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सुपोषित बच्चों से ही, स्वस्थ समाज का निर्माण : सीएमओ

आज़मगढ़।

रिपोर्ट: वीर सिंह

जिले में जन आंदोलन के रूप में चला, पोषण अभियान – डीपीओ

सीफार के सहयोग से आयोजित हुई मीडिया कार्यशाला।

कार्यशाला में वक्ताओं ने पोषण विषय पर विस्तार से की वार्ता

आजमगढ़: 08 अक्टूबर 2021 - पोषण हमारी आवश्यकता है लेकिन यह सिर्फ पोषण माह में याद नहीं रखना है। ‘सही पोषण-देश रोशन’ को हमें 12 महीने अपनी दिनचर्या में रखना होगा तभी हम स्वस्थ रहेंगे। बच्चे सुपोषित होंगे तभी स्वस्थ समाज का निर्माण होगा। यह कहना है मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ आई एन तिवारी का। सीएमओ शुक्रवार को एक निजी होटल में आयोजित मीडिया संवेदीकरण कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग के तत्वाधान में सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च (सीफार) के सहयोग से आयोजित कार्यशाला में वक्ताओं ने पोषण पर खुलकर अपने विचार व्यक्त किए।
सीएमओ डॉ आई एन तिवारी ने कहा कि इस माह कृमि मुक्ति अभियान शुरू होने जा रहा है। उन्होंने अपील की है कि इस अभियान के तहत आप लोग विभाग की तरफ से मिलने वाली मुफ्त दवा का सेवन अपने बच्चों को अवश्य करायें।

जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ) मनोज कुमार मौर्य ने कहा कि बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग (आईसीडीएस) के अंतर्गत सभी विकासखंडों में एक सितंबर से 30 सितंबर तक मनाए गए राष्ट्रीय पोषण माह में पोषण व स्वास्थ्य से जुड़ी जन जागरूकता गतिविधियां की गईं। उन्होने कहा कि पोषण माह के समापन होने से विभाग की जन जागरूक गतिविधियों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। यह निरंतर चलने वाला अभियान है। उन्होने कहा कि स्वस्थ और सुपोषित समाज के लिए पोषण माह को जन आंदोलन बनाने की आवश्यकता है। 
            
डीपीओ ने कहा कि “संभव अभियान” जुलाई से सितंबर तक चला। इसमें जुलाई को मातृ पोषण के रूप में मनाया गया। अगस्त को बाल पोषण तथा सितंबर को प्रथम 1,000 दिवस के रूप में मनाया गया। कुपोषित बच्चों के प्रबंधन के तरीके बताते हुए कहा कि आंगनबाड़ी, आशा, एएनएम संयुक्त रूप से कुपोषित बच्चों का चिह्नांकन किया गया। जो बच्चे सैम हैं, उन्हें पोषण पुनर्वास केंद्र में भेजा जायेगा। 
           
बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) निरुपमा वर्मा ने पीपीटी के माध्यम से कुपोषण के कारण तथा उसके परिणाम, पोषण माह की गईं जन जागरूक गतिविधियों एवं उपलब्धियों के बारे में बताया। इसके साथ ही उन्होने हाथ धोने की विधि ‘सुमन-के’ के बारे में भी विस्तार से बताया। कार्यक्रम के आखिर में डीपीओ ने लाभार्थियों को सहजन के पौधे और उनके बच्चों को टिफिन बॉक्स वितरित किए। इस दौरान *लाभार्थी आरती देवी* ने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकत्री के जरिये हमें बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य व पोषण से जुड़ी बातों के बारे में बताती रहती हैं। इससे बच्चों को सुपोषित रखने में बहुत मदद मिलती है। *लाभार्थी संगीता देवी* ने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकत्री द्वारा बताए गए हाथ धोने के बारे में क्रम में हम  खाना के खाने से पहले व शौचालय के बाद हाथ धोकर ही खाना खाते हैं। हम अपने बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण व स्वच्छता पर खास ध्यान देते हैं।
            
सीफार के स्टेट प्रोजेक्ट मैनेजर लोकेश त्रिपाठी ने संस्था की गतिविधियों और भविष्य योजनाओं के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम की शुरुआत सीएमओ डॉ आई एन तिवारी और डीपीओ मनोज कुमार मौर्य ने दीप प्रज्ज्वलित कर की। कार्यशाला का मंच संचालन सीडीपीओ निरुपमा वर्मा ने किया। इस मौके पर एसीएमओ डॉ वाई के राय, एसीएमओ संजय गुप्ता, जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ परवेज़ अख्तर, सीडीपीओ के.के.सिंह, डीआईओ अशोक कुमार, डीसीपीएम विपिन पाठक, सीफार के संजीव द्विवेदी, मृदुला श्रीमाली, राहुल कुमार सिंह, जय प्रकाश तिवारी, यूनिसेफ से डीएमसी प्रकाश कुमार मिश्रा, मीडिया के प्रतिनिधि उपस्थित थे। कार्यक्रम के अंत में सीफार के मण्डल समन्वयक शुभम गुप्ता ने कार्यशाला में समस्त लोगों को धन्यवाद दिया।

बच्चों की सेहत में हुआ सुधार -

डीपीओ मनोज कुमार मौर्य ने बताया कि जनपद में सर्वे के अनुसार 6 माह से 3 वर्ष के बच्चों की  संख्या 294855, 3 वर्ष से 6 वर्ष के बच्चों की संख्या 294354, गर्भवती/धात्री महिलाएं 117279 तथा 11 से 14 वर्ष की स्कूल न जाने वाली किशोरी  बालिकाओं की संख्या 2862 है। जबकि पंजीकृत संख्या 6 माह से 3 वर्ष के बच्चों की  संख्या 275666, 3 वर्ष से 6 वर्ष के बच्चों की संख्या 248006, गर्भवती/धात्री महिलाएं 110927 तथा 11 से 14 वर्ष की स्कूल न जाने वाली किशोरी  बालिकाओं की संख्या 2079 है। जनपद में 0 से 5 वर्ष तक के कुल बच्चों की संख्या 522606, वजन किए गये बच्चों की कुल संख्या 464112 है। इसमें सामान्य श्रेणी के 403582 बच्चे, पीली श्रेणी के 48225 बच्चे, लाल श्रेणी के 12305 बच्चे, सैम बच्चे 1278 तथा मैम बच्चे 5886 हैं। वर्तमान माह में पीली श्रेणी के 1362 बच्चों, लाल श्रेणी के 965 बच्चों,188 सैम बच्चों तथा 1373 मैम बच्चों में सुधार हुआ है।

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