दिल्ली। धूम्रपान करने वालों में फेफड़ों की समस्या की संभावना आम लोगों की अपेक्षा कहीं अधिक होती है। फेफड़ों के कैंसर की मुख्य वजह है धूम्रपान। सिगरेट का धुआं और अल्कोहल फेफड़ों की कोशिकाओं और ऊतकों को क्षतिग्रस्त कर देते हैं इसके फलस्वरूप फेफड़ों का सामान्य कामकाज प्रभावित होता है।
जिससे उनमें कैंसरकारी ट्यूमर उतपन्न हो जाता है। सिगरेट में मौजूद जीव-विष रूपी पदार्थ हमारे फेफड़ों तक ऑक्सीजन को जाने से रोकते हैं जिसके कारण हमें कफ और खांसी के साथ-साथ कई तरह की श्वास संबंधी बीमारियां होती हैं। जो लोग धूम्रपान करते हैं उनके फेफड़ों पर इसका काफी असर पड़ता है। कभी-कभी उन्हें सांस लेने में समस्या भी होती है,| जो बाद में फेफड़ों के कैंसर या अन्य रोगों के रूप में सामने आती हैं। फेफड़ों के कैंसर से संबंधित 90 प्रतिशत मामलों में यह पाया गया है कि ये कैंसर धूम्रपान के कारण ही होता है। और अन्य समस्याएं भी होने लगती हैं। इतना ही नहीं अगर आप धूम्रपान नहीं करते हैं और ऐसे लोगों के साथ रहते हैं जो धूम्रपान करते हैं तो भी आपके फेफड़ों को खतरा हो सकता है।
मई 31 को विश्व तंबाकू दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन तंबाकू से हो रहे नुकसान के तरफ जागरुकता फैलाई जाती है। आज दुनिया भर में फेफड़ों का कैंसर सबसे अधिक पाए जाने वाला कैंसर है। इसके अलावा, प्रति वर्ष फेफड़ों के कैंसर के 1.61 मिलियन नए मामले और 1.38 मिलियन मौतें सामने आती हैं। इन आंकड़ों के बाद कैंसर से संबंधित मृत्यु दर का प्रमुख कारण फेफड़ों का कैंसर बनता है।
• सिगरेट में मौजूद केमिकल्स के कारण फेफड़ों की ऊपरी सतह पूरी तरह से क्षतिग्रस्त व लकवाग्रसत हो जाती है।
• धूम्रपान के कारण श्वास नली संकरी हो जाती है, जिससे फ्लेम की समस्या बढ़ जाती है और सांस लेने में भी तकलीफ होती है।
• कार्बन मोनोऑक्साइड, एक प्रकार का जहर है जो रक्त में पहुंचने के साथ ही शरीर के लिए नुकसानदेह हो सकता है।यह सिगरेट में मौजूद होता है।
लंग कैंसर के लक्षण।
1. चेहरे और गले में सूजन-चेहरे और गले मे सूजन होना भी लंग कैंसर से होता है। अगर अचानक से गले और चेहरे में सूजन या कोई बदलाव दिखाई दे तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
2. हड्डियों में दर्द- कैंसर के बढ़ने से जोड़ों, पीठ, कमर और शरीर के अन्य भागों में दर्द हो सकता है। कई बार हड्डियों में फ्रैक्चर भी हो सकता है।
3. पुरानी खांसी और सांस लेने में कठिनाई- लंबे समय तक खांसी रहना भी लंग कैंसर का कारण बन सकती है। आमतौर पर खांसी 2 से 3 हफ्ते तक होती है लेकिन अगर लंबे समय तक खांसी होने के साथ सीने में दर्द, और बलगम में खुन आए तो मामला गंभीर हो सकता है। सांस लेने में कठिनाई होना, सीने में दर्द, सांस लेते समय घबराहट होना भी लंग कैसर के लक्षण होते है। जब भी एेसा हो तुंरत डॉक्टर जांच जरूर करवा लें।
4. चेहरे और आवाज में बदलाव- इसका एक संकेत यह भी है कि इससे आवाज में भारीपन, कंधे और गर्दन में सूजन आ जाती हैं।
5. न्यूरोलॉजीकल लक्षण- कैंसर सेल्स का निर्माण होने पर नर्वस सिस्टम और न्यूरोलॉजीकल फंक्शन में बदलाव आने से सिरदर्द, चक्कर आना, दौरे आना और पैर व कंधे में अकड़न हो सकती है।
6. कैल्शियम की मात्रा अधिक होना- कई बार शरीर में कैल्शियम की मात्रा अधिक हो जाती है, जिससे खून जमना शुरू हो जाता है। यह भी लंग कैंसर के कारण ही होता है।
7. लगातार थकान- लगातार थकान रहना या थोड़ा सा चलने पर भी सांस फुलने लगे तो यह भी लंग कैंसर के हो सकते हैं।
आंकड़े- भारत में फेफड़ों का कैंसर (ग्लोबोकान के अनुसार, 2012)
कैंसर घटना मृत्यु- फेफड़ों के कैंसर
पुरूष-54,00049,000
महिला- 17,00015,000
लेखक- डॉ मिर्जा मसरूर
Dr. Mirza Masroor
Ph.D. (Medical Biochemistry)
Post Doc. Scientist
Maulana Azad Medical College,
University of Delhi, New Delhi