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बाहर से आने वाले आटो रिक्शा को शहर के बाहरी चौराहों पर ही रोके जाने की मांग, सौंपा ज्ञापन।

आज़मगढ़।

रिपोर्ट: शैलेंद्र शर्मा

आजमगढ़। बाहर से आने वाले आटो रिक्शा को शहर के बाहरी चौराहों पर ही रोके जाने की मांग को लेकर श्री दुर्गा जी शहर आटो चालक सेवा समिति के अध्यक्ष लक्ष्मी प्रसाद गुप्ता के नेतृत्व में जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया।
समिति के अध्यक्ष लक्ष्मी प्रसाद गुप्त ने बताया कि शहर में चलने वाले आटो और ई रिक्शा का समुचित संचालन न होने से चालकों में रोष व्याप्त है। शहर के बाहर से आने वाले आटो, ई-रिक्शा के शहर में प्रवेश किये जाने के कारण शहर में जगह जगह जाम लग जा रहा है। जबकि शहर और शहर के बाहर चलने वाले आटो, ई-रिक्शा का अलग अलग परमिट होता है। शहर के परमिटधारी आटो, ई-रिक्शा चालकों को भारी आर्थिक नुकसान के साथ-साथ शहर को जाम के झाम से जूझना पड़ रहा है। अगर बाहर से आने वाले इन आटो, ई-रिक्शा को शहर के बाहर जगह जगह बने स्टैण्ड पर रोक दिया जाय तो शहर में आटो, ई-रिक्शा की संख्या में कमी आयेगी।
ज्ञापन सौंपने वालों में सुरेश सोनकर, जितेन्द्र, संजय, भीम सोनकर, सलीम, सुनील वर्मा, अजय चौहान, आकाश, इमरान, संजय कुमार चौहान, सुरेश गुप्ता, भीम सोनकर प्रदीप रवि कुमार आदि मौजूद रहे।

सात स्थानों को चिन्हित करने की हुई मांग।

आजमगढ़। श्री दुर्गा जी शहर आटो चालक सेवा समिति ने ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले आटो को पांच चिन्हित स्थान पर रोके जाने का सुझाव दिया है। जिसमे दोहरीघाट, लाटघाट, जीयनपुर की तरफ से आने वाले वाहनों को आई.टी.आई. कालेज की बजाय हाफिजपुर चौराहे पर रोका जाय। वहीं रौनापार, बिलरियागंज से आने वाली गाड़ियों को बिलरिया की चुंगी की जगह जुनैदगंज चौराहा तो अतरौलिया, बूढ़नपुर, कप्तानगंज से आने वाले वाहनों को ब्रह्मस्थान की जगह करतालपुर तिराहे पर रोका जाय।  निजामाबाद, भदुली की तरफ से आने वालों को  बवाली मोड़ के पास रोका जाय इसके साथ ही फूलपुर, सरायमीर, लालगंज, ठेकमा, मुहम्मदपुर, मुहम्मदाबाद, मुबारकपुर की तरफ से आने वाली सभी प्राइवेट गाड़ियों को नरौली स्टैण्ड पर रोकने की मांग किया तो वहीं शहर के आटो, ई-रिक्शा को हाफिजपुर, जुनैदगंज आने-जाने की छूट दी जाय।


आज़मगढ़।

रिपोर्ट: शैलेंद्र शर्मा

राष्ट्रवादी युवा अधिकार मंच का संगठनात्मक ढांचे को चुस्त-दुरुस्त करने की कवायद तेज।

