आज़मगढ़।
रिपोर्ट: वीर सिंह
आज़मगढ़। अभी मुहर्रम को बीते एक माह ही हुए है जिसमें सरकार ने ताजिया स्थापित करनें पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा दिया था ।मुस्लिम समुदाय की तरफ से आश्वासन दिया जा रहा था की कम संख्या के साथ ताजिया स्थापित करने की अनुमति दिया जाए जिससे बरसों पुरानी यह परंपरा रूकने ना पाए परंतु सरकार ने अपना रवैय्या साफ करते हुए कोरोना के बढ़ते प्रकोप के चलते अनुमति नहीं दिया । अब प्रदेश सरकार के नए शासनादेश के अनुसार प्रदेश भर में दशहरा पर्व मनाने के लिए सार्वजनिक मूर्ति पंडाल स्थापित करने की अनुमति प्रदान कर दी गई है ।
समाजसेवी नेहाल मेहदी ने कहा की मैं अपने सभी हिंदू भाइयों को दिल की गहराईयों से बधाई देता हूं की आप अपनी आस्था अनुसार अपना पर्व मना सकेंगे और देश का प्रत्येक मुसलमान आप की खुशी में शामिल है। लेकिन वहीं हम लोग सरकार से काफी नाराज़ हैं क्यूंकि अभी एक महीना पहले कोविड19 का बहाना बनाते हुए हम लोगों को मुहर्रम की ताजियादारी से वंचित रखा गया हमारे बार बार अनुरोध करने पर भी कम संख्या में भी ताजिया व अलम स्थापित करने और दफन करने के लिए इजाजत नहीं दिया गया बल्कि पूरी तरह से तानाशाही आदेश पारित कर हमें चौक पर ताजिया रखने से रोका गया जिससे करोड़ो मुस्लिमों का ना तो केवल दिल दुखा बल्कि आस्था पर गहरी चोट पहुचाई गई । खुलेआम हमारे मौलिक अधिकार का हनन किया गया जबकि हम लोग लगातार शासन और प्रशासन को आश्वासन दे रहे थे कि हम लोग सोशल डिस्टेंसिग का पूरी तरह पालन करते हुए आयोजन को सम्पादित करेंगे सरकार जितनी भी संख्या निर्धारित करेगी हम उसका स्वागत करते हुए पूर्ण रूप से पालन करेंगे लेकिन सरकार ने बिल्कुल सहूलत प्रदान नही की बल्कि और सख्ती बढ़ा दी थी ।
मिडीया से बातचीत करते हुए नेहाल मेहदी ने कहा की आप रिकार्ड उठाकर देख लिजिए पिछले एक महीने में कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ी है कम नहीं हुई है लेकिन सरकार ने इतना बढ़ा फैसला ले लिया केवल आस्था और श्रृद्धा की बुनियाद पर ।
मोदी जी ने नारा दिया था “सबका साथ” “सबका विकास” और “सबका विश्वास” क्या यही तरीका है करोड़ो लोगों के विश्वास जीतने का । उन्होने कहा की यह सरकार खुलेआम संविधान का गला घोट रही है और माइनॉरीटीज़ को दबाने का काम कर रही है जो आगे चलकर भारत की प्रगति एकता और अखंडता के लिए बहुत घातक सिद्ध होगा ।