आज़मगढ़।
कविता।
तू उसे लिख और जरूर लिख ..(कविता)
...................................................................मन की बातें, जो शब्द बनकर
तुम्हारे मस्तिष्क में आयें,
जिसे लिखने से तेरा मन हरसायें
तू उसे लिख और जरूर लिख..
लिखने से मन हल्का होता है
डिप्रेशन कम होता है
दुनियां तुझे समझती है
तु दुनियां को समझता है
तू उसे लिख और जरूर लिख ...
किसी के कहने से नही
तू खुद की समझ से चल
दिलाया है ज्ञान तुझे मां-बाप ने
तू उनकी सिखायी बात पर चल
गर बुरा लगे तुझे कुछ ,
जो हो रहा गलत समाज के लिये
बन के आवाज उन सबकी
तू उसे लिख और जरूर लिख...
मत डर किसी से ,
डर बस अपने जमीर से
क्या लेकर आया था तू
और क्या लेकर जाएगा
तेरा व्यवहार ही बस रह जायेगा
इसलिये हर गलती को मत स्वीकार तू
हो खड़ा लेकर कलम की धार तू
तू उसे लिख और जरूर लिख...
कलम का सिपाही है तू
वक्त की आवाज है तू
उठ के खड़ा हो अब तू
देश की पहिचान है तू
बन जा सबकी आबाज
तू उसे लिख और जरूर लिख....
लेखक- डॉ0 अखिलेश चन्द्र
आजमगढ़।