आजमगढ़। राष्ट्रवादी युवा अधिकार मंच ने संगठनात्मक ढांचे को चुस्त-दुरुस्त करने की कवायद तेज कर दिया है। जिसके क्रम में आजमगढ़ जनपद मे गुरुवार को लालगंज विधानसभा क्षेत्र देवगांव, फैजनगर मैं डॉक्टर फिरोज अहमद, मेहनगर विधानसभा के बिंद्रा बाजार मे सचिन सिंह, मुहम्मदपुर मे आलोक सिंह, दीदारगंज विधानसभा में बरदह, पुष्पनगर मे नीतीश सिंह, सिकरौर मे मान सिंह गौरव, फूलपुर विधानसभा के अंतर्गत फूलपुर मोहम्मद राशिद, अंबारी विनोद यादव, निजामाबाद विधानसभा के अंतर्गत सरायमीर मे बृजेश गुप्ता, सेंटरवा मैं प्रमोद यादव, निजामाबाद व तहबरपुर में विजय प्रताप यादव व अन्य पदाधिकारियों कार्यकर्ताओं द्वारा राष्ट्रीय अध्यक्ष शशांक शेखर सिंह पुष्कर का जनसंपर्क के दौरान जोरदार स्वागत किया गया। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने नौजवानों के जोश व ऊर्जा से उत्साहित होकर नौजवानों की भूमिका और भागीदारी को सुनिश्चित करने का संकल्प लेते हुए कहा कि जाति के नाम पर वोट बैंक की राजनीति करने वाले राजनीतिक दलों के तिलिस्म को तोड़ा जाएगा। देश और प्रदेश की राजनीति में नौजवानों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, फिर भी राजनीतिक दल नौजवानों को सिर्फ वोट बैंक और प्रचार तंत्र के रूप में सीमित रखना चाहते हैं लेकिन नौजवान अपनी भागीदारी एवं भूमिका को लेकर सजग है। जिसका परिणाम पंचायत के चुनाव में देखा जा चुका है और आगामी विधानसभा चुनाव में बगैर राष्ट्रवादी युवा अधिकार मंच के सहयोग के उत्तर प्रदेश में कोई भी सरकार नहीं बनेगी। उन्होंने कहा कि कॉमन मिनिमम प्रोग्राम के तहत संगठन के एजेंडे को शामिल करने व नौजवानों की भूमिका व भागीदारी सुनिश्चित करते हुए रोजगार जैसी प्रमुख मुद्दों को हल करने के लिए जो भी राजनीतिक दल आगे आएगा संगठन कदम से कदम मिलाकर उनका सहयोग करने का कार्य करेगी। आज प्रदेश में सबसे बड़ी समस्या बेरोजगारी है लेकिन सत्ता पक्ष व विपक्ष के पास बेरोजगारी को समाप्त करने की कोई कार्ययोजना नहीं है। लिहाजा बगैर राष्ट्रवादी युवा अधिकार मंच के एजेंडे को शामिल किए किसी भी कीमत पर बेरोजगारी समाप्त नहीं की जा सकती और दिन प्रतिदिन महंगी शिक्षा व सरकार की गलत नीतियों के कारण बेरोजगारी दिन प्रतिदिन चरम पर होगी। अंततः स्थिति ऐसी हो जाएगी पूरे देश में जयप्रकाश से भी बड़े आंदोलन का रुख अपनाते हुए प्रदेश और देश के सदनों में नौजवानों को कब्जा करना पड़ेगा। वक्त रहते यदि राजनीतिक दलों ने नौजवानों के प्रति चेतना नहीं दिखाई तो ऐसे दलों का राष्ट्रवादी युवा अधिकार मंच हमेशा विरोध दर्ज कराएगी।


आज़मगढ़।

रिपोर्ट: वीर सिंह

स्वास्थ्य-पोषण-शिक्षा-रोजगार व्यवस्था में मौलिक सुधार के संबंध में डीएम को सौंपा 10 सूत्रीय मांगपत्र।

