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अखिल भारत प्रगतिशील छात्र मंच(AIPSF) ने 4 सूत्रीय मांगों को लेकर राष्ट्रपति को संबोधित सौंपा ज्ञापन।

आज़मगढ़।

रिपोर्ट: वीर सिंह

आज़मगढ़: अखिल भारत प्रगतिशील छात्र मंच(AIPSF) इकाई आज़मगढ़ के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी आज़मगढ़ के माध्यम से राष्ट्रपति को संबोधित अपनी 4 सूत्रीय मांगों का एक ज्ञापन भेजा।
 ज्ञापन से पूर्व शहर के विभिन्न कॉलेजों के छात्रों व उनके अभिभावकों में सूत्रीय मांगों के समर्थन में व्यापक हस्ताक्षर अभियान चलाया गया था।सैकड़ों हस्ताक्षर युक्त ज्ञापन को भेजते समय रास्ट्रपति जी से मांगो को अविलंब पूरा करने की बात पर जोर दिया गया है।
ज्ञापन देने वाले प्रतिनिधिमंडल में अंजलि, प्रियंका,संदीप, प्रशांत,विश्वजीत, दिनेश, श्रेय, राहुल, अभिषेक सहित अन्य लोग उपस्थित थे।

ज्ञापन इस प्रकार है -

भारत सरकार व राज्य सरकारों द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा  नीति:2020 में वर्णित शिक्षा विरोधी नीतियों को लागू कर देश के विश्विद्यालयों को सरकारी अनुदान बन्द कर रही हैं।बदले में उन्हें लोन देकर उसकी भरपाई छात्रों व उनके गरीब अभिभावकों से जबरन किया जा रहा है। इसी क्रम में HEFA नामक कर्ज दाता संस्था बनाकर DU, JNU समेत अनेक विश्विद्यालयों को करोड़ों का कर्ज भी दिया जा चुका है।जाहिर है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन उस कर्ज की भरपाई छात्रों से ही वसूल करेगा। इसलिए बेतहाशा फीस वृद्धि का मामला बढ़ता जा रहा है। समय से लोन न चुकाने वाले विश्विद्यालयों को देशी- विदेशी पूंजीपतियों को सौंपकर वहां व्यापार व मुनाफे का अड्डा बनाया जाएगा ताकि देश के गरीब परिवारों के बच्चे शिक्षा से बेदखल हो जाएं।

इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में हुए 400% से ज्यादा की फीस वृद्धि इसी शिक्षा विरोधी हमले का उदाहरण है। BHU में PG कोर्स व हॉस्टल की फीस में भी बेतहाशा वृद्धि की जा चुकी है।NEP-2020 के तेजी से लागू होने के बाद देखते- देखते सभी विश्विद्यालयों में फीस वृद्धि व निजीकरण का मामला दिख रहा है जो अपने आप में देश के छात्रों को शिक्षा से बेदखल करने की ही साजिश साफ होती जा रही है। शिक्षा को महंगे दाम में बेचकर देश के गरीबों-मजदूरों के बच्चों को कैसे शिक्षित किया जा सकेगा? शिक्षा का निजीकरण- बाजारीकरण करना देशविरोधी व शर्मनाक करतूत है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी स्कूलों/कॉलेजों को सरकारी अनुदान कम देते हुए पहले तो उन्हें प्रशिक्षित - स्थाई शिक्षक विहिन व संसाधनविहीन कर बर्बाद बना दिया है। अब सरकारी स्कूलों/कॉलेजों को सभी जरूरी संसाधनों व स्थाई शिक्षकों से लैश करने के बजाय 5 से 8 Km के दायरे के सभी स्कूलों को प्राइवेट स्कूलों/कॉलेजों/विश्विद्यालयों के द्वारा 'गोद लेने' यानी प्राइवेट के साथ सरकारी स्कूलों को युग्मन करते हुए अंततः स्कूलों का निजीकरण करने का शिक्षा विरोधी फरमान जारी कर दिया है। ऐसा होने पर करोड़ों गरीब बच्चे तो प्राइमरी शिक्षा भी हासिल नहीं कर पाएंगे जिससे देश के भावी भविष्य अशिक्षित व कमजोर ही रह जाएंगे ।

आप देश की मुखिया और सभी विश्विद्यालयों की कुलपति भी हैं।ऐसे में आप चाहें तो शिक्षा विरोधी- देशविरोधी साबित हो रहे NEP:2020 को रद्द करते हुए AU ,BHU समेत सभी विश्विद्यालयों में हो रहे बेतहाशा फीस वृद्धि को तत्काल रोक सकती हैं। विश्विद्यालयों को अनुदान आधारित के बजाय लोन आधारित बनाने की कार्यवाही रद्द कर सकती हैं। स्कूलों/कॉलेजों के twinning/pairing, निजीकरण-बाजारीकरण पर तुरंत लगाम लगा सकती हैं। अतः निवेदन है कि आप हमारी निम्न मांगो को अवश्य पूरा करेंगी। इन मांगों पर सैकडों छात्रों व अभिभावकों ने हस्ताक्षर कर आप से अपील किया है कि -

(1)इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में हुए 400% फीस वृद्धि वापस लिया जाए। साथ ही BHU समेत सभी कॉलेजों/विश्विद्यालयों में जारी हुए फीस वृद्धि के फरमान तत्काल रद्द हों।

(2)शिक्षा विरोधी- देशविरोधी राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) -2020 को रद्द किया जाए।

(3)शिक्षा व शिक्षण संस्थानों का निजीकरण- बाजारीकरण बन्द किया जाए!

(4)छात्रों-नौजवानों का दमन- उत्पीड़न बन्द किया जाए!

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