मऊरानीपुर मोहल्ला पुरानी मऊ में स्थित बड़ी माता मंदिर परिसर में विशाल मेला लगा हुआ है मेले का मुख्य आकर्षण कटेरा क्षेत्र से बिकने के लिए आए हजारों मिट्टी के मटके हैं जो पिछले कई वर्षों से मेले में इसी तरह से लाकर देते जाते हैं इन घडो में पानी काफी ठंडा रहता है इसलिए घड़े हाथों-हाथ बिक जाते हैं नगर क्षेत्रवासी इन घरों के लिए नवरात्रि के मेलों की प्रतीक्षा करते हैं इन लोगों को बनाने व बेचने वालों की स्थिति क्या है यह कोई नहीं जानता जब घड़ा बनाने वाला विक्रेता राकेश प्रजापति से हमारे संवाददाता ने बात की तो उसने बताया कि यह उसके परिवार का पुश्तैनी धंधा है कई पीढ़ियों से घड़ी बनाने का बेचने का काम उनके परिवार में हो रहा है
वर्तमान में मेले में जो लगभग एक दर्जन से अधिक घड़े की दुकानें लगी हुई है वे सब इसी क्षेत्र के लोग हैं मौजूदा हालात में घडो की कीमत ₹60से लेकर100 आती है जबकि 10 वर्ष पहले ₹10 से ₹20 तक आती है राकेश प्रजापति ने बताया कि 1 लोगों का परिवार पूरे बड़े बनाने में लगा रहता है बच्चों से लेकर बुजुर्ग बड़ी मेहनत करके घडों का निर्माण करते हैं उनकी किस्मत अच्छी है जिस मिट्टी से बनाते हैं बड़े काफी ठंडा पानी देते हैं ठंडे पानी की अवधि लंबी होती है लेकिन इतनी मेहनत करने के बाद भी वे बमुश्किल अपने परिवार का भरण पोषण कर पाते हैं घड़ा पकाने के लिए ना तो ना ही कोयला आसानी से मिल पाता है ऊपर से सरकार की ओर से भी कोई मदद नहीं मिल पा रही है मेला परिसर में भी जगह की काफी कमी है वह लोग जहां भी अपनी दुकान लगाते हैं उनका उत्पीड़न होता है तथा उनसे अवैध वसूली भी की जाती है
रिपोर्ट: अखिलेश राज झाँसी