आज़मगढ़: अखिल भारतीय प्रगतिशील छात्र मंच(AIPSF) इकाई आजमगढ़ के द्वारा मौजूदा स्वास्थ्य-पोषण-शिक्षा-रोजगार व्यवस्था में मौलिक सुधार के संबंध में विभिन्न मांगो से संबंधित 10 सूत्रीय मांगपत्र का ज्ञापन राष्ट्रपति महोदय को जिलाधिकारी आजमगढ़ के द्वारा भेजा।
अंबेडकर पार्क से छात्रों ने जुलूस निकालते हुए अपनी मांगों से संबंधित जोरदार नारें लगाए गए।छात्र एकता जिंदाबाद, इंकलाब जिंदाबाद, निजीकरण मुर्दाबाद, शिक्षा-स्वास्थ्य सहित सभी सार्वजनिक उपक्रमों को बेचना बंद करो, स्वास्थ्य और शिक्षा को निजी हाथों में बेचना बंद करो, शिक्षा-स्वास्थ्य का राष्ट्रीयकरण करो, सार्वजनिक वितरण प्रणाली को मजबूत करो,सबको पोषणयुक्त निःशुल्क भोजन की गारंटी लो, देश के सभी गांवों-मोहल्लों में सभी संसाधन युक्त एक मिनी हॉस्पिटल का निर्माण करो, जिला अस्पतालों में OT और OPD की 24 घन्टे व्यवस्था करो,सभी अस्पतालों में ICU, वेंटिलेटर की समुचित व्यवस्था करो, आबादी के मानक के अनुसार प्रशिक्षित डॉक्टरों और विशेषज्ञों की नियुक्ति करो,सबको शिक्षा सबको काम-वरना होगी नींद हराम, रोजगार को मौलिक अधिकार का दर्जा दो, सभी बेरोजगारों को काम दो, काम न मिलने तक 20 हजार रुपये मासिक जीवन निर्वाह भत्ता दो,सभी लंबित परीक्षाओ को कराते हुए उनके परिणाम जारी करो, सभी कॉलेजों-विश्विद्यालयों में ऑफलाइन क्लासेज संचालित करो,महंगाई पर रोक लगाओ आदि नारे लगाते हुए अपने मांगपत्र को सौंपा गया।

छात्र प्रतिनिधि प्रशांत ने मीडिया को बताया कि पिछले डेढ़ साल से भारत के सभी नागरिकगण कोरोना और सड़ियल स्वास्थ्य व्यवस्था के निजीकरण के चलते भयानक मंजर और जख्मो में जीने को मजबूर हैं।देश मे कई दशकों से किये जा रहे स्वास्थ्य व्यवस्था के निजीकरण के कारण सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को बदहाल बना दिया गया था जिसे इस कोरोना संक्रमण ने पर्दाफाश कर जगजाहिर बना दिया कि हमारे देश के आम जनता को ऑक्सीजन, बेड, वेंटिलेटर, एम्बुलेंस, ICU, सभी रोगों की जांच जैसी न्यूनतम सुविधाएं भी मयस्सर नहीं हो पाई है।जिस वजह से हमारे लाखों अपने सहनागरिकों को असामयिक कृत्रिम मौत हो गयी।हर एक व्यक्ति का कोई न कोई उनसे बिछड़ गया।कई छात्र अनाथ हो गए हैं।इन मौतों को हाइकोर्ट तक ने नरसंहार कहा।इस नरसंहार के बाद श्मशान, कब्रिस्तान तक के दर्दीले तस्वीरों ने पूरी इंसानी सभ्यता को झकझोर कर रख दिया था।नदियों में बहती लाशों और किनारे रेत में दबी लाशों के दर्दनाक मंजर ने पूरी दुनियां में भारत की छवि को शर्मशार किया।

संदीप ने कहा कि इस नरसंहार को स्वास्थ्य प्रदाता मुनाफाखोर निजी कंपनियों,अस्पतालों ने तो कई गुना बढ़ाया।अगर समय रहते जाँच, इलाज, उचित संसाधन और सबको पोषणयुक्त भोजन मिला होता तो इतनी ज्यादा संख्या में हमारे अपनों की अभूतपूर्व मौत नहीं हुई होती।इन मौतों की जिम्मेदार मौजूदा स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, रोजगार व्यवस्था ही है, इसलिए इसमे मौलिक सुधार अनिवार्य है।
अनिकेत ने कहा कि सरकार को मुनाफाखोर निजी कंपनियों के हाथों देश के सार्वजनिक संसाधनो को बेचने की पूरी प्रकिया पर तत्काल रोक लगाना होगा, सबको पोषणयुक्त भोजन, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार देने की गारंटी लेना होगा।जायज और लोकतांत्रिक मांगों पर उठ रही आवाज को दबाने की तानाशाही पर रोक लगाना होगा।छात्रों बेरोजगारों के शांतिपूर्ण आंदोलनों के दमन बंद करना होगा।
मांगो पर समुचित कार्यवाही न होने पर आम जनता के साथ छात्र-बेरोजगार मिलकर अपने गम और गुस्से का इजहार करने को मजबूर होंगे।जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की ही होगी।
ज्ञापन देने वालों में प्रशान्त, अवधेश, अनिकेत, संदीप,विजय, श्रेय, उत्तम, आशीष, अभिषेक, उमेश, राहुल आदि लोग उपस्थित रहें।

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