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किसान कीट/रोगों से बचाव हेतु विधियाँ/संस्तुतियाँ अपनाकर अपनी फसलों का बचाव कर सकते है।

आज़मगढ़।

रिपोर्ट: वीर सिंह

आजमगढ़ 10 सितम्बर-- जिला कृषि रक्षा अधिकारी/अधिसूचित प्राधिकारी, सुधीर कुमार ने बताया कि कृषक भाई धान की फसल में लगने वाले कीट/रोगों से बचाव हेतु विधियाँ/संस्तुतियाँ अपनाकर अपनी फसलों का बचाव कर सकते है। जिसके अन्तर्गत दीमक एवं जड़ की सूड़ी के नियंत्रण हेतु क्लोरोपायरीफॉस 20 प्रतिशत ई0सी0 3 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से सिंचाई के पानी के साथ प्रयोग करें। तना छेदक कीट से बचाव हेतु फेरोमोन ट्रैप (एसबी ल्योर) 6-8 प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करना चाहिए तथा इसके रासायनिक नियंत्रण हेतु क्यूनालफॉस 25 प्रतिशत ईसी 1.5 लीटर 500-600 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर की दर से अथवा कारटप हाइड्रोक्लोराइड 4 जीपी 18 किग्रा मात्रा को प्रति हेक्टेयर की दर से 3-5 सेमी स्थिर पानी में बिखेर कर प्रयोग करें। 
पत्ती लपेटक कीट के नियंत्रण हेतु क्लोरोपाइरीफॉस 20 प्रतिशत 2 लीटर अथवा क्यूनालफॉस 25 प्रतिशत ईसी 1.25 लीटर की दर से 500-600 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। हरा, भूरा एवं सफेद पीठ वाला फुदका के नियंत्रण हेतु एजाडिरेक्टिन 0.15 प्रतिशत ईसी 2.5 लीटर अथवा मेटाराइजिएम एनीसोप्लाई 1 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से अथवा क्लोरोपाइरीफॉस 20 प्रतिशत ईसी अथवा क्यूनालफॉस 25 प्रतिशत ईसी 1.5 लीटर 500-600 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें। खैरा रोग के नियंत्रण हेतु 5 किग्रा जिंक सल्फेट को 20 किग्रा यूरिया अथवा 2.50 किग्रा बुझे हुए चूने को प्रति हेक्टेयर की दर से 1000 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। जीवाणु झुलसा एवं जीवाणुधारी रोग के नियंत्रण हेतु स्यूडोमोनास फ्लोरिसेन्स 2 प्रतिशत एएस 2 लीटर प्रति हेक्टयर की दर से अथवा स्ट्रेप्टोमाइसिन सल्फेट 90 प्रतिशत के साथ टेट्रासाइक्लिन हाइड्रोक्लोराइड 10 प्रतिशत की 15 ग्राम मात्रा को 500 ग्राम कॉपर आक्सीक्लोराइड 50 प्रतिशत डब्ल्यूपी के साथ मिलाकर 500-700 लीटर प्रति हेक्टेयर पानी में घोलकर छिड़काव करें।

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