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फसलों को कम लागत में अधिक पैदावार लिया जा सकता है।

आज़मगढ़।

रिपोर्ट: वीर सिंह

आजमगढ़ 23 अक्टूबर-- कृषकों की आय दोगुनी करने के परिपेक्ष में जिला कृषि रक्षा अधिकारी डाॅ0 उमेश कुमार गुप्ता द्वारा किसान भाईयों को गुर सिखाए गये, जिससे फसलों को कम लागत में अधिक पैदावार लिया जा सकता है। इसके लिए भूमि शोधन व बीज शोधन एक महामंत्र है। जिसके अन्तर्गत भूमि शोधन से ही कई प्रकार के कीट जैसे-दीमक, गुझिया, सफेद गिडार व सूत्रकृमि आदि को नियन्त्रित किया जा सकता है। इसी प्रकार बीज शोधन से कई प्रकार के फफूंदी जनित रोग जैसे-उकठा, कण्डुवा, सफेद गेरूआ, झुलसा व तुलासिता आदि भयंकर रोगांे को कम लागत में नियन्त्रित किया जा सकता है।
उन्होने बताया कि भूमि शोधन हेतु ब्यूवेरिया बेसियाना एक जैविक कीटनाशक है जिसकी 2.50 किग्रा0 मात्रा प्रति हे0 की दर से 50-60 किग्रा0 सड़ी हुई भुरभुरी गोबर की खाद में मिलाकर एक सप्ताह तक जूट की बोरी से ढ़ककर छाया में रख दें और नमी बनायी रखी जाती है। खेत की तैयारी करते समय अन्तिम जुताई के समय यथा सम्भव सायंकाल बिखेरकर मिट्टी में मिला दें। इसी प्रकार ट्राइकोडर्मा एक जैविक फफूंदीनाशक है, इससे भूमि शोधन उपरोक्त ब्यूवेरिया वेसियाना की तरह किया जा सकता है। इसी प्रकार कार्बोफ्यूरॉन 3 जी0 एक रसायनिक कीटनाशक है, जिसकी 25-30 किग्रा0 मात्रा प्रति हे0 खेत की तैयारी के समय अन्तिम जुताई में मिला दें। 
बीज शोधन, जैविक एवं रासायनिक फफूंदीनाशकों द्वारा किया जा सकता है। इसके अन्तर्गत जैविक फफूंदीनाशक के रुप में ट्राइकोडर्मा 4 ग्रा0 प्रति किग्रा0 बीज की दर से शोधित करने के उपरान्त वुआई करें। रसायनिक फफूंदीनाशक थीरम 75 प्रतिशत डब्लूएस की 2.5 ग्रा0 प्रति किग्रा0 बीज तथा कार्बेण्डाजीम 50 प्रतिशत डब्लूपी की 2 ग्रा0 प्रति किग्रा0 बीज में से किसी एक रसायनिक फफूंदीनाशक से बीज शोधन के उपरान्त ही बुआई करें। 

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