आज़मगढ़।
रिपोर्ट: वीर सिंह
सेवाभाव की मिसाल बनीं – आशा कार्यकर्ता रेखा
गर्भवती का कराया संस्थागत प्रसव
जच्चा–बच्चा को मिला नया जीवन
आजमगढ़, 17 नवम्बर 2021: कहते हैं कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। जहाँ लोग एचआईवी का नाम सुनकर ही डर कर मरीज से दूरी बना लेते हैं वहीं आशा कार्यकर्ता रेखा ने कुछ ऐसी ही मिसाल पेश की है कि अब वह लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई हैं। रेखा ने एचआईवी पॉज़िटिव गर्भवती का किया सहयोग। स्वास्थ्य केंद्र साथ लेकर गयी और सुरक्षित प्रसव कराया। शिशु और माँ को दिया नया जीवन।
ब्लॉक अतरौलिया की आशा संगिनी कंचन पांडे के साथ शुरू हुआ सफर पहली बार जब गर्भवती हुई थी तो (वीएचएनडी ) ग्राम स्वास्थ्य पोषण दिवस में आई थी| आशा कंचन ने कहा की एएनएम दीदी के कई बार बोलने पर प्रेग्नेंसी किट से चेक किया गया। बोलती बहुत कम थी, जब मैं उसके घर जाती तो तुरंत मिलने आ जाती थी| मेरे द्वारा पहले और दूसरे प्रसव में जांच करायी गई। सम्पूर्ण टीका व सुरक्षित प्रसव कराया गया। तब तक काल्पनिक नाम (पिंकी) और दोनों बच्चे बिल्कुल स्वस्थ थे।
ब्लॉक अतरौलिया आशा कार्यकर्ता रेखा की जुबानी - मेरी नियुक्ति उस ब्लॉक में हुई, और (पिंकी) तीसरी बार गर्भवती हुई| तब उसने तीसरे माह का अपना टेस्ट निजी चिकित्सालय में कराया, रिपोर्ट एचआईवी पॉज़िटिव आयी। डॉक्टर के परामर्श पर वह लखनऊ गई। वहाँ उसकी पुन: जांच के बाद दवा शुरू की गई। जब पिंकी लौट कर आयी तो, मैं उससे मिलने गई। पिंकी रोने लगी और कहने लगी दीदी मेरे साथ मेरा बच्चा भी एचआईवी पॉज़िटिव हो जायेगा, उसे बचा लीजिये| मैंने कहा कुछ नहीं होगा, मैं हूँ तुम्हें और तुम्हारे बच्चे की देख-भाल के लिए। एचआईवी दवा के साथ ही पिंकी का गर्भवस्था के दौरान का सम्पूर्ण टीका व जांच में, मैं उसके साथ जाती थी।
एक दिन जब उसे प्रसव पीड़ा हुई तो उसने हमें बुलाया। मैं तुरंत एंबुलेंस बुलवाई और पिंकी को साथ लेकर सीएचसी पर गई। स्टाफ पूंछती हैं कि एचआईवी वाली गर्भवती है| मैंने कहा हाँ, वह एचआईवी है इसमें घबराने की जरूरत नहीं है। यह बीमारी छूने से और न ही साथ में रहने से होती है। यह बीमारी एचआईवी संक्रमित सुई से होती है, एचआईवी संक्रमित खून से होती है| असुरक्षित यौन संबंध बनाने से होती है। एचआईवी संक्रमित मां से बच्चे में होती है लेकिन इसकी संभावना भी कम होती है। डरने की जरूरत नहीं बस, ध्यान देने की जरूरत होती है। टीटी के टीके तथा केंद्र पर नियमित जांच कराने से और डॉक्टर की निगरानी में सुरक्षित प्रसव द्वारा जच्चा-बच्चा के जीवन को सुरक्षित किया जा सकता है। पिंकी के प्रसव के दौरान सभी स्टाफ बहुत घबराये हुये थे, लेकिन सुरक्षित प्रसव उपरांत सभी बहुत खुश हुये। ऐसा लग रहा था, हम सभी ने एक जंग जीत ली। बच्चा एचआईवी नेगेटिव होने से खुशी और बढ़ गई थी। आज पिंकी और उसका बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। पिंकी डॉक्टर की निगरानी में है, नियमित दवा का सेवन कर रही है और बहुत खुश है।
