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शून्य परछाई दिवस पर पृथ्वी की परिधि मापने का प्रयोग किया गया।

हरदोई।

रिपोर्ट: विशाल बाजपेयी

पाली(हरदोई)- बुजुर्गों से सुना है परछाई आपका पीछा कभी नहीं  छोड़ती , दिलचस्प यह है कि इस सिद्धांत का  भी अपवाद है।
अमूमन प्रतिवर्ष  2 बार ऐसा समय आता है जब परछाई भी कुछ बक्त के लिए हमारा साथ छोड़ जाती है । विज्ञान क्लब के कोऑर्डिनेटरों ने बुधवार सुबह 11:00 बजे से 1:00 बजे तक  गतिविधि ऑनलाइन आयोजित की ।
क्योंकि इसी दिन महाराष्ट्र के पुणे में  शून्य परछाई की खगोलीय घटना घटित हुई।
विज्ञान प्रसार द्वारा संचालित ग्राम्यांचल विज्ञान क्लब सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज पाली में क्लब सचिव शत्रुघ्न लाल मिश्र ने  बताया की कर्क रेखा से भूमध्य रेखा के बीच व भूमध्य रेखा से मकर रेखा के बीच आने वाले स्थान पर शून्य परछाई दिवस आता है ।
यह भी सच है कि साल में मात्र 2 दिन ही सूर्य वास्तविक पूर्व दिशा में उगता है। दरअसल 2 दिन ऐसे होते हैं जब सूर्य दोपहर के समय ठीक हमारे सर के ऊपर चमकता है ।
यही कारण है कि उस समय हमारी परछाई हमारा साथ छोड़ जाती है ।परछाई ना बनने के इस घटनाक्रम को खगोल वैज्ञानिक जीरो शैडो डे कहते हैं ।
जीरो शैडो डे क्या होता है ?

जब सूर्य दक्षिण की ओर बढ़ने लगता है तो इसे दक्षिणायन कहते हैं ।
22 दिसंबर को सूर्य दक्षिणी गोलार्ध में स्थित मकर रेखा के ऊपर चमकता है ,
इस दौरान वहां पर गर्मी का मौसम होता है इस दौरान दिन लंबी और रातें छोटी होती हैं। इस दौरान भूमध्य रेखा से दक्षिण में 23.5 डिग्री अक्षांश पर स्थित मकर रेखा पर मौजूद कई स्थानों पर सूर्य की किरणें सीधी पड़ती हैं।
तब वहां भी दोपहर के समय कुछ पल के लिए शैडो नहीं बनता है।

 विज्ञान प्रसार भारत सरकार के पृथ्वी मंत्रालय द्वारा पूरे भारत में विपनेट क्लबों के माध्यम से गतिविधि करवाई गई ।इसमें पृथ्वी का अनुमानित आकार व  परिधि की गणना का प्रयास किया गया जिसमें पाली के ग्रामंचल विज्ञान क्लब के क्लब सचिव शत्रुघ्न लाल मिश्रा व सदस्यों ने भाग लिया लाक डाउन के कारण प्रयोग को कम संसाधनों में सीखने का संदेश मिला।

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