँ मैं, है एक विश्वास मन में मेरे, मेरे- तुम्हारे चलते रहने से ही,

एक न एक दिन उन पथरीले जगह पर भी राह बन जायेगी।

 डॉ0 अखिलेश चन्द्र की ये चंद लाइने उन्ही पर क्या खूब बैठती है। ग्रैजुएशन की पढ़ाई के दौरान अपने गुरु डॉ0 रमाकांत सिंह टी डी कॉलेज जौनपुर से इस तरह प्रभावित हुये कि जीवन में शिक्षक ही बनना है मन में ठान लिया।अपनी कड़ी मेहनत और आदर्श गुरु के निर्देशित राहों पर चलते हुये आज श्री गाँधी पी जी कॉलेज ,मालटारी,आजमगढ़ में शिक्षक प्रशिक्षण विभाग में असि0 प्रोफेसर के पद पर कार्यरत है। यह राह बहुत आसान नहीं थी ,यहाँ तक पहुँचने में इनकी कड़ी मेहनत और लगन काम आयी। इस पद पर आने से पूर्व ये इसी पद पर गांधी स्मारक पी जी कॉलेज, समोधपुर, जौनपुर में भी 21 माह काम कर चुके हैं। इनके विभिन्न विद्यार्थी असि0 प्रोफेसर, प्रवक्ता,शिक्षक, जेलर ,समीक्षा अधिकारी बन देश और समाज की सेवा कर रहे हैं। इनके पढ़ाये छात्र इन्हें अपना आदर्श भी मानते है ,जो छात्र एक बार इनसे जुड़ जाता है वो आजीवन जुड़ा रहता है ।इनके व्यक्तित्व से प्रभावित रहते है।इन्ही के बताये रास्तों से चलते हुये इनका एक छात्र श्याम मोहन सिंह उत्तरांचल में असि0 प्रोफेसर पद पर कार्यरत है।अपने महाविद्यालय में भी ये हर कार्य में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेते है।पिछले 10 वर्षों से ये सांस्कृतिक कार्यक्रम के संयोजक  के साथ साथ विश्वविद्यालय के परीक्षा उड़ाका दल के सदस्य भी रह चुके है।आप अपने कॉलेज के शिक्षक संघ के सर्व सम्पति से महामन्त्री भी है।

इनकी गहरी रूचि साहित्य और शिक्षा क्षेत्र  के साहित्य में भी है।आपके प्रधान सम्पादकत्व में "अखिल गीत शोध दृष्टि " तथा "शोध अमृत "अंतर्राष्ट्रीय शोध जर्नल का आजमगढ़  से पिछले 10 वर्षों से प्रकाशन हो रहा है।इन शोध जर्नल का लेखकीय प्रसार भारत में 21 राज्य और विश्व स्तर पर कनाडा,नेपाल,मॉरीशस,और जापान तक है अब तक कुल 16 अंक प्रकशित है।आपकी कुल 06 पुस्तकें भी प्रकशित है।अपने तरह की इनकी और इनकी पत्नी डॉ0 गीता सिंह जो डी ए वी पी जी कॉलेज आजमगढ़ में हिन्दी विभागाध्यक्ष है की अनूठी कविता संग्रह "सहचर -मन "(2010 )में प्रकशित है जो संयुक्त रूप से पति -पत्नी की पहली कविता संग्रह है।इस पुस्तक में दोनों की 50 -50 कवितायेँ प्रकशित है।आपकी दूसरी प्रकाशित संयुक्त संपादित पुस्तक "पर्यावरण दशा एवम् दिशा  (2011 )है ,जिसमे कुल 42 लेखों का संकलन है जो पर्यावरण के बारे में अच्छी जानकारी देती है।इनकी तीसरी संयुक्त संपादित पुस्तक "उच्च शिक्षा दशा और दिशा (2014) है जिसमे कुल 52 लेख है।इस पुस्तक में भारत में संचालित उच्च शिक्षा की समस्याओं के समाधान दिए गए है।

साहित्य के विधा में इनकी प्रतिष्टित पुस्तक "अनकही"(2018) कहानी संग्रह के रूप में आयी जिसमे इनकी कुल 11 कहानियां है जो बहुत कुछ अनकहे को कह जाती है।इनकी कहानी संग्रह की साहित्य जगत में खूब चर्चा भी है।इनकी अनकही कहानी साहित्य अकेडमी भोपाल से प्रकाशित लब्ध प्रतिष्टित माषिक पत्रिका साक्षात्कार के अक्टूबर 2016 अंक में छप चुकी है।इस कहानी पर The untold story you & me नाम से एक फ़िल्म भी बनने वाली है जो अजन्मी बच्ची की कहानी है।यह कहानी बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ योजना का भी एक हिस्सा है।इस कहानी से साहित्य जगत में भी इनकी ख्याति बहुत बढ गयी है।इनकी इस पुस्तक को अब तक जिसने भी पढ़ा है उसे बहुत सराहा है ।इस कहानी के एक पाठक श्री जय प्रकाश यादव (रैदोपुर)ने कहानी पढ़कर इन्हें फोन करके बताया कि आपकी कहानी पढ़ते पढ़ते मैं रोता भी रहा और पढ़ता भी रहा।

आपकी एक बहु प्रतीक्षित पुस्तक "पर्यावरण शिक्षा "(2018)में प्रकाशित है इसमें इन्होंने कुल 11 अध्याय लिखा है।यह पुस्तक ग्रेजुएशन स्तर पर,बी 0एड0, तथा एम्0एड0 तथा पी एच -डी0 स्तर की शिक्षा के लिये समाज का मार्गदर्शन कर रही है।आपकी एक पुस्तक मनोविज्ञान पर भी है जो Burnout & Personality factors (2018) नाम से प्रकाशित है।इनके अब तक 42 शोध पत्र भी विभिन्न जर्नल में छप चुके है।आप विभिन्न राष्ट्रीय एवम् अन्तर्राष्ट्रीय सेमिनारों में विशेष ब्याख्यान देने जाते है।आपका कविता पाठ भी गोरखपुर रेडियो से प्रशारित होता है।आपने एक शैक्षिक संस्था "निधि शैक्षिक एवं शोध संस्थान का भी गठन कर रखा है जिसके आप सक्रिय सदस्य है।इस संस्थान से आपने जनपद में अब तक 04 सेमिनार भी कराये है आगे 02 और सेमिनार कराने की योजना पर कार्य कर रहे है।आपकी इस सक्रियता और योगदान के लिये जनपद की अनेक सामाजिक संगठनो ने आपको सन्मानित भी किया है।इस समय आपके शोध निर्देशन में 04 शोध छात्र शोध कार्य भी कर रहे है।इनके शोध छात्र इन्हें अपना आदर्श मानते है।महाविद्यालय के अनेको कार्य आपकी देख रेख में सफलतापूर्वक संचालित हो रहे है।आपकी बड़ी बेटी निधि सिंह की भी रूचि इन्ही की तरह साहित्य में है वो इस समय बी एच यू से हिन्दी में परास्नातक की पढ़ाई कर रहीं हैं छोटी बेटी निष्ठा सिंह ज्योति निकेतन की 12 वी की छात्रा है जो किक बोक्सिग की राष्ट्रीय खिलाडी भी है।

इन्हें स्वामी विवेकानंद सामाजिक संस्थान के सचिव श्री सुबाष सिन्हा जी सन्मानित कर चुके है।श्री विभाष इन्हें बहुत सन्मान देते है।जनपद के सामाजिक कार्यो में भी इनकी भूमिका हमेशा सराहनीय रहती है।

रिपोर्ट: वीर सिंह

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