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टीबी से बचाव करें, अपनों का ख्याल करें – डॉ परवेज

आज़मगढ़।

रिपोर्ट: वीर सिंह

जिले में 207 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों  पर तैनात हैं सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी 

खोजेंगे टीबी रोगी, करेंगे जाँच,  देंगे टीबी से जुड़ी हर जानकारी  

आजमगढ़, 16 सितम्बर 2022 : जिले को 2025 तक टीबी मुक्त करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग लगातार कार्य कर रहा है। इसी क्रम में जिले में मौजूद 207 सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी की सहभागिता से ब्लॉक स्तरीय टीबी मरीजों को खोज कर उनके तुरंत उपचार को प्राथमिकता दी जा रही है। आशा कार्यकर्ता के जरिए संभावित क्षय रोगियों को चिह्नित और उनकी जांच कर तत्काल उपचार मुहैया करायेंगे। इसी उद्देश्य से सीएचओ को प्रशिक्षण दिया गया है। इसमें इन्हें टीबी मरीजों के लक्षण के बारे में विस्तार से बताया गया। यह जानकारी जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ परवेज अख्तर ने दी।
डीटीओ परवेज अख्तर ने बताया कि टीबी के जीवाणु हवा से फैलते हैं। व्यक्ति के फेफड़ों या गले में टीबी के जीवाणु होते हैं। हालांकि टीबी शरीर के किसी भी अंग में हो सकती है। फेफड़ों की टीबी संक्रामक होती है, जो कि हवा के जरिए एक से दूसरे व्यक्ति में फैलती है। जो उसके खांसने छींकने और खांसते समय जीवाणु हवा में फैल जाते हैं। टीबी के जीवाणु हवा में काफी समय तक रह सकते हैं। इसलिए जरूरी है मरीज को खांसते या सीखते समय अपने मुंह को रुमाल या तौलिये से ढक लेना चाहिए। घर में और सार्वजनिक स्थलों पर भी मास्क लगाना बेहद आवश्यक है।
जिला कार्यक्रम समन्वयक पीयूष अग्रवाल ने बताया कि सीएचओ की मद्दत से अब तक 29 मरीज खोज गए हैं| साथ ही जिले में अब तक 5409 मरीज इलाज पर हैं| सभी सीएचओ को प्रशिक्षिण के दौरान टीबी के मरीज की स्क्रीनिंग के बारे में बताया गया है, कि यदि किसी व्यक्ति को दो सप्ताह से अधिक समय से खांसी है, खांसते समय बलगम या खून आता है, वजन कम हो रहा है, बुखार रहता है, सीने में दर्द रहता है, थकान अधिक रहती है, तो ऐसे व्यक्ति की टीबी की जांच अवश्य कराएं | उन्हें बताया गया कि ओपीडी में आने वाले रोगियों से टीबी के लक्षणों के बारे में अवश्य पूछें | सीएचओ अपने क्षेत्र में आशा व एएनएम की  मदद से अपने क्षेत्र के संभावित टीबी रोगियों को चिन्हित कर  मरीज के बलगम की जांच कराने के लिए भेजेंगे| जांच में टीबी की पुष्टि होने पर टीबी सेंटर में इलाज के लिए रेफर करेंगे| मरीज की जांच व दवा की सुविधा नि:शुल्क है और निक्षय पोषण योजना में उनके पंजीकरण में सहयोग करेंगे ताकि योजना का लाभ मिल सके| मरीजों को इलाज चलने तक 500 रुपए प्रतिमाह डीबीटी के जरिए दिया जाता है।

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