झाँसी मऊरानीपुर के.पी.नायक मार्केट में स्थित नगर पत्रकार संघ कार्यालय में पत्रकारों के पुरोधा पं. गणेश शंकर विद्यार्थी की जयंती बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाई। कार्यालय में सभी पत्रकार ने उनके जीवन परिचय पर विस्तार से प्रकाश डाला। सर्वप्रथम गणेश शंकर विद्यार्थी के चित्र पर माल्यार्पण किया गया। इस मौके पर वक्ताओं का कहना था कि विद्यार्थी जी अपनी आर्थिक कठिनाइयों के कारण स्टैंस तक ही पढ़ सके। किंतु उनका स्वतंत्र अध्ययन अनवरत चलता ही रहा अपनी मेहनत और लगन के बल पर उन्होंने पत्रकारिता के गुणों की खुद में भली प्रकार से सहेज लिया था। उनकी सफलता के अनुसार ही उन्हें एक नौकरी भी मिली थी। लेकिन उनकी अंग्रेजी अधिकारियों से नहीं पटी जिस कारण उन्होंने नौकरी छोड़ दी थी। सामाजिक आर्थिक और राजनीतिक समस्याओं पर उनके विचार बड़े ही निर्भोग होते थे। विद्यार्थी जी ने देसी रियासतों की प्रजा पर किए गए अत्याचारों का तीर्व विरोध किया। गणेश शंकर कानपुर के लोकप्रिय नेता तथा पत्रकार, शैली कार, एवं निबंध लेखक रहे थे। वह अपने अतुल देश भक्ति और अनुपम, आत्मोसर्ग, के लिए चिर स्मरणीय रहेंगे। विद्यार्थी जी ने प्रेमचंद की तरह पहले उर्दू में लिखना शुरू किया। उसके बाद हिंदी में पत्रकारिता के माध्यम से वे आए और आजीवन पत्रकार रहे। उनके अधिकांश निबंध त्याग और बलिदान संबंधी विषयों पर आधारित है। इसके अतिरिक्त वह अच्छे वक्ता भी थे। इस मौके पर विजय ब्यास,महेश आर्य, सोनू मिश्रा,प्रमोद सिंह,प्रमोद चतुर्वेदी, संजीत तिवारी,जीत नायक,रवि परिहार,अखिलेश राज सहित आदि उपस्थित रहे।
रिपोर्ट: अखिलेश राज